Wednesday, 4 February 2026

असम राइफल्स की बड़ी कार्रवाई: कछार में 60 लाख रुपए की हेरोइन बरामद, जांच जारी


 असम में नशीले पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। असम राइफल्स और कछार जिला पुलिस ने संयुक्त ऑपरेशन में 60 लाख रुपए की हेरोइन बरामद की है। इस कार्रवाई से क्षेत्र में ड्रग तस्करी के नेटवर्क पर बड़ा झटका माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, यह संयुक्त ऑपरेशन 2 फरवरी को अंजाम दिया गया। सुरक्षा एजेंसियों को ड्रग तस्करी से जुड़ी विश्वसनीय खुफिया सूचना मिली थी। इसी आधार पर असम राइफल्स और जिला पुलिस ने मिलकर इलाके में निगरानी बढ़ाई और विशेष अभियान शुरू किया।

तलाशी अभियान के दौरान जिरिघाट बाजार के पास नंदनकानन पुल के आसपास के क्षेत्र से 116.2 ग्राम हेरोइन बरामद की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी अनुमानित कीमत करीब 60 लाख रुपए बताई जा रही है। यह क्षेत्र जालिउरा से लगभग 8 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है।

ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों ने संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखते हुए इलाके में व्यापक तलाशी अभियान चलाया। फिलहाल जब्त किए गए नशीले पदार्थों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस को सौंप दिया गया है और मामले की जांच जारी है।

असम में हाल के महीनों में नशीले पदार्थों के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई तेज हुई है। इस तरह की संयुक्त कार्रवाई से ड्रग तस्करों के नेटवर्क पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है।

महाराष्ट्र में NCP की सियासत गरम: प्रफुल्ल पटेल की रणनीति से शरद पवार को झटका?


 महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों एनसीपी (NCP) के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान सुर्खियों में है। वरिष्ठ नेता शरद पवार और कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल के बीच राजनीतिक रणनीतियों को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं। हालिया घटनाक्रम ने पार्टी के भविष्य और नेतृत्व को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

पूर्व डिप्टी सीएम अजित पवार के विमान हादसे में निधन के बाद एनसीपी की राजनीति तेजी से बदलती नजर आई। उनके निधन के महज चार दिन बाद ही उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम पद की शपथ दिलाई गई। इस फैसले ने पार्टी के भीतर कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस पूरे घटनाक्रम में प्रफुल्ल पटेल और प्रदेश एनसीपी नेता सुनील तटकरे की अहम भूमिका रही। अब खबरें हैं कि सुनेत्रा पवार को पार्टी अध्यक्ष पद पर बैठाने की तैयारी भी की जा रही है, जबकि प्रफुल्ल पटेल खुद अध्यक्ष पद की दौड़ से बाहर हो गए हैं। इसे शरद पवार के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

बताया जा रहा है कि शरद पवार चाहते थे कि एनसीपी के दोनों गुट और परिवार एक बार फिर एकजुट हो जाएं। अजित पवार भी कथित तौर पर पार्टी के पुनः एकीकरण के पक्ष में थे। लेकिन हालिया फैसलों से यह प्रक्रिया और मुश्किल होती दिख रही है।

अंदरूनी बदलावों और नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों ने एनसीपी के भविष्य पर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले समय में पार्टी की दिशा और नेतृत्व संरचना क्या होगी, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।

RPSC विज्ञान शिक्षक भर्ती में योग्य अभ्यर्थियों की कमी, लाखों ने दी परीक्षा फिर भी 300 से कम चयन


 राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की सीनियर टीचर भर्ती परीक्षा में विज्ञान विषय का परिणाम चौंकाने वाला रहा है। भारी संख्या में अभ्यर्थियों के शामिल होने के बावजूद आयोग को निर्धारित पदों के मुकाबले पर्याप्त योग्य उम्मीदवार नहीं मिल पाए। 350 पदों के लिए आयोजित परीक्षा में केवल 296 अभ्यर्थी ही सफल हो सके हैं, जिससे कई पद खाली रह गए हैं।

RPSC ने आठ विषयों के कुल 2129 पदों पर भर्ती निकाली थी, जिनमें विज्ञान विषय के लिए 350 पद निर्धारित थे। विज्ञान विषय के लिए 1,68,206 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था।
9 सितंबर 2025 को हुई परीक्षा में 1,17,364 उम्मीदवार शामिल हुए, लेकिन अंतिम परिणाम में चयन संख्या 300 से भी कम रही।

इस भर्ती में आयोग द्वारा लागू ‘पांचवें विकल्प’ का नियम बड़ा कारण बनकर सामने आया। जिन अभ्यर्थियों ने 10% से अधिक प्रश्नों में कोई विकल्प नहीं भरा, उन्हें सीधे अयोग्य घोषित कर दिया गया।
इसी नियम के चलते 359 अभ्यर्थी तकनीकी कारणों से चयन प्रक्रिया से बाहर हो गए। नियम के अनुसार, यदि उम्मीदवार को उत्तर नहीं आता था तो उसे अनिवार्य रूप से पांचवां विकल्प भरना जरूरी था।

न्यूनतम अंक हासिल न होने के कारण एसटी, एससी महिला और दिव्यांग वर्ग के कई पद खाली रह गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के बावजूद योग्य अभ्यर्थियों की कमी ने भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि कड़े नियम, तकनीकी त्रुटियां और न्यूनतम अंक की शर्तें इस स्थिति के पीछे प्रमुख कारण हो सकती हैं। यह मामला अब शिक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।

मिसकैरिज के दर्द पर बोलीं अर्चना पूरन सिंह – ‘बहुत अकेला महसूस हुआ’


  मशहूर अभिनेत्री और टीवी पर्सनैलिटी अर्चना पूरन सिंह ने हाल ही में अपने नए यूट्यूब वीडियो में अपनी प्रेग्नेंसी से जुड़ा एक बेहद निजी और भावुक अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि एक समय उन्हें मिसकैरिज का सामना करना पड़ा था, जिसने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया था।

अर्चना ने कहा कि उस मुश्किल दौर में वह खुद को बहुत अकेला महसूस कर रही थीं। उन्होंने यह भी बताया कि जब यह घटना हुई, तब उनके पति परमीत सेठी फुटबॉल खेलने गए हुए थे, जिससे उन्हें भावनात्मक रूप से और ज्यादा खालीपन महसूस हुआ।

वीडियो में अर्चना ने महिलाओं की मानसिक और भावनात्मक स्थिति पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि मिसकैरिज सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि गहरा मानसिक आघात भी होता है, जिसके बारे में समाज में खुलकर चर्चा होनी चाहिए ताकि महिलाएं खुद को अकेला महसूस न करें।

उनकी इस ईमानदार बातचीत को सोशल मीडिया पर काफी सराहना मिल रही है। कई लोगों ने उनके साहस की तारीफ करते हुए कहा कि इस तरह की खुली बातचीत समाज में जागरूकता बढ़ाने में मदद करती है।

मिसकैरिज के दर्द पर बोलीं अर्चना पूरन सिंह – ‘बहुत अकेला महसूस हुआ’


  मशहूर अभिनेत्री और टीवी पर्सनैलिटी अर्चना पूरन सिंह ने हाल ही में अपने नए यूट्यूब वीडियो में अपनी प्रेग्नेंसी से जुड़ा एक बेहद निजी और भावुक अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि एक समय उन्हें मिसकैरिज का सामना करना पड़ा था, जिसने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया था।

अर्चना ने कहा कि उस मुश्किल दौर में वह खुद को बहुत अकेला महसूस कर रही थीं। उन्होंने यह भी बताया कि जब यह घटना हुई, तब उनके पति परमीत सेठी फुटबॉल खेलने गए हुए थे, जिससे उन्हें भावनात्मक रूप से और ज्यादा खालीपन महसूस हुआ।

वीडियो में अर्चना ने महिलाओं की मानसिक और भावनात्मक स्थिति पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि मिसकैरिज सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि गहरा मानसिक आघात भी होता है, जिसके बारे में समाज में खुलकर चर्चा होनी चाहिए ताकि महिलाएं खुद को अकेला महसूस न करें।

उनकी इस ईमानदार बातचीत को  पर काफी सराहना मिल रही है। कई लोगों ने उनके साहस की तारीफ करते हुए कहा कि इस तरह की खुली बातचीत समाज में जागरूकता बढ़ाने में मदद करती है।

Sunday, 1 February 2026

वास्तु टिप्स: घर में कूड़ेदान रखने की सही जगह, इन गलतियों से बढ़ सकता है वास्तु दोष


  नई दिल्ली. आमतौर पर लोग घर की साफ-सफाई पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन कूड़ेदान यानी डस्टबिन की सही जगह को नजरअंदाज कर देते हैं. वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में रखा कूड़ेदान भी सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा को प्रभावित करता है. यदि डस्टबिन गलत दिशा या गलत स्थान पर रखा जाए, तो इससे वास्तु दोष उत्पन्न हो सकता है और घर में मानसिक तनाव, आर्थिक परेशानी और स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं.

वास्तु शास्त्र के मुताबिक, घर में कूड़ेदान रखने के लिए दक्षिण-पश्चिम (South-West) या उत्तर-पश्चिम (North-West) दिशा को उचित माना जाता है. इन दिशाओं में डस्टबिन रखने से नकारात्मक ऊर्जा घर से बाहर जाने में मदद मिलती है. वहीं, रसोईघर में कूड़ेदान रखने की स्थिति में इसे सिंक के नीचे या ढंके हुए स्थान पर रखना बेहतर माना जाता है.

वास्तु के अनुसार, कूड़ेदान को कभी भी पूजा स्थलईशान कोण (उत्तर-पूर्व) या मुख्य द्वार के पास नहीं रखना चाहिए. ऐसा करने से घर की सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित होती है और पारिवारिक कलह बढ़ सकती है. इसके अलावा, बेडरूम में खुले कूड़ेदान रखने से भी बचना चाहिए, क्योंकि यह मानसिक अशांति और नींद से जुड़ी समस्याएं पैदा कर सकता है.

कूड़ेदान को हमेशा ढककर रखें और समय-समय पर खाली करते रहें. गंदा और भरा हुआ डस्टबिन नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है. वास्तु शास्त्र मानता है कि साफ-सुथरा और सही जगह रखा कूड़ेदान घर में सुख-शांति और समृद्धि बनाए रखने में सहायक होता है.

छठी पीढ़ी के फाइटर जेट की तस्वीरें सामने लाया चीन, अमेरिकी F-35 से कितना आगे है नया लड़ाकू विमान?


  बीजिंग. चीन ने दुनिया के पहले छठी पीढ़ी के फाइटर जेट को लेकर बड़ा दावा करते हुए इसकी संभावित तस्वीरें सामने आने की बात कही है. इस फाइटर जेट को पश्चिमी और यूरोपीय रक्षा विशेषज्ञ J-36 या J-XX के नाम से पहचान रहे हैं. माना जा रहा है कि यह चीन का अब तक का सबसे उन्नत और खतरनाक लड़ाकू विमान हो सकता है, जो अमेरिका के F-35 जैसे स्टेल्थ फाइटर जेट को कड़ी चुनौती देने की क्षमता रखता है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह छठी पीढ़ी का फाइटर जेट स्टेल्थ टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हाइपरसोनिक हथियारों और अत्याधुनिक सेंसर सिस्टम से लैस हो सकता है. जानकारों का मानना है कि इसमें बिना पायलट और पायलट के साथ उड़ान भरने की क्षमता (Optional Manned Capability) भी हो सकती है, जो इसे पारंपरिक फाइटर जेट्स से कहीं आगे ले जाती है.

इस जेट की अनुमानित रेंज 8,000 किलोमीटर से अधिक बताई जा रही है, जिससे यह लंबी दूरी तक बिना रिफ्यूलिंग के मिशन को अंजाम दे सकता है. अगर यह आंकड़े सही साबित होते हैं, तो यह अमेरिकी F-35 से कहीं ज्यादा लंबी मारक क्षमता वाला विमान होगा. इसके अलावा, इसमें नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर और ड्रोन कंट्रोल जैसी क्षमताएं भी शामिल होने की उम्मीद है.

हालांकि, चीन ने अभी तक इस फाइटर जेट की आधिकारिक तकनीकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है. रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह तस्वीरें और दावे चीन की सैन्य ताकत का प्रदर्शन हो सकते हैं. फिर भी, अगर यह प्रोजेक्ट पूरी तरह सफल होता है, तो वैश्विक सैन्य संतुलन पर इसका गहरा असर पड़ सकता है और अमेरिका समेत कई देशों की चिंता बढ़ना तय माना जा रहा है.

एपस्टीन फाइल्स में पीएम मोदी को लेकर किए गए दावों पर विदेश मंत्रालय की कड़ी प्रतिक्रिया, कहा- पूरी तरह बेबुनियाद


 नई दिल्ली. एपस्टीन फाइल्स को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से जोड़े जा रहे दावों पर भारत सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है. विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह निराधार और बकवास बताया है. मंत्रालय का कहना है कि ऐसे दावों को गंभीरता से लेने की कोई जरूरत नहीं है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जैसवाल ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि एपस्टीन फाइल्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर किए गए सभी दावे पूरी तरह झूठे और मनगढ़ंत हैं. उन्होंने कहा कि इस तरह की अफवाहों का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है और इन्हें नजरअंदाज करना ही सबसे बेहतर विकल्प है.

प्रवक्ता ने यह भी संकेत दिया कि इस तरह के दावे अक्सर बिना किसी प्रमाण के फैलाए जाते हैं, जिनका मकसद केवल भ्रम और सनसनी पैदा करना होता है. सरकार ऐसे निराधार आरोपों को तवज्जो नहीं देती और न ही इन्हें किसी तरह की विश्वसनीयता प्राप्त है.

विदेश मंत्रालय के इस बयान के बाद साफ हो गया है कि भारत सरकार एपस्टीन फाइल्स से जुड़े इन दावों को पूरी तरह खारिज करती है. विशेषज्ञों का भी मानना है कि बिना पुख्ता सबूत के किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को जोड़ना गैर-जिम्मेदाराना है.

सरकार की ओर से आए इस स्पष्ट बयान के बाद उम्मीद की जा रही है कि इस मुद्दे पर फैल रही अफवाहों पर विराम लगेगा और तथ्यहीन चर्चाओं को हवा नहीं मिलेगी.

पंजाब कांग्रेस को बड़ा झटका, नवजोत कौर सिद्धू ने छोड़ी पार्टी, प्रदेश नेतृत्व पर लगाए गंभीर आरोप


   पंजाब कांग्रेस को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी की वरिष्ठ नेता नवजोत कौर सिद्धू ने कांग्रेस छोड़ने का ऐलान कर दिया. पार्टी से इस्तीफा देने के बाद नवजोत कौर सिद्धू ने प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व पर खुलकर निशाना साधा और कई गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष का कार्यकाल कांग्रेस के इतिहास में सबसे ज्यादा विवादित और भ्रष्ट रहा है.

नवजोत कौर सिद्धू ने आरोप लगाया कि पार्टी में अब विचारधारा और ईमानदारी के लिए कोई जगह नहीं बची है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस संगठन में जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है, जबकि चंद लोगों के इशारे पर फैसले लिए जा रहे हैं. इसी वजह से उन्होंने पार्टी छोड़ने का कठिन फैसला लिया.

उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष राजा वडिंग पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में पार्टी का जनाधार लगातार कमजोर हुआ है. नवजोत कौर सिद्धू का कहना है कि कांग्रेस अब उस रास्ते से भटक चुकी है, जिसके लिए वह जानी जाती थी. उन्होंने यह भी दावा किया कि पार्टी के अंदर भ्रष्टाचार और गुटबाजी चरम पर है.

हालांकि, नवजोत कौर सिद्धू ने यह साफ नहीं किया है कि वह आगे किस राजनीतिक दल से जुड़ेंगी या सक्रिय राजनीति में बनी रहेंगी या नहीं. उनके इस फैसले के बाद पंजाब की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और कांग्रेस के भीतर अंदरूनी कलह एक बार फिर सामने आ गई है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नवजोत कौर सिद्धू का कांग्रेस छोड़ना पार्टी के लिए आगामी चुनावों से पहले नुकसानदायक साबित हो सकता है. वहीं कांग्रेस नेतृत्व की ओर से अभी तक इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

रेकी से अपहरण तक की पूरी साजिश बेनकाब, 13 दिन बाद सुलझा कैरव गांधी किडनैपिंग केस


  जमशेदपुर. झारखंड के जमशेदपुर में हुए कैरव गांधी अपहरण कांड का पुलिस ने 13 दिन बाद बड़ा खुलासा किया है. 13 जनवरी को बिष्टुपुर इलाके से उद्योगपति देवांग गांधी के बेटे कैरव गांधी के अपहरण की सनसनीखेज घटना को अंजाम दिया गया था. अब पुलिस ने बिहार के अलग-अलग जिलों से इस मामले में शामिल छह आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरी साजिश का पर्दाफाश किया है.

पुलिस के अनुसार, अपहरण की योजना कई महीने पहले ही बना ली गई थी. अक्टूबर से ही आरोपियों द्वारा कैरव गांधी की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी और उनकी नियमित रेकी की जा रही थी. योजना को अंतिम रूप देने के बाद 13 जनवरी को अपहरण की वारदात को अंजाम दिया गया. मामले की जांच के दौरान पुलिस ने बिहार के गया, नालंदा और पटना से छह अपराधियों को गिरफ्तार किया.

गिरफ्तार आरोपियों के पास से दो पिस्टल, छह जिंदा कारतूस और अपहरण में इस्तेमाल की गई स्कॉर्पियो कार भी बरामद की गई है. पुलिस का कहना है कि यह एक संगठित बिहार-झारखंड गिरोह था, जिसमें स्थानीय नेटवर्क की भी भूमिका सामने आ रही है. अन्य फरार आरोपियों और स्थानीय सहयोगियों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है.

एसएसपी पीयूष पांडे ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में नालंदा, गया और पटना के रहने वाले अपराधी शामिल हैं, जो पहले से आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहे हैं. पुलिस का दावा है कि जल्द ही इस गिरोह के बाकी सदस्यों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा. इस कार्रवाई के बाद शहरवासियों ने राहत की सांस ली है.

कैंसर, डायबिटीज और ऑटोइम्यून बीमारियों के इलाज पर राहत, बजट में दवाएं सस्ती करने का बड़ा ऐलान


 


  नई दिल्ली. आम लोगों को बड़ी राहत देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में हेल्थ सेक्टर के लिए अहम घोषणाएं की हैं. सरकार ने कैंसर, डायबिटीज और ऑटोइम्यून बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली जरूरी दवाओं को सस्ता करने का फैसला किया है. इस कदम से करोड़ों मरीजों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है.

बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने बताया कि इन गंभीर बीमारियों की जीवनरक्षक दवाओं पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी और अन्य करों में बड़ी कटौती की जाएगी. इससे दवाओं की कीमतों में कमी आएगी और इलाज आम लोगों की पहुंच में होगा. खासतौर पर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए यह फैसला राहत भरा माना जा रहा है.

देश में डायबिटीज के मरीजों की संख्या 10 करोड़ से अधिक है, जबकि हर साल करीब 14 लाख नए कैंसर मरीज सामने आते हैं. वहीं ऑटोइम्यून बीमारियों से पीड़ित लोगों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में दवाओं की ऊंची कीमतें लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई थीं. सरकार के इस फैसले से इलाज का आर्थिक बोझ काफी हद तक कम होने की उम्मीद है.

वित्त मंत्री ने यह भी साफ किया कि सरकार का लक्ष्य भारत को एक मजबूत फार्मास्युटिकल हब के रूप में विकसित करना है, ताकि देश में किफायती और गुणवत्तापूर्ण दवाओं का उत्पादन बढ़ाया जा सके. विशेषज्ञों का मानना है कि टैक्स में कटौती से न केवल मरीजों को राहत मिलेगी, बल्कि हेल्थकेयर सिस्टम में दवाओं की उपलब्धता भी बेहतर होगी.

सेमीकंडक्टर का ग्लोबल हब बनने की ओर भारत, बजट में मिशन 2.0 का ऐलान, 40 हजार करोड़ का निवेश


 नई दिल्ली. भारत को सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को पेश बजट 2026-27 में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 शुरू करने का ऐलान किया. इस मिशन के तहत सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को मजबूती देने के लिए कुल आवंटन राशि को बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है.

सरकार का यह कदम भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन में मजबूत स्थान दिलाने की रणनीति का हिस्सा है. ISM 2.0, पहले चरण यानी ISM 1.0 की उपलब्धियों पर आधारित होगा. ISM 1.0 के तहत देश में सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन, पैकेजिंग और डिजाइन को बढ़ावा मिला, जिससे इस सेक्टर में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा हुए.

अब मिशन 2.0 के जरिए सरकार का फोकस केवल असेंबली और टेस्टिंग तक सीमित नहीं रहेगा. नई योजना के तहत उपकरण, मटेरियल, चिप डिजाइन और फुल-स्टैक भारतीय इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी के विकास पर जोर दिया जाएगा. इससे भारत में एक मजबूत और आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करने में मदद मिलेगी.

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बड़े निवेश से भारत में विदेशी कंपनियों का भरोसा बढ़ेगा और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को नई गति मिलेगी. साथ ही, यह पहल मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसे अभियानों को भी मजबूती प्रदान करेगी. सरकार के इस कदम से भारत के सेमीकंडक्टर हब बनने की राह और आसान होती दिख रही है.

आसान रोल को कह देते हैं ‘ना’, लियोनार्डो डिकैप्रियो से शाहिद कपूर ने सीखी एक्टिंग की ये खास सीख.’


  नई दिल्ली. बॉलीवुड अभिनेता शाहिद कपूर आज उन कलाकारों में शुमार हैं, जो हर फिल्म के साथ खुद को नए सिरे से साबित करने की कोशिश करते हैं. उड़ता पंजाब, कमीने और कबीर सिंह जैसी फिल्मों में उनके दमदार अभिनय ने यह साबित किया है कि वह जोखिम लेने से नहीं डरते. हाल ही में शाहिद कपूर ने खुलासा किया कि उनके किरदारों के चयन की सोच में बड़ा बदलाव हॉलीवुड सुपरस्टार लियोनार्डो डिकैप्रियो की एक सीख से आया है.

एक पॉडकास्ट बातचीत के दौरान शाहिद ने बताया कि उन्होंने लियोनार्डो डिकैप्रियो का एक पुराना इंटरव्यू पढ़ा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर किसी किरदार को पढ़ते ही यह समझ आ जाए कि उसे कैसे निभाना है, तो वह उस फिल्म को मना कर देते हैं. ऐसा इसलिए, क्योंकि ऐसे रोल उनके कम्फर्ट जोन में होते हैं. शाहिद के मुताबिक, यही सोच उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित कर गई.

शाहिद ने कहा कि अब वह वही किरदार चुनते हैं, जो उन्हें असहज करते हैं और जिनमें खुद को तलाशने की गुंजाइश हो. उन्होंने बताया कि किसी भी कलाकार के लिए असली चुनौती एक ही जॉनर में रहते हुए भी हर बार कुछ नया करना होती है. यही वजह है कि उन्होंने निर्देशक विशाल भारद्वाज की आने वाली फिल्म ‘ओ रोमियो’ के लिए हामी भरी.

शाहिद कपूर ने यह भी कहा कि विशाल भारद्वाज के साथ उनका रिश्ता रचनात्मक विश्वास पर आधारित है, जहां उन्हें हर बार अलग सोचने और अपने अभिनय की सीमाओं को आगे बढ़ाने का मौका मिलता है. यही प्रयोगधर्मिता उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाती है.