Saturday, 14 February 2026

वास्तु टिप्स: किचन में चूल्हा और बर्तन किस दिशा में रखें? जानें सही नियम और आसान उपाय


 वास्तु शास्त्र के अनुसार किचन घर का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, क्योंकि यह परिवार के स्वास्थ्य, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ा होता है। ऐसे में किचन की सही दिशा और उसमें रखी चीजों की उचित व्यवस्था को विशेष महत्व दिया जाता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, किचन में चूल्हा या गैस स्टोव हमेशा दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) दिशा में रखना सबसे शुभ माना जाता है। यदि यह संभव न हो, तो उत्तर-पश्चिम दिशा भी एक वैकल्पिक विकल्प हो सकती है। खाना बनाते समय व्यक्ति का मुख पूर्व दिशा की ओर होना बेहतर माना जाता है, क्योंकि इससे सकारात्मक ऊर्जा और स्वास्थ्य लाभ मिलने की मान्यता है।

जहां तक बर्तनों की बात है, उन्हें किचन के पश्चिम या दक्षिण दिशा में व्यवस्थित रखना अच्छा माना जाता है। भारी बर्तन नीचे की अलमारी में और रोजमर्रा के उपयोग वाले बर्तन आसानी से पहुंचने वाली जगह पर रखने की सलाह दी जाती है। वहीं, पानी से जुड़ी चीजें जैसे सिंक या फिल्टर उत्तर-पूर्व दिशा में रखने से संतुलन बना रहता है।

विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि किचन को हमेशा साफ-सुथरा और हवादार रखना चाहिए। टूटे-फूटे बर्तन या खराब सामान किचन में नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इससे नकारात्मक ऊर्जा बढ़ने की मान्यता है। सही दिशा और व्यवस्था से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक माहौल बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

दिल्ली में बदलते मौसम का असर: बच्चों की खांसी-जुकाम में तुरंत दवा देने से बचें, डॉ. तरुण सिंह की अहम चेतावनी


  दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत में तेजी से बदलते मौसम का असर बच्चों की सेहत पर साफ दिखाई दे रहा है। सरकारी और निजी अस्पतालों में बच्चों की ओपीडी में 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खासकर नवजात और छोटे बच्चे खांसी-जुकाम और वायरल संक्रमण से ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, जिससे अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।

चाइल्ड और न्यूबॉर्न स्पेशलिस्ट डॉ. तरुण सिंह के मुताबिक, खांसी-जुकाम की शुरुआती अवस्था में तुरंत दवा देना हमेशा जरूरी नहीं होता। उनका कहना है कि कई मामलों में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता खुद ही संक्रमण से लड़ने में सक्षम होती है, इसलिए हल्के लक्षणों में 3 से 4 दिन तक निगरानी रखना बेहतर माना जाता है। हालांकि, यदि बच्चे को तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी या अत्यधिक कमजोरी जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार, बदलते मौसम में वायरल संक्रमण तेजी से फैलते हैं और छोटे बच्चे जल्दी इसकी चपेट में आ जाते हैं। ऐसे में माता-पिता को बिना डॉक्टर की सलाह के दवा देने से बचना चाहिए और बच्चों को पर्याप्त आराम, हल्का पौष्टिक आहार तथा स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए।

डॉक्टरों ने अभिभावकों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, बल्कि लक्षणों पर नजर रखें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से परामर्श लें, ताकि बच्चों की सेहत सुरक्षित रखी जा सके।

तारिक रहमान की बड़ी जीत: नरेंद्र मोदी के चुनावी फॉर्मूले से बांग्लादेश में बनी नई सरकार


  बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच हुए आम चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने प्रचंड जीत दर्ज कर नई सरकार बनाने का रास्ता साफ कर लिया है। पार्टी के नेता तारिक रहमान अब देश की सत्ता संभालने की स्थिति में हैं और उनकी चुनावी रणनीति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है।

चुनावी अभियान के दौरान BNP ने जनता से सीधे संवाद और जमीनी संपर्क पर खास जोर दिया। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस रणनीति में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 के चर्चित ‘चाय पे चर्चा’ अभियान की झलक दिखाई दी। इसी तर्ज पर तारिक रहमान ने ‘चायेर अड्डा’ कार्यक्रम शुरू किया, जिसमें आम लोगों, युवाओं और स्थानीय समुदायों से अनौपचारिक मुलाकातों के जरिए संवाद स्थापित किया गया।

बताया जा रहा है कि इस रणनीति का आइडिया उनकी बेटी जायमा रहमान ने दिया था, जिसने प्रचार अभियान को नया आयाम दिया। इन बैठकों ने जनता से जुड़ाव मजबूत किया और चुनाव परिणामों में इसका असर साफ दिखाई दिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस जीत के बाद अब यह देखना अहम होगा कि नई सरकार देश की आंतरिक राजनीति, आर्थिक नीतियों और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को किस दिशा में आगे बढ़ाती है। ढाका की नई राजनीतिक दिशा पूरे दक्षिण एशिया की रणनीतिक स्थिति पर भी असर डाल सकती है।

महाशिवरात्रि 2026: कब है पावन पर्व और क्यों माना जाता है भगवान शिव की आराधना का सबसे खास दिन?


  हिंदू परंपरा में महाशिवरात्रि को भगवान शिव की आराधना और विशेष पूजा का सबसे पवित्र पर्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह त्योहार हर साल फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है, जब श्रद्धालु व्रत रखते हैं, शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करते हैं तथा पूरी श्रद्धा के साथ भगवान शिव की उपासना करते हैं।

साल 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी, रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और रात्रि जागरण का आयोजन किया जाता है। मान्यता है कि इस पावन दिन भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

धार्मिक जानकारों के अनुसार, महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं बल्कि आत्मचिंतन, संयम और भक्ति का प्रतीक है। श्रद्धालु इस दिन शिव मंत्रों का जाप करते हैं और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करने के लिए ध्यान और साधना भी करते हैं।

गाजियाबाद की भारत सिटी सोसाइटी हादसा: 3 नाबालिग बहनों की मौत के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति की जांच तेज


  गाजियाबाद की भारत सिटी सोसाइटी में 9वीं मंजिल से कूदकर जान देने वाली तीन नाबालिग बहनों के मामले में जांच लगातार आगे बढ़ रही है। पुलिस ने अब परिवार की आर्थिक स्थिति की भी पड़ताल शुरू कर दी है, ताकि घटना से जुड़े सभी पहलुओं को समझा जा सके।

मामले की जांच कर रही गाजियाबाद पुलिस के अनुसार, माता-पिता के छह बैंक खातों की जांच की गई है। शुरुआती पड़ताल में परिवार की आमदनी, लेन-देन और आर्थिक हालात से जुड़े दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि कहीं आर्थिक दबाव या अन्य किसी वजह ने इस दुखद घटना में भूमिका तो नहीं निभाई।

अधिकारियों का कहना है कि जांच बहुआयामी तरीके से की जा रही है, जिसमें परिवार के करीबी लोगों, पड़ोसियों और संबंधित पक्षों से भी पूछताछ शामिल है। फिलहाल पुलिस किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों और सबूतों का गहन विश्लेषण कर रही है।

इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है और समाज में बच्चों की मानसिक स्थिति और पारिवारिक परिस्थितियों को लेकर भी गंभीर चर्चा शुरू हो गई है। पुलिस ने लोगों से अफवाहों से बचने और जांच पूरी होने तक आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करने की अपील की है।

बांग्लादेश में बड़ा संवैधानिक बदलाव: पीएम पद पर टाइम लिमिट समेत 5 बड़े सुधार लागू करने की तैयारी


  बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। हाल ही में हुए जनमत संग्रह में 60% से अधिक मतदाताओं ने संविधान संशोधन और व्यापक सुधारों के पक्ष में मतदान किया है। इसके साथ ही मोहम्मद यूनुस के 84 सूत्री ‘जुलाई नेशनल चार्टर’ को जनता की मंजूरी मिल गई है, जिससे देश में राजनीतिक और प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव का रास्ता साफ हो गया है।

ताजा संसदीय चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने बड़ी जीत दर्ज की है। अब नई संसद के सामने 180 दिनों के भीतर महत्वपूर्ण संवैधानिक सुधार लागू करने की जिम्मेदारी होगी। प्रस्तावित बदलावों में प्रधानमंत्री के कार्यकाल की सीमा तय करना, द्विसदनीय संसद की स्थापना, शासन प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करना शामिल है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन सुधारों से बांग्लादेश की राजनीतिक व्यवस्था में स्थिरता और जवाबदेही बढ़ सकती है। हालांकि, विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों की प्रतिक्रिया भी आने वाले समय में अहम भूमिका निभाएगी, क्योंकि इतने बड़े संवैधानिक बदलावों का देश की राजनीति और शासन व्यवस्था पर दूरगामी असर पड़ सकता है।

अब सभी की नजरें नई संसद पर टिकी हैं, जो निर्धारित समय सीमा के भीतर इन प्रस्तावित सुधारों को लागू कर देश की राजनीतिक दिशा तय करेगी।

नरेंद्र मोदी ने डिब्रूगढ़ में ELF पर की ऐतिहासिक लैंडिंग: नॉर्थ ईस्ट की पहली हाईवे इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी क्यों है खास?


 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज असम के डिब्रूगढ़ में देश की पहली हाईवे इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) पर भारतीय वायुसेना के विशेष सैन्य परिवहन विमान भारतीय वायुसेना के C-130J सुपर हरक्यूलिस से ऐतिहासिक लैंडिंग कर नई सुरक्षा और रणनीतिक क्षमता का प्रदर्शन किया। यह सुविधा नॉर्थ ईस्ट में रक्षा तैयारियों और आपदा प्रबंधन के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, हाईवे इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी ऐसी व्यवस्था होती है, जहां जरूरत पड़ने पर युद्धक या परिवहन विमान सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग पर उतर सकते हैं। इससे आपातकालीन स्थितियों, प्राकृतिक आपदाओं और सैन्य अभियानों के दौरान तेज़ी से राहत और रसद पहुंचाने में मदद मिलती है।

सरकार का मानना है कि इस तरह की सुविधाएं देश की सीमावर्ती और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में रक्षा क्षमताओं को मजबूत करती हैं। नॉर्थ ईस्ट के संवेदनशील भूगोल और सीमावर्ती चुनौतियों को देखते हुए यह परियोजना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

विश्लेषकों के मुताबिक, इस ऐतिहासिक लैंडिंग से यह संदेश भी गया है कि भारत अब आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सैन्य तकनीक के जरिए अपनी रक्षा तैयारियों को और सशक्त बना रहा है। आने वाले समय में देश के अन्य रणनीतिक इलाकों में भी ऐसी सुविधाओं के विस्तार की संभावना जताई जा रही है।

योगी आदित्यनाथ का बड़ा बयान: ‘हर कोई शंकराचार्य नहीं हो सकता’, माघ मेला विवाद पर दी खुली प्रतिक्रिया


 उत्तर प्रदेश की राजनीति और धार्मिक जगत में चर्चा का केंद्र बने माघ मेला विवाद पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहली बार खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि हर किसी को अपनी मर्यादा और परंपराओं का सम्मान करना चाहिए और धार्मिक पदों की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री का यह बयान उस समय आया है जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े मुद्दे पर लगातार विवाद और राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिल रही है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाज में विभिन्न भूमिकाएं होती हैं और हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी और मर्यादा के अनुसार आचरण करना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि धार्मिक संस्थाओं और परंपराओं का सम्मान बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि समाज में संतुलन और सद्भाव बना रहे।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री का यह बयान मौजूदा विवाद को शांत करने और संतुलित संदेश देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं विपक्षी दलों और धार्मिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी इस बयान के बाद तेज हो सकती हैं।

माघ मेले से जुड़े इस पूरे घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति और धार्मिक मंचों पर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गर्माने की संभावना जताई जा रही है, जिससे राजनीतिक माहौल पर भी असर पड़ सकता है।

महाशिवरात्रि 2026 से पहले जानें रहस्य: क्यों शिव पूजा में वर्जित माना जाता है केतकी का फूल?


 ऋषिकेश में महाशिवरात्रि की तैयारियों के बीच शिव भक्तों के बीच पूजा-विधि और धार्मिक मान्यताओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस पर्व को भगवान शिव की आराधना का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है, जब श्रद्धालु व्रत, जलाभिषेक और विशेष पूजन के जरिए आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। मान्यता है कि जहां कुछ फूल भगवान शिव को अत्यंत प्रिय हैं, वहीं केतकी का फूल अर्पित करना वर्जित माना जाता है।

महंत रामेश्वर गिरी ने बताया कि इसके पीछे एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा जुड़ी हुई है। कथा के अनुसार एक बार भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हो गया। तभी भगवान शिव एक अनंत अग्नि स्तंभ यानी दिव्य ज्योति के रूप में प्रकट हुए और दोनों देवताओं से उसके आदि और अंत का पता लगाने को कहा।

मान्यता है कि ब्रह्मा जी ने केतकी फूल को झूठी गवाही देने के लिए प्रेरित किया, जिससे भगवान शिव नाराज़ हो गए और केतकी को अपनी पूजा में वर्जित घोषित कर दिया। तभी से शिव पूजा में इस फूल का प्रयोग नहीं किया जाता।

धार्मिक जानकारों का कहना है कि महाशिवरात्रि पर पूजा करते समय सही विधि और मान्यताओं का पालन करना आवश्यक है, ताकि श्रद्धालु पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त कर सकें।

नोएडा में सियासी संग्राम तेज: भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने मिशन-2027 के लिए भरी हुंकार


  उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की आहट के साथ सियासी हलचल तेज हो गई है और चुनावी रणभूमि के तौर पर गौतमबुद्ध नगर उभर कर सामने आया है। कभी ‘अशुभ’ माने जाने वाले इस इलाके में अब बड़ी रैलियों और शक्ति प्रदर्शन की तैयारी जोरों पर है, जिससे आने वाले चुनाव की दिशा तय होने की उम्मीद जताई जा रही है।

सत्तारूढ़ दल विकास के एजेंडे के साथ मैदान में उतर चुका है। 21 फरवरी को औद्योगिक परियोजनाओं और सेमीकंडक्टर यूनिट के शिलान्यास कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव शामिल होंगे, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्चुअल संबोधन की भी तैयारी है। इसके साथ ही जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा को लेकर भी बड़े कार्यक्रम प्रस्तावित हैं, जिन्हें पश्चिमी यूपी की राजनीति में गेम-चेंजर माना जा रहा है।

वहीं विपक्ष भी पीछे नहीं है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव 29 मार्च को ‘PDA भाईचारा रैली’ के जरिए शक्ति प्रदर्शन करेंगे और क्षेत्र में राजनीतिक संदेश देने की तैयारी में हैं। दूसरी ओर बसपा भी मार्च में बड़ी रैली आयोजित कर अपने संगठनात्मक दमखम का प्रदर्शन करना चाहती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आर्थिक रूप से अहम इस क्षेत्र से शुरू हुआ चुनावी अभियान प्रदेश की सत्ता की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आने वाले महीनों में यहां होने वाली रैलियां और विकास परियोजनाएं मिशन-2027 की रणनीति का केंद्र बनती नजर आ रही हैं।

प्रत्यर्पण पर टिकी निगाहें: कानूनी प्रक्रिया और कूटनीति तय करेंगी दोनों देशों के रिश्तों की दिशा


 प्रत्यर्पण को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मामले में लिया जाने वाला अंतिम निर्णय पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया, द्विपक्षीय समझौतों और कूटनीतिक वार्ताओं पर आधारित होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रत्यर्पण केवल न्यायिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों और रणनीतिक हितों से भी गहराई से जुड़ा होता है।

विश्लेषकों का कहना है कि किसी भी देश द्वारा प्रत्यर्पण को मंजूरी देने से पहले अदालतों की राय, मौजूदा संधियों के प्रावधान और राजनीतिक हालातों का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन किया जाता है। इस प्रक्रिया में समय लगना स्वाभाविक है, क्योंकि दोनों देशों की सरकारें अपने-अपने कानूनी और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए फैसला करती हैं।

कूटनीतिक स्तर पर भी यह मामला बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। जानकारों के अनुसार, प्रत्यर्पण पर लिया गया निर्णय भविष्य में दोनों देशों के आपसी संबंधों, व्यापारिक सहयोग और राजनीतिक विश्वास को प्रभावित कर सकता है। यदि फैसला सकारात्मक और संतुलित तरीके से लिया जाता है, तो इससे सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं। वहीं, किसी भी तरह की असहमति या विवाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव भी पैदा कर सकता है।

ऐसे में अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कानूनी और कूटनीतिक प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है और इसका असर आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर किस रूप में दिखाई देता है।

Friday, 6 February 2026

“Vastu Tips: घर में रखें ये शुभ मूर्तियां, बढ़ेगा सुख-सौभाग्य… लेकिन जान लें सही नियम”


 नई दिल्ली: घर की सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा के लिए लोग अक्सर वास्तु शास्त्र के नियमों का पालन करते हैं। वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि घर में रखी हर वस्तु का परिवार की तरक्की और मानसिक माहौल पर प्रभाव पड़ता है। ऐसे में कई लोग घर को सजाने के लिए मूर्तियां रखते हैं, लेकिन इन्हें सही दिशा और नियमों के अनुसार रखना बेहद जरूरी माना जाता है।

वास्तु के अनुसार, भगवान गणेश की मूर्ति घर के मुख्य द्वार या पूजा स्थान पर रखना शुभ माना जाता है, जिससे बाधाएं दूर होती हैं और समृद्धि बढ़ती है। वहीं, भगवान लक्ष्मी की मूर्ति आर्थिक सुख-समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है, जिसे उत्तर-पूर्व दिशा में रखना बेहतर बताया गया है।

इसके अलावा, बुद्ध की शांत मुद्रा वाली मूर्ति घर में सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति लाने के लिए उपयोगी मानी जाती है। वहीं, राधा-कृष्ण की मूर्ति वैवाहिक जीवन में प्रेम और सामंजस्य का प्रतीक मानी जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, टूटी-फूटी या खंडित मूर्तियां घर में नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि इससे नकारात्मक ऊर्जा बढ़ने की आशंका रहती है। साथ ही, मूर्तियों को साफ-सुथरा रखना और सही स्थान पर स्थापित करना जरूरी है।

ध्यान रहे कि वास्तु उपाय आस्था और मान्यताओं पर आधारित होते हैं, इसलिए इन्हें अपनाते समय अपनी सुविधा और विश्वास को प्राथमिकता दें। सही नियमों के साथ रखी गई मूर्तियां घर में सकारात्मक माहौल और खुशहाली बढ़ाने में मदद कर सकती हैं।

“‘75 नहीं, अभी 25 बाकी हैं…’ पीएम मोदी ने जन्मदिन का किस्सा सुनाकर दिया पॉजिटिव सोच का संदेश”


 


 नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अपने जन्मदिन से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा करते हुए सकारात्मक सोच और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने बताया कि एक नेता ने उन्हें 17 सितंबर को फोन कर कहा कि अब वह 75 साल के हो गए हैं। इस पर पीएम मोदी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि “अभी 25 साल बाकी हैं।”

पीएम मोदी ने कहा कि वह हमेशा बीते हुए समय की बजाय आने वाले समय और अवसरों पर ध्यान देते हैं। उनके अनुसार, जिंदगी में उम्र या मुश्किलों से ज्यादा मायने आपके इरादों और सोच का होता है। उन्होंने युवाओं और नागरिकों को संदेश दिया कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण जरूरी है।

प्रधानमंत्री ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने हमेशा चुनौतियों को अवसर में बदलने की कोशिश की है और भविष्य के लक्ष्यों पर फोकस रखा है। उनका मानना है कि अगर इंसान अपने सपनों और मेहनत पर विश्वास रखे, तो उम्र सिर्फ एक संख्या बनकर रह जाती है।

इस किस्से के जरिए पीएम मोदी ने लोगों को प्रेरित करते हुए कहा कि बीते हुए सालों की बजाय आने वाले समय और संभावनाओं पर ध्यान देना चाहिए। उनका यह संदेश सोशल मीडिया और जनसभाओं में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इसे मोटिवेशनल नजरिए से देख रहे हैं।