Friday, 20 February 2026

न गोला-बारूद, न मिसाइल… कैंची से जंग लड़ रहे यूक्रेनी सैनिक, ऐसे काट रहे रूस के ‘छोटे’ ड्रोन


 Russia और Ukraine के बीच जारी युद्ध में अब एक अनोखी तस्वीर सामने आई है। खबर है कि यूक्रेनी सैनिक आधुनिक हथियारों के साथ-साथ एक साधारण कैंची भी साथ रख रहे हैं। वजह है रूस द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे फाइबर-ऑप्टिक कंट्रोल वाले छोटे ड्रोन, जिन्हें सैनिक ‘छुटकू सैनिक’ कहकर संबोधित कर रहे हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये ड्रोन आसमान से हमला करने के बजाय ज़मीन के करीब रहकर फाइबर-ऑप्टिक केबल के जरिए ऑपरेट होते हैं। चूंकि इन पर पारंपरिक जैमिंग सिस्टम का असर नहीं होता, इसलिए इन्हें रोकना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में यूक्रेनी सैनिक ड्रोन की कंट्रोल केबल तक पहुंचकर उसे कैंची से काट देते हैं, जिससे ड्रोन तुरंत निष्क्रिय हो जाता है।

युद्ध ने आधुनिक तकनीक और साधारण उपायों का अनोखा संगम दिखाया है। जहां एक ओर हाई-टेक हथियार और मिसाइल सिस्टम हैं, वहीं दूसरी ओर एक छोटी सी कैंची भी रणनीतिक हथियार बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दर्शाता है कि युद्ध में केवल अत्याधुनिक तकनीक ही नहीं, बल्कि त्वरित जुगाड़ और जमीनी समझ भी अहम भूमिका निभाती है।

रूस-यूक्रेन संघर्ष लगातार नए रूप ले रहा है और दोनों पक्ष लगातार नई रणनीतियां अपना रहे हैं। इस बीच यूक्रेनी सैनिकों की यह ‘कैंची रणनीति’ चर्चा का विषय बनी हुई है।

कभी भारत था आगे, आज चीन 6 गुना अमीर! कहां पिछड़ गई हमारी अर्थव्यवस्था?


  भारत और चीन की आर्थिक यात्रा की तुलना आज फिर चर्चा में है। एक समय ऐसा था जब 1980 के दशक में भारत की प्रति व्यक्ति आय चीन से अधिक मानी जाती थी। लेकिन बीते चार दशकों में तस्वीर पूरी तरह बदल गई। आज चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और प्रति व्यक्ति आय के मामले में भारत से कई गुना आगे निकल गया है।

China ने 1980 के दशक में बड़े पैमाने पर आर्थिक सुधार, निर्यात-आधारित मैन्युफैक्चरिंग और विदेशी निवेश को बढ़ावा दिया। विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZ) की स्थापना और तेज़ इंफ्रास्ट्रक्चर विकास ने उसे वैश्विक सप्लाई चेन का केंद्र बना दिया। वहीं India ने 1991 के बाद उदारीकरण की राह पकड़ी और आईटी व सेवा क्षेत्र में मजबूत पहचान बनाई, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात क्षमता उतनी तेज़ी से नहीं बढ़ सकी।

चीन की आर्थिक नीतियों में दीर्घकालिक योजना, बड़े पैमाने पर औद्योगिक उत्पादन और आक्रामक निर्यात रणनीति प्रमुख रही। इसके मुकाबले भारत को नीति क्रियान्वयन, इंफ्रास्ट्रक्चर, श्रम सुधार और विनिर्माण क्षेत्र में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

हालांकि भारत ने भी पिछले तीन दशकों में उल्लेखनीय प्रगति की है और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, लेकिन प्रति व्यक्ति आय के मामले में अब भी चीन से काफी पीछे है। विशेषज्ञ मानते हैं कि मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा, स्किल डेवलपमेंट और निर्यात विस्तार पर फोकस करके भारत इस अंतर को कम कर सकता है।

बड़ा भूकंप आया तो यूपी के ये दो शहर हो सकते हैं तबाह, IIT कानपुर की स्टडी ने बढ़ाई चिंता


 उत्तर प्रदेश के गंगा के मैदानी इलाकों को लेकर एक नई रिसर्च ने चिंता बढ़ा दी है। Indian Institute of Technology Kanpur (IIT कानपुर) की एक स्टडी के मुताबिक, अगर भविष्य में बड़ा भूकंप आता है तो राज्य के कुछ प्रमुख शहरों को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है। खास तौर पर गंगा के किनारे बसे शहरों में ज़मीन के लिक्विफेक्शन (Liquefaction) का खतरा बताया गया है।

आईआईटी कानपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर निहार रंजन पात्रा के अनुसार, साल 1803 और 1934 में आए बड़े भूकंपों के बाद गंगा के मैदानी क्षेत्रों में लिक्विफेक्शन की घटनाएं दर्ज की गई थीं। लिक्विफेक्शन वह स्थिति होती है जब भूकंप के झटकों के कारण पानी से संतृप्त ढीली मिट्टी अपनी मजबूती खो देती है और तरल की तरह व्यवहार करने लगती है। इससे इमारतों की नींव कमजोर हो सकती है और बड़े पैमाने पर ढांचागत क्षति हो सकती है।

स्टडी में यह भी बताया गया है कि ये इलाके भूकंपीय फॉल्ट लाइन के प्रभाव क्षेत्र में आते हैं, जिससे जोखिम और बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी योजना, मजबूत निर्माण मानकों और जागरूकता के जरिए संभावित नुकसान को कम किया जा सकता है।

हालांकि वैज्ञानिकों ने घबराने के बजाय सतर्क रहने और भवन निर्माण में भूकंपरोधी तकनीकों को अपनाने की सलाह दी है।

राज्यसभा बनाम लोकसभा: क्या दोनों सांसदों की सैलरी में है फर्क? जानिए पूरी सच्चाई


 अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या राज्यसभा और लोकसभा के सांसदों की सैलरी अलग-अलग होती है। दरअसल, संसद के दोनों सदनों — Rajya Sabha और Lok Sabha — के सदस्यों को समान वेतन और भत्ते मिलते हैं। यानी राज्यसभा सांसद को लोकसभा सांसद से न तो कम और न ही ज्यादा सैलरी मिलती है।

1 अप्रैल 2023 से लागू संशोधन के बाद सांसदों का मूल वेतन 1,24,000 रुपये प्रतिमाह है। इसके अलावा उन्हें संसद सत्र के दौरान प्रतिदिन उपस्थिति भत्ता भी दिया जाता है। सांसदों को वेतन के अतिरिक्त कई तरह के भत्ते और सुविधाएं भी मिलती हैं, जिनमें कार्यालय व्यय भत्ता, निर्वाचन क्षेत्र भत्ता, यात्रा भत्ता और दिल्ली में सरकारी आवास शामिल हैं।

कुल मिलाकर, वेतन और भत्तों को जोड़ने पर सांसदों को हर महीने अच्छी-खासी राशि मिलती है। हालांकि, मूल वेतन दोनों सदनों के लिए समान है और इसमें कोई अंतर नहीं किया गया है।

सांसदों की सैलरी और भत्तों का निर्धारण संसद द्वारा पारित कानून के तहत होता है, और समय-समय पर इसमें संशोधन भी किया जाता है। इसलिए यह स्पष्ट है कि राज्यसभा और लोकसभा के सांसदों के वेतन में कोई भेदभाव नहीं है।

फिल्टर वाली क्लिप पर भड़के यूजर्स, बोले – ‘फिल्टर को अपराध घोषित कर देना चाहिए’


 एक क्लिप को लेकर यूजर्स की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। वीडियो में दिखाई दे रही महिला ने कथित तौर पर भारी मात्रा में ब्यूटी फिल्टर का इस्तेमाल किया है, जिसे लेकर लोगों ने जमकर आलोचना की। कई यूजर्स का कहना है कि जरूरत से ज्यादा फिल्टर इस्तेमाल करने से वास्तविकता और आभासी छवि के बीच फर्क मिटने लगता है।

एक यूजर ने टिप्पणी करते हुए लिखा, “फिल्टर को अपराध घोषित कर देना चाहिए।” वहीं दूसरे यूजर्स ने कहा कि सोशल मीडिया पर इस तरह के ट्रेंड युवाओं में गलत सौंदर्य मानक स्थापित करते हैं। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पारदर्शिता होनी चाहिए और यदि वीडियो में फिल्टर का उपयोग हुआ है तो इसका खुलासा किया जाना चाहिए।

हालांकि, कई यूजर्स ने महिला का समर्थन भी किया। उनका कहना है कि फिल्टर का इस्तेमाल व्यक्तिगत पसंद का मामला है और किसी को इसके लिए ट्रोल करना सही नहीं है। समर्थकों का तर्क है कि सोशल मीडिया एक रचनात्मक मंच है, जहां लोग अपनी पसंद के अनुसार कंटेंट तैयार करते हैं।

फिलहाल यह क्लिप तेजी से शेयर की जा रही है और इस पर बहस जारी है कि क्या डिजिटल फिल्टर केवल मनोरंजन का साधन हैं या फिर वे समाज में अवास्तविक अपेक्षाएं पैदा कर रहे हैं।

Thursday, 19 February 2026

हिमाचल में एंट्री टैक्स ढाई गुना! सुक्खू सरकार का बड़ा फैसला, 1 अप्रैल से नई दरें लागू


  पर्यटन सीजन से पहले बाहरी राज्यों के सैलानियों को बड़ा झटका लगा है। हिमाचल प्रदेश की हिमाचल प्रदेश सरकार ने नई बैरियर नीति जारी करते हुए एंट्री टैक्स में भारी बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी।

नई अधिसूचना के अनुसार, दिल्लीहरियाणापंजाबउत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों से आने वाले निजी कार चालकों को अब 70 रुपये की जगह 170 रुपये एंट्री टैक्स देना होगा। यानी लगभग ढाई गुना बढ़ोतरी।

12+1 सवारी वाले वाहनों से पहले 110 रुपये लिए जाते थे, जिन्हें बढ़ाकर 170 रुपये कर दिया गया है। हेवी वाहनों का टैक्स 720 रुपये से बढ़ाकर 900 रुपये कर दिया गया है। निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी जैसे जेसीबी पर शुल्क 570 रुपये से बढ़ाकर 800 रुपये कर दिया गया है। ट्रैक्टर का शुल्क 70 से बढ़ाकर 100 रुपये कर दिया गया है। हालांकि डबल एक्सल बस और ट्रक के लिए 570 रुपये की दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

सरकार का कहना है कि राज्य की आर्थिक स्थिति को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। लेकिन पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि इससे सैलानियों की संख्या प्रभावित हो सकती है।

‘द केरल स्टोरी 2’ पर कानूनी संकट, केरल हाईकोर्ट में रिलीज रोकने की याचिका


 फिल्म द केरल स्टोरी 2 – गोज बियॉन्ड अपनी रिलीज से पहले ही कानूनी विवादों में घिर गई है। 27 फरवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही इस फिल्म के खिलाफ केरल हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है।

याचिका पेशे से जीवविज्ञानी श्रीदेव नाम्बूदिरी ने दाखिल की है। उनका आरोप है कि फिल्म का टीजर केरल राज्य की छवि को नकारात्मक और विवादित तरीके से पेश करता है। याचिकाकर्ता का कहना है कि फिल्म की कहानी में मध्य प्रदेश और राजस्थान की महिलाओं का भी जिक्र है, लेकिन शीर्षक में ‘केरल’ का नाम जोड़कर पूरे राज्य को एक विशेष नैरेटिव से जोड़ने की कोशिश की गई है।

याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि फिल्म का कंटेंट सांप्रदायिक तनाव को बढ़ावा दे सकता है और सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकता है। इसलिए अदालत से फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की गई है।

गौरतलब है कि पहले भाग द केरल स्टोरी को लेकर भी देशभर में विवाद हुआ था। अब सीक्वल को लेकर भी बहस तेज हो गई है।

मामले में अंतिम फैसला अदालत को करना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक शांति के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। फिलहाल फिल्मी और राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर चर्चाएं तेज हैं।

पायल मलिक की गोदभराई में छाईं सौतन कृतिका मलिक,


 यूट्यूबर Armaan Malik एक बार फिर सुर्खियों में हैं। वह जल्द ही पांचवीं बार पिता बनने वाले हैं। हाल ही में उनकी पहली पत्नी Payal Malik की गोदभराई (बेबी शॉवर) धूमधाम से मनाई गई, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।

इस खास मौके पर परिवार और करीबी दोस्तों की मौजूदगी में पारंपरिक रस्में निभाई गईं। समारोह में पायल ट्रेडिशनल लुक में नजर आईं, जबकि दूसरी पत्नी Kritika Malik भी पूरी तरह सज-धज कर शामिल हुईं। कई तस्वीरों और वीडियो में कृतिका पायल के साथ पोज देती दिखीं, जिसने सोशल मीडिया यूजर्स का खास ध्यान खींचा।

फैंस इस बेबी शॉवर की झलकियां देखने के बाद दोनों पत्नियों के रिश्ते और बॉन्डिंग पर चर्चा कर रहे हैं। कुछ लोग परिवार की एकजुटता की तारीफ कर रहे हैं, तो कुछ इसे लेकर अलग-अलग राय दे रहे हैं।

अरमान मलिक अपने व्लॉग्स और निजी जिंदगी को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं। उनकी फैमिली लाइफ सोशल मीडिया पर लगातार ट्रेंड करती रहती है। अब पायल की गोदभराई की तस्वीरों ने एक बार फिर इंटरनेट पर हलचल बढ़ा दी है।

कोठारी परिवार की इज्जत पर वार करेगा गौतम, पाखी को धोखा देगा दिवाकर!


 Anupamaa में एक बार फिर हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिलने वाला है। आने वाले एपिसोड में गौतम ऐसा कदम उठाएगा, जिससे कोठारी परिवार का सरेआम तमाशा बन जाएगा। परिवार की प्रतिष्ठा दांव पर होगी और हालात काबू से बाहर जाते दिखेंगे।

सूत्रों के मुताबिक, अनुपमा इस बार चुप नहीं बैठने वाली। जब सच सामने आएगा, तो वह अपने रौद्र रूप में नजर आएगी और सभी को करारा जवाब देगी। उसका यह अंदाज परिवार के कई सदस्यों को चौंका देगा।

इसी बीच पाखी की जिंदगी में भी बड़ा झटका आने वाला है। दिवाकर, जिस पर वह भरोसा कर रही थी, उसे धोखा देगा। इस खुलासे से पाखी भावनात्मक रूप से टूट सकती है। दूसरी ओर, प्रेम को लेकर भी बड़ा राज सामने आने वाला है, जिससे कहानी नया मोड़ लेगी।

कहा जा रहा है कि इन घटनाओं के बाद परिवार के रिश्तों में दरार और गहरी हो सकती है। अनुपमा का फैसला आने वाले ट्रैक की दिशा तय करेगा।

फैंस को अगले एपिसोड में जबरदस्त टकराव, इमोशनल सीन और बड़े खुलासे देखने को मिलेंगे

कई देशों से ज्यादा अमीर हैं मुकेश अंबानी! 19 देशों की GDP से भी आगे निकली संपत्ति


 भारत के दिग्गज उद्योगपति Mukesh Ambani की संपत्ति अक्सर चर्चा में रहती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनकी कुल नेटवर्थ दुनिया के कई छोटे देशों की सालाना जीडीपी से भी अधिक बताई जाती है?

ताज़ा आकलनों के अनुसार, अंबानी की संपत्ति दर्जनों अरब डॉलर में है। तुलना करें तो यह राशि 19 छोटे और विकासशील देशों की वार्षिक अर्थव्यवस्था (GDP) से ज्यादा बैठती है। इनमें दक्षिण एशिया के पड़ोसी देश जैसे Nepal और Afghanistan भी शामिल हैं।

GDP किसी देश में एक साल में उत्पादित कुल वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य होता है, जबकि किसी व्यक्ति की नेटवर्थ उसकी कुल संपत्ति (शेयर, निवेश, संपत्ति आदि) का अनुमानित मूल्य होती है। यही वजह है कि छोटे देशों की अर्थव्यवस्था और बड़े उद्योगपतियों की निजी संपत्ति की तुलना संभव हो पाती है।

हालांकि, यह भी ध्यान देने वाली बात है कि GDP और व्यक्तिगत संपत्ति की प्रकृति अलग होती है—एक पूरी अर्थव्यवस्था का पैमाना है, तो दूसरी निजी स्वामित्व वाली संपत्तियों का।

Reliance Industries के चेयरमैन अंबानी ऊर्जा, दूरसंचार और रिटेल जैसे क्षेत्रों में बड़ा कारोबार संचालित करते हैं। उनकी संपत्ति में उतार-चढ़ाव शेयर बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करता है।

मजेदार चुटकुले: जज ने पूछा- तलाक क्यों? पत्नी का जवाब सुन कोर्ट में छूटी हंसी!


 आज पढ़िए कुछ हल्के-फुल्के चुटकुले, जो दिनभर की टेंशन को कर देंगे दूर—

कोर्ट में जज साहब ने पति से पूछा—
“तुम तलाक क्यों चाहते हो?”

पति बोला— “जनाब, मेरी पत्नी मुझसे पिछले 6 महीने से बात ही नहीं कर रही!”

जज ने पत्नी की ओर देखा—
“आप कुछ कहना चाहेंगी?”

पत्नी बोली—
“हुजूर, मैं इतनी छोटी-छोटी बातों पर मुंह नहीं खोलती!”

कोर्ट में मौजूद लोग हंसी नहीं रोक पाए।

संता को मां से मार पड़ गई।
बंता ने पूछा— “क्या हुआ?”
संता— “फोन चला रहा था, मम्मी रखने को बोलीं, नहीं माना… बस मार पड़ी!”
बंता बोला— “भाई, मां के पैरों में जन्नत के साथ-साथ चप्पल भी होती है!”

महिला— “डॉक्टर साहब, वजन कैसे कम होगा?”
डॉक्टर— “गर्दन दाएं-बाएं हिलाइए।”
महिला— “कब?”
डॉक्टर— “जब कोई खाने को पूछे!”

पप्पू— “डॉक्टर साहब, पहले वादा करें हंसेंगे नहीं।”
डॉक्टर— “ठीक है।”
पप्पू— “मेरी टांगें गन्ने जैसी पतली हैं!”
डॉक्टर हंस पड़ा।
पप्पू बोला— “अब बताइए इलाज, हंसी तो मुफ्त में दे दी!”

भारत के 5 सबसे महंगे सिंगल टोल नाके! यहां से कार निकाली तो याद रह जाएगा किराया


  2026 में देश का सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से आधुनिक हो रहा है, लेकिन बेहतर एक्सप्रेसवे और हाईवे का सफर अब जेब पर भारी पड़ने लगा है। National Highways Authority of India (NHAI) और राज्य प्राधिकरणों ने टोल दरों में 4–5% तक बढ़ोतरी की है। कई टोल प्लाजा पर कार से एक बार गुजरने का शुल्क ₹150 से ₹300 के पार पहुंच चुका है।

यहां जानिए भारत के 5 महंगे सिंगल टोल नाके—

 दिल्ली के ट्रैफिक से राहत देने वाला यह एक्सप्रेसवे लंबी दूरी के हिसाब से महंगा माना जाता है।
हाई-स्पीड कॉरिडोर पर कार का टोल कई हिस्सों में ₹200+ तक पहुंच सकता है।
 देश के सबसे व्यस्त एक्सप्रेसवे में शामिल, यहां टोल दरें पहले से ही ऊंची श्रेणी में हैं।
 नए हाई-स्पीड रूट पर यात्रियों को बढ़ा हुआ टोल चुकाना पड़ता है।
 पश्चिम भारत का प्रमुख कॉरिडोर, जहां सिंगल जर्नी टोल लगातार बढ़ा है।

अगर आप दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु के बीच रोड ट्रिप प्लान कर रहे हैं, तो टोल बजट पहले से तय कर लें। FASTag से भुगतान आसान जरूर हुआ है, लेकिन सफर की कुल लागत में टोल अब अहम हिस्सा बन चुका है।

शिवाजी महाराज जयंती पर शिवनेरी किले में भीड़ बेकाबू, भगदड़ जैसी स्थिति; महिला-बच्चों समेत कई घायल


 छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती के अवसर पर Shivneri Fort में भारी भीड़ उमड़ने से अफरा-तफरी मच गई। पुणे जिले के जुन्नर तालुका स्थित इस ऐतिहासिक किले पर श्रद्धांजलि देने और कार्यक्रम में शामिल होने हजारों लोग पहुंचे थे। संकरे रास्तों और सीमित निकास मार्गों के कारण अचानक भीड़ का दबाव बढ़ गया, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, किले की चढ़ाई वाले हिस्से और प्रवेश द्वार के पास लोगों की आवाजाही नियंत्रित नहीं रह पाई। इसी दौरान कई महिलाएं और बच्चे गिर पड़े, जिससे उन्हें चोटें आईं। घायलों को तुरंत स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्रशासन ने बताया कि सभी की हालत स्थिर है।

यह किला मराठा साम्राज्य के संस्थापक Chhatrapati Shivaji Maharaj का जन्मस्थान है, इसलिए जयंती पर यहां विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। हर साल बड़ी संख्या में लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचते हैं।

घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने भीड़ नियंत्रण के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया और प्रवेश पर अस्थायी रोक लगाई। अधिकारियों ने अपील की है कि श्रद्धालु धैर्य बनाए रखें और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।