Friday, 20 February 2026

पहाड़ों में उगने वाली ‘निर्गुंडी’ का कमाल! पैरालिसिस, सूजन और दर्द में देसी नुस्खा


  Sidhi जिले के विंध्य क्षेत्र की पहाड़ियों में उगने वाला निर्गुंडी पौधा इन दिनों चर्चा में है। स्थानीय लोग इसे औषधीय गुणों से भरपूर मानते हैं और पारंपरिक इलाज में इसका व्यापक उपयोग करते हैं। आयुर्वेद चिकित्साधिकारी डॉ. विपिन सिंह के मुताबिक, निर्गुंडी के पत्तों में कई ऐसे गुण पाए जाते हैं जो सूजन, दर्द और संक्रमण में लाभकारी माने जाते हैं।

डॉ. सिंह ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार तीन सप्ताह तक रोजाना निर्गुंडी के पत्तों से ‘झलकी’ यानी हवा दी जाए, तो पक्षाघात (पैरालिसिस) के लक्षणों में धीरे-धीरे सुधार देखा जा सकता है। इस प्रक्रिया में प्रभावित अंगों पर पत्तों से नियमित रूप से हवा दी जाती है। ग्रामीणों का मानना है कि इससे नसों में संचार बेहतर होता है और जकड़न कम होती है।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से निर्गुंडी में एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-बैक्टीरियल और दर्द निवारक गुण पाए जाते हैं। यही वजह है कि इसका उपयोग जोड़ों के दर्द, सूजन और अन्य शारीरिक तकलीफों में किया जाता रहा है। कई आयुर्वेदिक औषधियों में भी इसे प्रमुख घटक के रूप में शामिल किया जाता है।

हालांकि, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में पैरालिसिस पर इसके प्रभाव को लेकर व्यापक वैज्ञानिक पुष्टि सीमित है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि गंभीर बीमारियों में किसी भी घरेलू या पारंपरिक उपचार को अपनाने से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

प्ले स्कूल की फीस पर बवाल: IIT बॉम्बे ग्रेजुएट बोला— 4 साल की इंजीनियरिंग से महंगी नर्सरी!


 


 मुंबई में प्ले स्कूलों की बढ़ती फीस को लेकर सोशल मीडिया पर नई बहस छिड़ गई है। Indian Institute of Technology Bombay (IIT बॉम्बे) से पासआउट एक पूर्व छात्र ने दावा किया है कि उसकी चार साल की इंजीनियरिंग की कुल फीस, शहर के एक नामी प्ले स्कूल की एक साल की फीस से भी कम थी। यह टिप्पणी सामने आते ही इंटरनेट पर चर्चा तेज हो गई।

ग्रेजुएट ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि उसने IIT बॉम्बे में पढ़ाई के दौरान जितनी फीस चार साल में चुकाई, उससे लगभग दोगुनी रकम आज एक प्री-स्कूल एक साल के लिए वसूल रहा है। इसके बाद कई अभिभावकों ने भी निजी स्कूलों की बढ़ती फीस, एडमिशन चार्ज, एक्टिविटी फीस और अन्य अतिरिक्त खर्चों पर सवाल उठाए।

कुछ यूजर्स का कहना है कि महानगरों में प्री-स्कूल अब ‘ब्रांडेड एजुकेशन’ का हिस्सा बन गए हैं, जहां इंफ्रास्ट्रक्चर, एयर-कंडीशंड क्लासरूम और इंटरनेशनल करिकुलम के नाम पर भारी शुल्क लिया जाता है। वहीं, कई लोगों ने तर्क दिया कि उच्च शिक्षा संस्थानों को सरकारी सब्सिडी मिलती है, जबकि निजी प्ले स्कूल पूरी तरह निजी निवेश पर चलते हैं, इसलिए तुलना पूरी तरह समान नहीं है।

फिलहाल यह मुद्दा ऑनलाइन बहस का विषय बना हुआ है और अभिभावक शिक्षा की बढ़ती लागत पर चिंता जता रहे हैं।

गाजा पुनर्निर्माण के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में भारत पर्यवेक्षक के रूप में शामिल, वॉशिंगटन में उपराजदूत ने किया प्रतिनिधित्व


 Donald Trump द्वारा गाजा के पुनर्निर्माण के लिए प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में भारत ने प्रत्यक्ष सदस्य के बजाय पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में भागीदारी की। इस पहल का उद्देश्य संघर्ष प्रभावित गाजा क्षेत्र में पुनर्निर्माण, मानवीय सहायता और बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना बताया गया है।

भारत की ओर से वॉशिंगटन डीसी में उपराजदूत नामग्या सी खंपा ने बैठक में हिस्सा लिया। कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, भारत ने क्षेत्र में स्थिरता, मानवीय सहायता और दीर्घकालिक शांति प्रयासों का समर्थन दोहराया, लेकिन औपचारिक सदस्यता से दूरी बनाए रखी। भारत परंपरागत रूप से पश्चिम एशिया के मुद्दों पर संतुलित और स्वतंत्र रुख अपनाता रहा है।

‘बोर्ड ऑफ पीस’ को गाजा में पुनर्निर्माण परियोजनाओं, वित्तीय सहायता और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी के समन्वय के मंच के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि इस पहल को लेकर अलग-अलग देशों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और इसकी संरचना व अधिकार-क्षेत्र को लेकर भी चर्चा जारी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यवेक्षक के रूप में शामिल होकर भारत ने कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है, जिससे वह मानवीय प्रयासों का समर्थन भी कर सके और क्षेत्रीय जटिलताओं से सीधे तौर पर न जुड़े।

महाराष्ट्र में नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म का मामला, तीन आरोपी गिरफ्तार; ‘लव जिहाद’ एंगल की भी जांच


 Maharashtra के Ahilyanagar जिले के Rahuri क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार 15 वर्षीय एक लड़की का कथित रूप से अपहरण कर उसे जंगल में ले जाया गया, जहां पांच दिनों तक उसके साथ दुष्कर्म किया गया। इस घटना के बाद इलाके में आक्रोश का माहौल है।

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पीड़िता को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल भेजा गया है और उसके बयान के आधार पर आगे की जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है।

स्थानीय स्तर पर कुछ संगठनों ने इस घटना में ‘लव जिहाद’ का एंगल होने का आरोप लगाया है। हालांकि पुलिस का कहना है कि फिलहाल मामले की जांच तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की पुष्टि की जाएगी।

प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। वहीं, परिजनों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों को कानून के मुताबिक कड़ी सजा दिलाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

‘वेश्यावृत्ति सामाजिक सेवा है’— अभिनेत्री मोना थीबा के बयान पर बवाल, माफी की मांग तेज


 गुजराती फिल्म इंडस्ट्री की अभिनेत्री Mona Thiba के एक बयान ने विवाद खड़ा कर दिया है। राजकोट में अपनी आगामी फिल्म के प्रमोशन के दौरान उन्होंने कहा कि “वेश्यावृत्ति एक प्रकार की सामाजिक सेवा है” और इससे जुड़ी महिलाएं परोक्ष रूप से समाज की मदद करती हैं। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और विभिन्न संगठनों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

अभिनेत्री के अनुसार, यदि यह पेशा न हो तो समाज में गंभीर अपराधों में बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, उनके इस तर्क की कई सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों ने कड़ी आलोचना की है। ‘विज्ञान जाथा’ के चेयरमैन Jayant Pandya ने इसे “मूर्खतापूर्ण” बताते हुए कहा कि किसी भी अनैतिक माने जाने वाले व्यवसाय की तुलना समाज सेवा से करना उचित नहीं है। वहीं लेउवा पाटीदार समाज के नेता Parsottam Pipaliya ने बयान को अत्यंत निंदनीय बताया और अभिनेत्री से सार्वजनिक स्पष्टीकरण या माफी की मांग की है।

बताया जा रहा है कि मोना थीबा इन दिनों 27 फरवरी को रिलीज होने वाली गुजराती फिल्म ‘शक्ति’ के प्रमोशन में व्यस्त हैं। हालांकि फिल्म की कहानी और इस बयान के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। फिलहाल उनके इस बयान ने बहस को जन्म दे दिया है और विरोध का स्वर तेज होता जा रहा है।

न गोला-बारूद, न मिसाइल… कैंची से जंग लड़ रहे यूक्रेनी सैनिक, ऐसे काट रहे रूस के ‘छोटे’ ड्रोन


 Russia और Ukraine के बीच जारी युद्ध में अब एक अनोखी तस्वीर सामने आई है। खबर है कि यूक्रेनी सैनिक आधुनिक हथियारों के साथ-साथ एक साधारण कैंची भी साथ रख रहे हैं। वजह है रूस द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे फाइबर-ऑप्टिक कंट्रोल वाले छोटे ड्रोन, जिन्हें सैनिक ‘छुटकू सैनिक’ कहकर संबोधित कर रहे हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये ड्रोन आसमान से हमला करने के बजाय ज़मीन के करीब रहकर फाइबर-ऑप्टिक केबल के जरिए ऑपरेट होते हैं। चूंकि इन पर पारंपरिक जैमिंग सिस्टम का असर नहीं होता, इसलिए इन्हें रोकना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में यूक्रेनी सैनिक ड्रोन की कंट्रोल केबल तक पहुंचकर उसे कैंची से काट देते हैं, जिससे ड्रोन तुरंत निष्क्रिय हो जाता है।

युद्ध ने आधुनिक तकनीक और साधारण उपायों का अनोखा संगम दिखाया है। जहां एक ओर हाई-टेक हथियार और मिसाइल सिस्टम हैं, वहीं दूसरी ओर एक छोटी सी कैंची भी रणनीतिक हथियार बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दर्शाता है कि युद्ध में केवल अत्याधुनिक तकनीक ही नहीं, बल्कि त्वरित जुगाड़ और जमीनी समझ भी अहम भूमिका निभाती है।

रूस-यूक्रेन संघर्ष लगातार नए रूप ले रहा है और दोनों पक्ष लगातार नई रणनीतियां अपना रहे हैं। इस बीच यूक्रेनी सैनिकों की यह ‘कैंची रणनीति’ चर्चा का विषय बनी हुई है।

कभी भारत था आगे, आज चीन 6 गुना अमीर! कहां पिछड़ गई हमारी अर्थव्यवस्था?


  भारत और चीन की आर्थिक यात्रा की तुलना आज फिर चर्चा में है। एक समय ऐसा था जब 1980 के दशक में भारत की प्रति व्यक्ति आय चीन से अधिक मानी जाती थी। लेकिन बीते चार दशकों में तस्वीर पूरी तरह बदल गई। आज चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और प्रति व्यक्ति आय के मामले में भारत से कई गुना आगे निकल गया है।

China ने 1980 के दशक में बड़े पैमाने पर आर्थिक सुधार, निर्यात-आधारित मैन्युफैक्चरिंग और विदेशी निवेश को बढ़ावा दिया। विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZ) की स्थापना और तेज़ इंफ्रास्ट्रक्चर विकास ने उसे वैश्विक सप्लाई चेन का केंद्र बना दिया। वहीं India ने 1991 के बाद उदारीकरण की राह पकड़ी और आईटी व सेवा क्षेत्र में मजबूत पहचान बनाई, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात क्षमता उतनी तेज़ी से नहीं बढ़ सकी।

चीन की आर्थिक नीतियों में दीर्घकालिक योजना, बड़े पैमाने पर औद्योगिक उत्पादन और आक्रामक निर्यात रणनीति प्रमुख रही। इसके मुकाबले भारत को नीति क्रियान्वयन, इंफ्रास्ट्रक्चर, श्रम सुधार और विनिर्माण क्षेत्र में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

हालांकि भारत ने भी पिछले तीन दशकों में उल्लेखनीय प्रगति की है और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, लेकिन प्रति व्यक्ति आय के मामले में अब भी चीन से काफी पीछे है। विशेषज्ञ मानते हैं कि मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा, स्किल डेवलपमेंट और निर्यात विस्तार पर फोकस करके भारत इस अंतर को कम कर सकता है।

बड़ा भूकंप आया तो यूपी के ये दो शहर हो सकते हैं तबाह, IIT कानपुर की स्टडी ने बढ़ाई चिंता


 उत्तर प्रदेश के गंगा के मैदानी इलाकों को लेकर एक नई रिसर्च ने चिंता बढ़ा दी है। Indian Institute of Technology Kanpur (IIT कानपुर) की एक स्टडी के मुताबिक, अगर भविष्य में बड़ा भूकंप आता है तो राज्य के कुछ प्रमुख शहरों को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है। खास तौर पर गंगा के किनारे बसे शहरों में ज़मीन के लिक्विफेक्शन (Liquefaction) का खतरा बताया गया है।

आईआईटी कानपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर निहार रंजन पात्रा के अनुसार, साल 1803 और 1934 में आए बड़े भूकंपों के बाद गंगा के मैदानी क्षेत्रों में लिक्विफेक्शन की घटनाएं दर्ज की गई थीं। लिक्विफेक्शन वह स्थिति होती है जब भूकंप के झटकों के कारण पानी से संतृप्त ढीली मिट्टी अपनी मजबूती खो देती है और तरल की तरह व्यवहार करने लगती है। इससे इमारतों की नींव कमजोर हो सकती है और बड़े पैमाने पर ढांचागत क्षति हो सकती है।

स्टडी में यह भी बताया गया है कि ये इलाके भूकंपीय फॉल्ट लाइन के प्रभाव क्षेत्र में आते हैं, जिससे जोखिम और बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी योजना, मजबूत निर्माण मानकों और जागरूकता के जरिए संभावित नुकसान को कम किया जा सकता है।

हालांकि वैज्ञानिकों ने घबराने के बजाय सतर्क रहने और भवन निर्माण में भूकंपरोधी तकनीकों को अपनाने की सलाह दी है।

राज्यसभा बनाम लोकसभा: क्या दोनों सांसदों की सैलरी में है फर्क? जानिए पूरी सच्चाई


 अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या राज्यसभा और लोकसभा के सांसदों की सैलरी अलग-अलग होती है। दरअसल, संसद के दोनों सदनों — Rajya Sabha और Lok Sabha — के सदस्यों को समान वेतन और भत्ते मिलते हैं। यानी राज्यसभा सांसद को लोकसभा सांसद से न तो कम और न ही ज्यादा सैलरी मिलती है।

1 अप्रैल 2023 से लागू संशोधन के बाद सांसदों का मूल वेतन 1,24,000 रुपये प्रतिमाह है। इसके अलावा उन्हें संसद सत्र के दौरान प्रतिदिन उपस्थिति भत्ता भी दिया जाता है। सांसदों को वेतन के अतिरिक्त कई तरह के भत्ते और सुविधाएं भी मिलती हैं, जिनमें कार्यालय व्यय भत्ता, निर्वाचन क्षेत्र भत्ता, यात्रा भत्ता और दिल्ली में सरकारी आवास शामिल हैं।

कुल मिलाकर, वेतन और भत्तों को जोड़ने पर सांसदों को हर महीने अच्छी-खासी राशि मिलती है। हालांकि, मूल वेतन दोनों सदनों के लिए समान है और इसमें कोई अंतर नहीं किया गया है।

सांसदों की सैलरी और भत्तों का निर्धारण संसद द्वारा पारित कानून के तहत होता है, और समय-समय पर इसमें संशोधन भी किया जाता है। इसलिए यह स्पष्ट है कि राज्यसभा और लोकसभा के सांसदों के वेतन में कोई भेदभाव नहीं है।

फिल्टर वाली क्लिप पर भड़के यूजर्स, बोले – ‘फिल्टर को अपराध घोषित कर देना चाहिए’


 एक क्लिप को लेकर यूजर्स की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। वीडियो में दिखाई दे रही महिला ने कथित तौर पर भारी मात्रा में ब्यूटी फिल्टर का इस्तेमाल किया है, जिसे लेकर लोगों ने जमकर आलोचना की। कई यूजर्स का कहना है कि जरूरत से ज्यादा फिल्टर इस्तेमाल करने से वास्तविकता और आभासी छवि के बीच फर्क मिटने लगता है।

एक यूजर ने टिप्पणी करते हुए लिखा, “फिल्टर को अपराध घोषित कर देना चाहिए।” वहीं दूसरे यूजर्स ने कहा कि सोशल मीडिया पर इस तरह के ट्रेंड युवाओं में गलत सौंदर्य मानक स्थापित करते हैं। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पारदर्शिता होनी चाहिए और यदि वीडियो में फिल्टर का उपयोग हुआ है तो इसका खुलासा किया जाना चाहिए।

हालांकि, कई यूजर्स ने महिला का समर्थन भी किया। उनका कहना है कि फिल्टर का इस्तेमाल व्यक्तिगत पसंद का मामला है और किसी को इसके लिए ट्रोल करना सही नहीं है। समर्थकों का तर्क है कि सोशल मीडिया एक रचनात्मक मंच है, जहां लोग अपनी पसंद के अनुसार कंटेंट तैयार करते हैं।

फिलहाल यह क्लिप तेजी से शेयर की जा रही है और इस पर बहस जारी है कि क्या डिजिटल फिल्टर केवल मनोरंजन का साधन हैं या फिर वे समाज में अवास्तविक अपेक्षाएं पैदा कर रहे हैं।

Thursday, 19 February 2026

हिमाचल में एंट्री टैक्स ढाई गुना! सुक्खू सरकार का बड़ा फैसला, 1 अप्रैल से नई दरें लागू


  पर्यटन सीजन से पहले बाहरी राज्यों के सैलानियों को बड़ा झटका लगा है। हिमाचल प्रदेश की हिमाचल प्रदेश सरकार ने नई बैरियर नीति जारी करते हुए एंट्री टैक्स में भारी बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी।

नई अधिसूचना के अनुसार, दिल्लीहरियाणापंजाबउत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों से आने वाले निजी कार चालकों को अब 70 रुपये की जगह 170 रुपये एंट्री टैक्स देना होगा। यानी लगभग ढाई गुना बढ़ोतरी।

12+1 सवारी वाले वाहनों से पहले 110 रुपये लिए जाते थे, जिन्हें बढ़ाकर 170 रुपये कर दिया गया है। हेवी वाहनों का टैक्स 720 रुपये से बढ़ाकर 900 रुपये कर दिया गया है। निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी जैसे जेसीबी पर शुल्क 570 रुपये से बढ़ाकर 800 रुपये कर दिया गया है। ट्रैक्टर का शुल्क 70 से बढ़ाकर 100 रुपये कर दिया गया है। हालांकि डबल एक्सल बस और ट्रक के लिए 570 रुपये की दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

सरकार का कहना है कि राज्य की आर्थिक स्थिति को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। लेकिन पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि इससे सैलानियों की संख्या प्रभावित हो सकती है।

‘द केरल स्टोरी 2’ पर कानूनी संकट, केरल हाईकोर्ट में रिलीज रोकने की याचिका


 फिल्म द केरल स्टोरी 2 – गोज बियॉन्ड अपनी रिलीज से पहले ही कानूनी विवादों में घिर गई है। 27 फरवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही इस फिल्म के खिलाफ केरल हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है।

याचिका पेशे से जीवविज्ञानी श्रीदेव नाम्बूदिरी ने दाखिल की है। उनका आरोप है कि फिल्म का टीजर केरल राज्य की छवि को नकारात्मक और विवादित तरीके से पेश करता है। याचिकाकर्ता का कहना है कि फिल्म की कहानी में मध्य प्रदेश और राजस्थान की महिलाओं का भी जिक्र है, लेकिन शीर्षक में ‘केरल’ का नाम जोड़कर पूरे राज्य को एक विशेष नैरेटिव से जोड़ने की कोशिश की गई है।

याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि फिल्म का कंटेंट सांप्रदायिक तनाव को बढ़ावा दे सकता है और सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकता है। इसलिए अदालत से फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की गई है।

गौरतलब है कि पहले भाग द केरल स्टोरी को लेकर भी देशभर में विवाद हुआ था। अब सीक्वल को लेकर भी बहस तेज हो गई है।

मामले में अंतिम फैसला अदालत को करना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक शांति के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। फिलहाल फिल्मी और राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर चर्चाएं तेज हैं।

पायल मलिक की गोदभराई में छाईं सौतन कृतिका मलिक,


 यूट्यूबर Armaan Malik एक बार फिर सुर्खियों में हैं। वह जल्द ही पांचवीं बार पिता बनने वाले हैं। हाल ही में उनकी पहली पत्नी Payal Malik की गोदभराई (बेबी शॉवर) धूमधाम से मनाई गई, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।

इस खास मौके पर परिवार और करीबी दोस्तों की मौजूदगी में पारंपरिक रस्में निभाई गईं। समारोह में पायल ट्रेडिशनल लुक में नजर आईं, जबकि दूसरी पत्नी Kritika Malik भी पूरी तरह सज-धज कर शामिल हुईं। कई तस्वीरों और वीडियो में कृतिका पायल के साथ पोज देती दिखीं, जिसने सोशल मीडिया यूजर्स का खास ध्यान खींचा।

फैंस इस बेबी शॉवर की झलकियां देखने के बाद दोनों पत्नियों के रिश्ते और बॉन्डिंग पर चर्चा कर रहे हैं। कुछ लोग परिवार की एकजुटता की तारीफ कर रहे हैं, तो कुछ इसे लेकर अलग-अलग राय दे रहे हैं।

अरमान मलिक अपने व्लॉग्स और निजी जिंदगी को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं। उनकी फैमिली लाइफ सोशल मीडिया पर लगातार ट्रेंड करती रहती है। अब पायल की गोदभराई की तस्वीरों ने एक बार फिर इंटरनेट पर हलचल बढ़ा दी है।