Saturday, 24 January 2026

: गंगापुत्र भीष्म ने बाणों की शैया पर 2 महीने तक क्यों टाला मृत्यु का क्षण? जानिए इच्छा मृत्यु के वरदान की पूरी कथा


 महाभारत के सबसे महान और त्यागमयी पात्रों में गिने जाने वाले गंगापुत्र भीष्म की मृत्यु से जुड़ी तिथि को भीष्म अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को आता है। इस दिन धर्म, कर्तव्य और संयम की अद्भुत मिसाल बने भीष्म पितामह का स्मरण किया जाता है।

कुरुक्षेत्र युद्ध के दसवें दिन अर्जुन ने शिखंडी को आगे रखकर भीष्म पर बाणों की वर्षा की। भीष्म का शरीर बाणों से छलनी हो गया, लेकिन वे तत्काल मृत्यु को प्राप्त नहीं हुए। इसका कारण था—इच्छा मृत्यु का वरदान

भीष्म को यह वरदान उनके पिता राजा शांतनु से मिला था। गंगा से विवाह की शर्तों के कारण भीष्म ने आजीवन ब्रह्मचर्य और सिंहासन त्याग का कठोर व्रत लिया था। अपने पुत्र के इस महान त्याग से प्रसन्न होकर राजा शांतनु ने उन्हें वरदान दिया कि वे अपनी मृत्यु का समय स्वयं चुन सकेंगे

महाभारत के अनुसार, भीष्म ने युद्धभूमि में ही प्राण त्यागने से इनकार कर दिया और उत्तरायण काल का इंतजार किया। हिंदू धर्म में उत्तरायण को मोक्षदायी काल माना जाता है। उस समय सूर्य दक्षिणायन में था, इसलिए भीष्म लगभग 58 दिनों तक बाणों की 

झरिया के ‘खान सर’: दिन में सरकारी नौकरी, रात में गढ़ रहे अफसर, फ्री में संवार रहे 600 युवाओं का भविष्य


 धनबाद। कोयलांचल की पहचान लंबे समय तक सिर्फ कोयले तक सीमित रही, लेकिन अब झरिया से एक ऐसी शख्सियत उभरकर सामने आई है, जो शिक्षा के जरिए इलाके की तस्वीर बदल रही है। झरिया के नवीन कुमार, जिन्हें छात्र प्यार से ‘खान सर’ कहकर बुलाते हैं, दिन में सरकारी नौकरी करते हैं और रात में सैकड़ों युवाओं को अफसर बनने का रास्ता दिखा रहे हैं।

नवीन कुमार पिछले 9 वर्षों से आयकर विभाग, धनबाद में कार्यरत हैं। रोजाना 8 घंटे की ड्यूटी पूरी करने के बाद भी उनका हौसला थकता नहीं। नौकरी के बाद वे झरिया के हटली बांध क्षेत्र पहुंचते हैं, जहां वे बिल्कुल मुफ्त कोचिंग के जरिए छात्रों को SSC, रेलवे और बैंकिंग परीक्षाओं की तैयारी कराते हैं।

पिछले तीन वर्षों से वे अपने पिता की स्मृति में श्री शंभू कॉम्पिटेटिव क्लासेस का संचालन कर रहे हैं। इस संस्थान का उद्देश्य उन गरीब और मध्यमवर्गीय छात्रों को आगे बढ़ाना है, जो महंगी कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते। फिलहाल इस कोचिंग से करीब 600 छात्र-छात्राएं जुड़े हुए हैं।

नवीन कुमार सुबह 7 से 9 बजे और शाम 7 से रात 10 बजे तक छात्रों को पढ़ाते हैं। उनकी कक्षाओं में सब्जी विक्रेताओं, ऑटो चालकों और दिहाड़ी मजदूरों के बच्चे बैठते हैं, जिनकी आंखों में जीएसटी इंस्पेक्टर, बैंक अफसर और रेलवे अधिकारी बनने के सपने हैं।

नवीन कुमार का मानना है कि शिक्षा सिर्फ करियर नहीं, बल्कि समाज को बदलने का सबसे मजबूत हथियार है। उनकी यह निस्वार्थ पहल झरिया ही नहीं, पूरे धनबाद जिले के लिए प्रेरणा बनती जा रही है।


 

इस तारीख से पहले करें आवेदन, मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में मिलेगी सरकारी सहायता


 जांजगीर-चांपा। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत आगामी सामूहिक विवाह कार्यक्रम के लिए पात्र परिवारों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। योजना का लाभ लेने के इच्छुक हितग्राही 31 जनवरी 2026 तक अनिवार्य रूप से संबंधित परियोजना कार्यालय में पंजीकरण करा सकते हैं। तय समयसीमा के बाद आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

महिला एवं बाल विकास विभाग की अधिकारी अनिता अग्रवाल ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह में सहयोग करना है। योजना के अंतर्गत केवल उन्हीं जोड़ों को शामिल किया जाता है, जिनका यह प्रथम विवाह हो। नियमों के अनुसार वर की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और वधु की आयु 18 वर्ष निर्धारित की गई है।

आवेदन के दौरान हितग्राहियों को 50 रुपये के स्टांप पेपर पर शपथ पत्र देना होगा, जिसमें विवाह की स्थिति और आयु संबंधी जानकारी दर्ज होगी। आवेदन पत्र का सत्यापन संबंधित ग्राम की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और ग्राम पंचायत के सरपंच द्वारा किया जाएगा। सत्यापन के बाद प्रकरण परियोजना कार्यालय में जमा किया जाएगा और चयनित जोड़ों को सामूहिक विवाह कार्यक्रम में शामिल होने की सूचना दी जाएगी।

योजना के तहत मिलने वाली सहायता की बात करें तो शासन द्वारा प्रति जोड़ा कुल 50,000 रुपये की सहायता दी जाती है। इसमें से 36,000 रुपये चेक के माध्यम से वर-वधु को प्रदान किए जाते हैं, जबकि 14,000 रुपये मूल्य के उपहार दिए जाते हैं। इन उपहारों में घरेलू उपयोग की सामग्री जैसे कुकर, अलमारी, बर्तन, गद्दा, तकिया, चादर, कपड़े, मंगलसूत्र और गृहस्थ जीवन के लिए आवश्यक अन्य सामान शामिल हैं।

 

JEE Main 2026: 24 जनवरी की मॉर्निंग शिफ्ट का पेपर कैसा रहा? जानें डिफिकल्टी लेवल और टॉपिक-वाइज एनालिसिस


  नई दिल्ली। जॉइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन मेन (JEE Main) 2026 के जनवरी सेशन के तहत 24 जनवरी को बीटेक/बीई की मॉर्निंग शिफ्ट की परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित की गई। यह परीक्षा सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक चली। परीक्षा में शामिल छात्रों और विषय विशेषज्ञों के मुताबिक, पेपर का ओवरऑल लेवल मध्यम (Moderate) रहा।

तीनों विषय—फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स—का कठिनाई स्तर लगभग संतुलित देखा गया, हालांकि मैथ्स को अपेक्षाकृत थोड़ा कठिन और समय लेने वाला बताया गया। कई छात्रों ने कहा कि मैथ्स में कैलकुलेशन आधारित सवाल ज्यादा थे, जिससे टाइम मैनेजमेंट चुनौतीपूर्ण रहा।

पेपर पैटर्न की बात करें तो JEE Main बीटेक पेपर में हर विषय को दो सेक्शन में बांटा गया था। सेक्शन-A में 20 मल्टीपल चॉइस प्रश्न थे, जबकि सेक्शन-B में 5 न्यूमेरिकल वैल्यू आधारित प्रश्न पूछे गए। पेपर पूरी तरह से एनटीए द्वारा निर्धारित सिलेबस पर आधारित था।

टॉपिक-वाइज ट्रेंड देखें तो फिजिक्स में इलेक्ट्रोस्टैटिक्स, करंट इलेक्ट्रिसिटी और मॉडर्न फिजिक्स से सवाल ज्यादा आए। केमिस्ट्री में फिजिकल और इनऑर्गेनिक के प्रश्न अपेक्षाकृत आसान रहे, जबकि ऑर्गेनिक से कॉन्सेप्ट-बेस्ड सवाल पूछे गए। मैथ्स में कैलकुलस, वेक्टर और 3D जियोमेट्री का वर्चस्व रहा।

आने वाली शिफ्ट्स में परीक्षा देने वाले छात्रों के लिए यह एनालिसिस रणनीति बनाने में मददगार साबित हो सकता है, खासकर टाइम मैनेजमेंट और हाई-वेटेज टॉपिक्स पर फोकस करने के लिहाज से।

99% मंदिर बौद्ध स्थलों पर बने होने के दावे पर सियासी घमासान, साध्वी प्रज्ञा के बयान पर उदित राज का पलटवार


 नई दिल्ली। भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद देश की राजनीति में बयानबाज़ी तेज हो गई है। भाजपा की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के “मथुरा और काशी का स्थायी समाधान होना चाहिए” वाले बयान पर कांग्रेस नेता उदित राज ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दावा किया कि देश के 99 प्रतिशत मंदिर बौद्ध स्थलों के ऊपर बनाए गए हैं।

समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में उदित राज ने कहा कि तिरुपति, पुरी और केदारनाथ जैसे प्रमुख तीर्थस्थल मूल रूप से बौद्ध स्थल रहे हैं, जबकि मथुरा और काशी बौद्ध धर्म के बड़े केंद्र थे। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर इतिहास की खुदाई लगातार की जाएगी, तो क्या हिंदू मंदिरों की बुनियाद पर भी सवाल खड़े नहीं होंगे।

उदित राज ने कहा, “अगर कभी बौद्धों का शासन आ गया, तो क्या वे हिंदू मंदिरों को तोड़ेंगे? क्या उनकी नींव उखाड़ दी जाएगी?” उन्होंने आरोप लगाया कि इतिहास को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंच रहा है।

कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि भारत में अलग-अलग सभ्यताएं और धर्म समय-समय पर आए हैं और हर दौर में सांस्कृतिक परिवर्तन हुए हैं। मंदिरों और मस्जिदों के नीचे बौद्ध अवशेष मिलने की बात कहते हुए उन्होंने भाजपा पर देश को विभाजित करने का आरोप लगाया।

इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है और इतिहास, धर्म व राजनीति के आपसी संबंधों पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।

मध्य प्रदेश के तेजतर्रार IPS अधिकारी ने मांगा VRS, राष्ट्रपति पदक विजेता अभिषेक तिवारी ने क्यों छोड़ी सेवा?


 नई दिल्ली: मध्य प्रदेश कैडर के चर्चित और राष्ट्रपति पदक से सम्मानित आईपीएस अधिकारी अभिषेक तिवारी के अचानक स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेने के फैसले ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है. 2013 बैच के इस तेजतर्रार अधिकारी ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया है. उनका यह कदम इसलिए भी चौंकाने वाला माना जा रहा है, क्योंकि सेवा के अभी कई अहम वर्ष बाकी थे.

अभिषेक तिवारी फिलहाल दिल्ली में प्रतिनियुक्ति पर तैनात थे और नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (NTRO) में अपनी सेवाएं दे रहे थे. उनके इस्तीफे को महज एक पद छोड़ने का फैसला नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में बढ़ते दबाव, बदलती प्राथमिकताओं और ‘ब्रेन ड्रेन’ से जोड़कर देखा जा रहा है. राष्ट्रपति से सम्मानित अधिकारी का इस तरह अचानक सिस्टम से बाहर होना कई सवाल खड़े कर रहा है.

मध्य प्रदेश में अपने कार्यकाल के दौरान अभिषेक तिवारी ने बालाघाट, शहडोल और रतलाम जैसे संवेदनशील जिलों में एसपी के रूप में प्रभावी काम किया. अपराध नियंत्रण के लिए उन्होंने तकनीक और डेटा एनालिटिक्स का जिस तरह इस्तेमाल किया, वह उन्हें अन्य अधिकारियों से अलग बनाता है. संगठित अपराध, साइबर क्राइम और नक्सल प्रभावित इलाकों में उनकी रणनीति की काफी सराहना हुई थी.

सूत्रों के मुताबिक, अभिषेक तिवारी के इस फैसले के पीछे निजी और पेशेवर कारण दोनों हो सकते हैं, हालांकि उन्होंने सार्वजनिक तौर पर किसी दबाव या विवाद से इनकार किया है. अब सवाल यही है कि क्या यह फैसला किसी नई करियर पारी की शुरुआत है या सिस्टम के भीतर बढ़ते तनाव का संकेत. फिलहाल, उनका इस्तीफा प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है.

छात्रा की मौत से सीतामढ़ी में उबाल, इंजीनियरिंग कॉलेज में छात्रों का हल्ला बोल, भारी पुलिस बल तैनात


 सीतामढ़ी: बिहार के सीतामढ़ी स्थित सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में फाइनल ईयर की छात्रा की मौत के बाद माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया है. छात्रा मेधा पाराशर की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत से आक्रोशित छात्रों ने कॉलेज परिसर में जमकर हंगामा किया. हालात को काबू में रखने के लिए कॉलेज और आसपास के इलाकों में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है.

छात्रों का आरोप है कि 23 जनवरी को हॉस्टल में रहने वाली मेधा पाराशर की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी. स्थिति गंभीर होने के बावजूद कॉलेज प्रशासन ने समय रहते न तो एंबुलेंस बुलवाई और न ही उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया. छात्रों का कहना है कि काफी देर बाद जब प्राचार्य की निजी गाड़ी से उसे अस्पताल ले जाने की कोशिश की गई, तो रास्ते में यह कहकर उतार दिया गया कि गाड़ी गंदी हो जाएगी. इसी लापरवाही के कारण मेधा की जान चली गई.

मेधा पाराशर बिहार के भागलपुर जिले की रहने वाली थी और सीतामढ़ी में रहकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही थी. उसकी मौत की खबर फैलते ही कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं आक्रोशित हो उठे. प्रदर्शनकारियों ने कॉलेज प्रशासन और प्राचार्य के खिलाफ नारेबाजी करते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की.

छात्रों का कहना है कि यह सिर्फ एक छात्रा की मौत नहीं, बल्कि कॉलेज की स्वास्थ्य सुविधाओं और प्रशासनिक संवेदनहीनता का गंभीर उदाहरण है. प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने चेतावनी दी है कि जब तक मेधा को न्याय नहीं मिलता और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा. स्थिति को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है.

Thursday, 22 January 2026

इन बॉलीवुड एक्ट्रेसेज ने पहनीं करोड़ों की रिंग्स, सिर्फ एक अंगूठी में हैं लग्ज़री का तड़का


 बॉलीवुड एक्ट्रेसेज अपने फैशन और लग्ज़री के लिए हमेशा सुर्खियों में रहती हैं। इन दिनों तमन्ना भाटिया अपनी हाल ही में पहनी बड़ी डायमंड रिंग को लेकर चर्चा में हैं। यह अंगूठी इतनी महंगी है कि इसकी कीमत करोड़ों में बताई जा रही है।

फिल्मी दुनिया में रिंग्स सिर्फ एक्सेसरी नहीं, बल्कि स्टाइल और स्टेटस का प्रतीक बन चुकी हैं। तमन्ना भाटिया की इस अंगूठी की डिजाइन बेहद शानदार और भव्य है, जो किसी भी रेड कार्पेट इवेंट या सोशल मीडिया पोस्ट में तुरंत ध्यान खींचती है।

सिर्फ तमन्ना ही नहीं, बल्कि कई बॉलीवुड एक्ट्रेसेज भी अपनी लग्ज़री रिंग्स की वजह से चर्चा में रहती हैं। करीना कपूर, दीपिका पादुकोण, श्रद्धा कपूर और कंगना रनौत जैसी स्टार्स भी अक्सर करोड़ों की रिंग्स पहने नजर आती हैं। कुछ रिंग्स में बड़े ही दुर्लभ डायमंड्स और जेमस्टोन्स लगे होते हैं, जो उन्हें और भी खास बनाते हैं।

ऐसी रिंग्स केवल शौक या स्टाइल के लिए नहीं पहनी जातीं, बल्कि इन्हें इन्वेस्टमेंट और फैशन स्टेटमेंट के रूप में भी देखा जाता है। फैंस सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरों और वीडियो को देखकर रिंग्स की कीमत और डिजाइन को लेकर लगातार चर्चा करते रहते हैं।

लग्ज़री और ग्लैमर की दुनिया में ये रिंग्स स्टार्स की खूबसूरती और स्टाइल को और भी बढ़ा देती हैं, और बॉलीवुड की रिच-एंड-फेमस लुक्स का हिस्सा बन जाती हैं।

मसालों को महीनों तक ताज़ा रखना है? अपनाएं ये आसान स्टोरेज टिप्स, खराब होने का नहीं रहेगा डर



 भारतीय रसोई में मसालों की अहम भूमिका होती है। हल्दी, धनिया, जीरा, लाल मिर्च और गरम मसाला न सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाते हैं, बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद होते हैं। लेकिन अगर इन्हें सही तरीके से स्टोर न किया जाए तो इनमें नमी, फंगस, कीड़े और बदबू जैसी समस्याएं आ सकती हैं, जिससे मसालों की गुणवत्ता खराब हो जाती है।

मसालों को लंबे समय तक सुरक्षित और ताज़ा रखने के लिए सबसे जरूरी है एयरटाइट कंटेनर का इस्तेमाल। कांच या स्टील के डिब्बे मसालों को हवा और नमी से बचाते हैं। प्लास्टिक कंटेनर से बचना बेहतर होता है, क्योंकि इनमें गंध बसने की संभावना रहती है।

इसके अलावा मसालों को हमेशा धूप और नमी से दूर रखें। सीधी धूप मसालों का रंग और स्वाद खराब कर सकती है, जबकि नमी से फफूंदी लगने का खतरा बढ़ जाता है। रसोई में मसालों को चूल्हे या सिंक के पास रखने से भी बचें।

ध्यान रखें कि मसाले निकालते समय सूखा चम्मच ही इस्तेमाल करें। गीले चम्मच से मसालों में नमी जा सकती है, जिससे वे जल्दी खराब हो जाते हैं। इन आसान उपायों को अपनाकर आप मसालों को लंबे समय तक ताज़ा और सुरक्षित रख सकते हैं।



एक नहीं, कई पार्टनर के साथ संबंध बनाती हैं बेलुगा व्हेल, जानिए क्यों समुद्र की ये ‘सफेद रानियां’ बार-बार बदलती हैं साथी


अलास्का की ठंडी और बर्फीली लहरों में रहने वाली बेलुगा व्हेल एक बार फिर वैज्ञानिकों के लिए चर्चा का विषय बन गई हैं। हालिया रिसर्च में सामने आया है कि ये समुद्री जीव एक ही साथी तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि नर और मादा दोनों ही कई पार्टनर्स के साथ संबंध बनाते हैं।

वैज्ञानिक इस व्यवहार को ‘पॉलीगाइनेंड्रस’ कहते हैं, जिसमें एक समूह के भीतर कई नर और कई मादाएं आपस में प्रजनन करती हैं। यह अध्ययन अलास्का के ब्रिस्टल बे क्षेत्र में रहने वाली बेलुगा व्हेल की आबादी पर किया गया।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह व्यवहार किसी तरह का ‘मनोरंजन’ नहीं बल्कि एक जैविक सुरक्षा रणनीति है। इससे आबादी में आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity) बनी रहती है और इनब्रीडिंग यानी करीबी रिश्तों में प्रजनन से होने वाली बीमारियों का खतरा कम हो जाता है।

अब तक माना जाता था कि केवल ताकतवर नर ही कई मादाओं के साथ प्रजनन करते हैं, लेकिन इस स्टडी ने इस धारणा को पूरी तरह गलत साबित कर दिया है। यहां मादाएं भी सक्रिय रूप से कई साथियों का चयन करती हैं।

यह महत्वपूर्ण रिसर्च प्रतिष्ठित जर्नल ‘Frontiers in Marine Science’ में प्रकाशित हुई है और इसे समुद्री जीवों के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यही अनोखी रणनीति बेलुगा व्हेल को विलुप्त होने से बचाने में मदद कर रही है।

धर्म की आड़ में सनातन को बदनाम करने की साजिश’, शंकराचार्य विवाद पर सोनीपत में गरजे सीएम योगी


 उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को हरियाणा के सोनीपत में एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान सनातन धर्म और शंकराचार्य विवाद को लेकर बड़ा बयान दिया। सीएम योगी मुरथल स्थित नागे बाबा मंदिर में आयोजित मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इस अवसर पर हरियाणा बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बडोली भी मौजूद रहे।

सभा को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने प्रयागराज में चल रहे शंकराचार्य विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि धर्म की आड़ में सनातन धर्म को बदनाम और कमजोर करने की साजिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि एक योगी, संत या संन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बड़ा कुछ नहीं होता। उनकी कोई निजी संपत्ति नहीं होती, बल्कि धर्म ही उनकी संपत्ति और राष्ट्र ही उनका स्वाभिमान होता है

सीएम योगी ने कहा कि इतिहास में कालनेमि जैसे कई पात्र रहे हैं, जो साधु-संत का भेष धारण कर धर्म को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करते हैं। ऐसे लोगों से समाज को सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सनातन धर्म को कमजोर करने वाली ताकतों के खिलाफ एकजुट होकर खड़े होना समय की मांग है।

उन्होंने आगे कहा कि आज जब पूरी दुनिया संघर्ष और अस्थिरता के दौर से गुजर रही है, तब भारत निरंतर प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। प्रयागराज की त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है और भारतीय संस्कृति की शक्ति का एहसास होता है।

सीएम योगी का यह बयान शंकराचार्य विवाद और सनातन धर्म से जुड़े मौजूदा विमर्श के बीच काफी अहम माना जा रहा है।

पितरों को भूत-पिशाच योनि से मुक्ति दिलाने का श्रेष्ठ उपाय, जानिए विधि


  Jaya Ekadashi 2026 इस साल 29 जनवरी, गुरुवार को है। यह दिन पितरों के पुण्य और मोक्ष के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट के अनुसार, जया एकादशी पर किए गए व्रत और पूजा से पितरों को भूत-पिशाच योनि से मुक्ति मिलती है और उनकी आत्मा तृप्त होती है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन पितरों को भूत-पिशाच योनि में जन्म लेना पड़ा हो, वे अपने संतान की सेवा और पूजा से मुक्ति की आशा रखते हैं। अगर पितरों की तृप्ति नहीं होती, तो उनके प्रकोप से परिवार में असाध्य रोग, धन संकट, काम में असफलता और सदस्यीय परेशानियां आती हैं।

जया एकादशी व्रत का महत्व पद्म पुराण में वर्णित है। युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से इसका महत्व पूछा था। श्रीकृष्ण ने बताया कि जया एकादशी का व्रत करने से जीवों को भूत, प्रेत और पिशाच जैसी योनियों से मुक्ति मिलती है। विधिपूर्वक व्रत रखने वाले व्यक्ति को भगवान श्रीहरि का आशीर्वाद मिलता है, उनके पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जया एकादशी पर व्रत, पूजा और पितरों को तर्पण करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है और पितरों की आत्मा शांति प्राप्त करती है। यह दिन अपने पितरों के कल्याण और आध्यात्मिक लाभ के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

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मुहूर्त न निकलने पर भी करें काम की शुरुआत, मां सरस्वती से मिलेगी सफलता


 बसंत पंचमी हिंदू धर्म में ज्ञान और कला की देवी सरस्वती का जन्मदिन माना जाता है। यह पर्व बसंती ऋतु के आगमन, प्रकृति के नवजागरण और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक भी है। इस दिन से होली की तैयारियां भी शुरू होती हैं और यह प्रेम और सौंदर्य के देवता कामदेव और रति से जुड़ा माना जाता है।

परंपरा के अनुसार, बसंत पंचमी पर लोग पीले या सफेद वस्त्र पहनकर मां सरस्वती की पूजा करते हैं। पीले फूल और भोग चढ़ाए जाते हैं और “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” मंत्र का जाप किया जाता है। खास बात यह है कि इस दिन नए काम, पढ़ाई, लेखन या शिक्षा से जुड़े कार्य शुरू करने से सफलता मिलने की मान्यता है। जरूरतमंदों को शिक्षा सामग्री दान करना भी शुभ माना जाता है।

आचार्य सोम प्रकाश शास्त्री के अनुसार, मौनी अमावस्या के बाद बसंत ऋतु आती है, जो हल्की ठंडी और सुखद होती है। इस समय हल्का पीतांबरी वस्त्र पहनना चाहिए। साल में केवल छह ऐसी तिथियां होती हैं, जिनमें विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन या भूमि पूजन जैसे कार्य आसानी से किए जा सकते हैं। इसलिए बसंत पंचमी को विशेष रूप से शुभ दिन माना गया है।

छात्र पीले वस्त्र पहनकर मां सरस्वती की आराधना करें, महिलाएं भगवान विष्णु की प्रार्थना करें और कन्याएं भगवती लक्ष्मी की पूजा करें। इस दिन नए कार्य शुरू करने से सालभर शुभ फल मिलने की मान्यता है


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