Saturday, 31 January 2026

हैदराबाद में हॉर्स सफारी का नया रोमांच, गांव के बीच मिलेगा अनोखा अनुभव


   हैदराबाद: अब वीकेंड पर शहर की भीड़-भाड़ से दूर प्रकृति और रोमांच का मज़ा लेना आसान हो गया है. कोकापेट से सिर्फ 40 मिनट की दूरी पर स्थित HYD हॉर्स एडवेंचर तेलंगाना का पहला ऐसा ग्रामीण क्लब है, जो पर्यटकों को शहर से दूर खुली हरियाली और घुड़सवारी का अनोखा अनुभव देता है.

यह 25 एकड़ के फार्महाउस में 10 किलोमीटर लंबी निर्देशित हॉर्स सफारी का आनंद लिया जा सकता है. यह सफर जंगलों, झील किनारों और पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरता है. सफारी नौसिखियों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, और सुरक्षा के लिए हेलमेट, बूट और प्रशिक्षित गाइड की सुविधा दी जाती है. दो घंटे के इस पैकेज में एक घंटा घुड़सवारी और एक घंटा जीप सफारी शामिल है, जिससे रोमांच दोगुना हो जाता है.

फार्म के घोड़े अर्जुन ने अपनी उत्कृष्टता साबित की है. दिसंबर 2025 के चेतक महोत्सव में नुक्रा श्रेणी में दूसरा स्थान और जनवरी 2026 में इंदौर के सेंट्रल इंडिया हॉर्स शो में राष्ट्रीय स्तर की मान्यता अर्जुन की और फार्म में घोड़ों के उच्च स्तर के रख-रखाव को दर्शाती है.

छात्रों से कारोबारियों तक, नोएडा की निगाहें वित्त मंत्री पर टिकी


 नोएडा: 1 फरवरी को पेश होने वाला केंद्रीय बजट 2026 हर वर्ग की उम्मीदों का केंद्र बन गया है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण नौवीं बार सदन में बजट पेश करेंगी, और यह पहली बार होगा कि रविवार को बजट पेश किया जाएगा. छात्रों, एजुकेशन एक्सपर्ट्स, स्टार्टअप फाउंडर्स, व्यापारियों और आम लोगों की नजरें इस बजट पर हैं, जो सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करेगा.

छात्र और युवा चाहते हैं AI और स्टार्टअप्स पर फोकस
छात्र मेधांश का कहना है कि स्टार्टअप्स पर जीएसटी का बोझ कम किया जाना चाहिए और देश में पूंजी स्टार्टअप्स के लिए उपलब्ध कराई जाए. AI 2035 तक भारतीय अर्थव्यवस्था में 1.7 ट्रिलियन डॉलर जोड़ सकता है, इसलिए बजट में इस सेक्टर को प्राथमिकता मिलनी चाहिए. एजुकेशनलिस्ट अरुण मौर्य और छात्रा सनाया सेठ का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में AI-ओरिएंटेड शॉर्ट-टर्म कोर्सेज लाने चाहिए, ताकि युवा सीधे रोजगार से जुड़ सकें.


व्यापारी समीर सेठ का कहना है कि बीते साल लोकल बिजनेस के लिए चुनौतीपूर्ण रहा. बजट में टैक्स और रेगुलेटरी बोझ कम, छोटे व्यापारियों के लिए ग्रांट्स और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सपोर्ट होना जरूरी है.

अनस्टॉप के फाउंडर अंकित अग्रवाल का कहना है कि स्टार्टअप्स पर टैक्स तभी लगाया जाए जब बिक्री हो. स्किल अपग्रेडेशन कोर्स और सर्टिफिकेट पर जीएसटी हटाने की मांग भी उठाई गई है.

नोएडा और ग्रेटर नोएडा के रियल एस्टेट डेवलपर्स चाहते हैं कि बजट स्थिर नीतियों और वित्तीय सपोर्ट के जरिए खरीदारों का भरोसा बनाए. जेवर एयरपोर्ट, मेट्रो और एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी ने इलाके को हाई-ग्रोथ कॉरिडोर बनाया है.

कुल मिलाकर, बजट 2026 से उम्मीद की जा रही है कि सरकार स्टार्टअप्स, स्किल डेवलपमेंट और रियल एस्टेट को बढ़ावा देकर भविष्य की मजबूत नींव रखे.

बच्चे के PTM में टीचर से पूछें ये 5 सवाल, पढ़ाई और व्यवहार दोनों में सुधार


 नई दिल्ली: पैरेंट-टीचर मीटिंग (PTM) सिर्फ नंबर या रैंक देखने का मौका नहीं है, बल्कि यह बच्चे की पढ़ाई, व्यवहार और मानसिक विकास को समझने का सही समय है. अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा आत्मविश्वासी और संतुलित बने, तो PTM में टीचर से ये 5 सवाल जरूर पूछें:

1. मेरा बच्चा क्लास में पढ़ाई को कितना समझ पा रहा है?
सिर्फ रटने की बजाय बच्चे को विषयों की असली समझ है या नहीं, यह जानना जरूरी है. क्या वह सवाल पूछता है? क्या वह कॉन्सेप्ट को समझकर जवाब देता है? इससे घर पर पढ़ाई में सही दिशा मिलती है.

टीचर से जानें कि कौन-से विषय या टॉपिक में बच्चा पीछे है और किस तरह की मदद की जरूरत है.

क्या बच्चा क्लास में ध्यान लगाता है, ग्रुप एक्टिविटीज़ में भाग लेता है या दोस्तों के साथ सहयोग करता है?

समय पर काम पूरा करना और समझदारी से असाइनमेंट करना, बच्चे की जिम्मेदारी और अनुशासन को दर्शाता है.

क्या वह साथी छात्रों के साथ मेलजोल में है? किसी तरह की चिंता या तनाव है तो टीचर से सलाह लें.

इन सवालों से न सिर्फ पढ़ाई में सुधार होता है, बल्कि बच्चे का आत्मविश्वास और समग्र विकास भी बेहतर बनता है.

.किसान ध्यान दें! फरवरी में दलहनी फसलों के लिए कीटों का खतरा, ऐसे करें बचाव


  फरवरी का महीना चना, मटर और मसूर जैसी दलहनी फसलों के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है. इस दौरान फली बेधक और सेमिलूपर जैसे कीट सक्रिय हो जाते हैं, जो पत्तियों और फलियों को काटकर पूरी फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं. कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सतर्क रहने और समय पर कीट नियंत्रण अपनाने की सलाह दी है.

कृषि विज्ञान केंद्र, नियामतपुर के डॉ. हादी हुसैन खान ने बताया कि इन कीटों से निपटने के लिए इज़ादिरैक्टिन (Azadirachtin 0.03%) या नीम तेल का छिड़काव प्रभावी है. एक हेक्टेयर खेत के लिए 5 लीटर दवा को 500-600 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें. यदि फली बेधक का प्रकोप अधिक हो, तो फेनवेलरेट (Fenvalerate) डस्ट 20-25 किलो प्रति हेक्टेयर की दर से भुरकाव करना चाहिए.

दवा के असर को बढ़ाने के लिए स्प्रे में स्टीकर (Sticker) मिलाना जरूरी है, ताकि दवा पत्तियों पर अच्छी तरह चिपक जाए और कीटों का प्रभावी खात्मा हो. किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेतों की निगरानी नियमित रखें और समय पर छिड़काव कर अपनी मेहनत की फसल को सुरक्षित बनाएं, ताकि आने वाले मौसम में अच्छी पैदावार सुनिश्चित की जा सके.

Thursday, 29 January 2026

IND vs PAK U19: भारत को हराकर सेमीफाइनल में पहुंच सकता है पाकिस्तान, समझिए पूरा समीकरण


  अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। फिलहाल ऑस्ट्रेलिया सेमीफाइनल में जगह पक्की कर चुका है, जबकि ग्रुप-बी से अब भी तीन टीमें—भारत, इंग्लैंड और पाकिस्तान—दौड़ में बनी हुई हैं। ऐसे में IND vs PAK U19 मुकाबला बेहद अहम हो गया है, क्योंकि इसी मैच से सेमीफाइनल की तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है।

पाकिस्तान अगर भारत को हराता है, तो उसके अंक और नेट रन रेट (NRR) सेमीफाइनल की दौड़ में उसे मजबूत स्थिति में पहुंचा सकते हैं। ऐसी जीत के बाद पाकिस्तान की निगाहें इंग्लैंड के अगले मैच के नतीजे और NRR पर होंगी। अगर इंग्लैंड फिसलता है या पाकिस्तान का NRR बेहतर रहता है, तो पाकिस्तान अंतिम-चार में जगह बना सकता है।

भारत के लिए स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। जीत उसे सीधे सेमीफाइनल के बेहद करीब ले जा सकती है। हार की स्थिति में भी भारत का भविष्य दूसरे मुकाबलों के नतीजों और NRR पर निर्भर करेगा। यानी भारत के लिए भी यह मैच “करो या मरो” जैसा ही है।

इंग्लैंड का एक मैच भी समीकरण बदल सकता है। अगर इंग्लैंड जीत दर्ज करता है और उसका NRR मजबूत रहता है, तो भारत-पाकिस्तान मुकाबले का असर अलग दिशा ले सकता है।

ग्रुप-बी से सेमीफाइनल की रेस पूरी तरह ओपन है। भारत-पाकिस्तान का यह मुकाबला सिर्फ प्रतिष्ठा का नहीं, बल्कि सेमीफाइनल की चाबी भी अपने हाथ में रखता है।

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सर्दियों का देसी स्वाद: लहसुन के पत्तों की चटनी क्यों है सेहत और स्वाद का परफेक्ट मेल


 


 सर्दियों का मौसम आते ही खाने की थाली में देसी और पारंपरिक स्वाद अपने आप जगह बना लेते हैं। इन्हीं में से एक खास और बेहद लोकप्रिय व्यंजन है लहसुन के पत्तों की चटनी। गुनगुनी धूप, ठंडी हवा और साथ में हरे-हरे लहसुन के पत्तों से बनी यह चटनी सिर्फ एक साइड डिश नहीं, बल्कि सर्दियों की पूरी अनुभूति है।

लहसुन के पत्तों की चटनी की सबसे बड़ी खासियत इसकी तीखी खुशबू और सोंधा स्वाद है, जो सादे खाने में भी जान फूंक देता है। बाजरे या मक्के की रोटी, दाल-चावल या साधारण सब्जी—इस चटनी के साथ हर भोजन खास बन जाता है। उत्तर भारत और खासकर ग्रामीण इलाकों में यह चटनी सर्दियों के दिनों में लगभग हर घर में बनाई जाती है।

स्वाद के साथ-साथ यह चटनी सेहत के लिहाज से भी बेहद फायदेमंद मानी जाती है। लहसुन के पत्तों में इम्युनिटी बढ़ाने वाले तत्व, एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो सर्दियों में सर्दी-खांसी और संक्रमण से बचाव में मदद करते हैं। यही वजह है कि बड़े-बुजुर्ग इसे “दवा जैसा खाना” भी कहते हैं।

आज के फास्ट फूड के दौर में लहसुन के पत्तों की चटनी जैसे पारंपरिक स्वाद हमें अपनी जड़ों से जोड़ते हैं। यह चटनी न सिर्फ स्वाद बढ़ाती है, बल्कि सर्दियों की थाली को पूरी तरह से मुकम्मल बना देती है।

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यूपी के लाखों शिक्षकों के लिए योगी सरकार का बड़ा तोहफा, कैबिनेट बैठक में मिली अहम मंजूरी


 उत्तर प्रदेश के लाखों शिक्षकों के लिए योगी सरकार ने बड़ी राहत का ऐलान किया है। हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में शिक्षकों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी देकर सरकार ने उनके लिए नए अवसरों और सुविधाओं का पिटारा खोल दिया है।

कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि मंत्रिमंडल के सामने कुल 32 प्रस्ताव रखे गए थे। इनमें से 30 प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई है। इन फैसलों का सीधा लाभ शिक्षा विभाग और प्रदेश में कार्यरत शिक्षकों को मिलने वाला है।

सरकार के इस कदम को शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और शिक्षकों के हितों को प्राथमिकता देने की दिशा में बड़ा फैसला माना जा रहा है। मंजूर किए गए प्रस्तावों से न केवल शिक्षकों की कार्य स्थितियों में सुधार होगा, बल्कि प्रशासनिक और शैक्षणिक ढांचे को भी मजबूती मिलेगी।

योगी सरकार के इस निर्णय के बाद प्रदेश के शिक्षक वर्ग में सकारात्मक माहौल देखा जा रहा है और उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में शिक्षा क्षेत्र में और भी बड़े सुधार देखने को मिलेंगे।

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14 साल के करियर में हिट्स की झड़ी, ‘बॉर्डर 2’ से वरुण धवन ने बॉक्स ऑफिस पर काटा बवाल


  बॉलीवुड एक्टर वरुण धवन इन दिनों हर तरफ छाए हुए हैं। अपने 14 साल लंबे फिल्मी करियर में उन्होंने एक से बढ़कर एक फिल्में दी हैं और अब उनकी नई फिल्म ‘बॉर्डर 2’ बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त धमाल मचा रही है। फिल्म को दर्शकों का शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है और कमाई के मामले में भी यह लगातार नए रिकॉर्ड की ओर बढ़ रही है।

वरुण धवन ने साल 2012 में ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ से बॉलीवुड में कदम रखा था। इसके बाद उन्होंने ‘मैं तेरा हीरो’, ‘हम्प्टी शर्मा की दुल्हनिया’, ‘बद्रीनाथ की दुल्हनिया’, ‘जुड़वा 2’ और ‘ABCD 2’ जैसी कई सुपरहिट फिल्में दीं। उनकी फिल्मों ने यूथ के साथ-साथ फैमिली ऑडियंस को भी खूब एंटरटेन किया।

हालांकि करियर में उतार-चढ़ाव भी आए। ‘कलंक’ और ‘भेड़िया’ जैसी कुछ फिल्मों से उम्मीद के मुताबिक बॉक्स ऑफिस कलेक्शन नहीं मिला, लेकिन वरुण की लोकप्रियता पर इसका खास असर नहीं पड़ा। उन्होंने हर बार खुद को नए अवतार में पेश करने की कोशिश की।

अब ‘बॉर्डर 2’ के जरिए वरुण धवन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे सिर्फ रोमांटिक या कॉमेडी ही नहीं, बल्कि देशभक्ति और गंभीर किरदारों में भी दमदार परफॉर्मेंस दे सकते हैं। फिल्म की ओपनिंग से लेकर वीकेंड कलेक्शन तक आंकड़े मजबूत बने हुए हैं।

कुल मिलाकर, वरुण धवन का करियर इस वक्त एक बार फिर पीक मोड में नजर आ रहा है और ‘बॉर्डर 2’ उनकी हिट लिस्ट में एक और बड़ा नाम जोड़ती दिख रही है।

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जयपुर में सर्व किन्नर समाज की एकजुट आवाज़, भाईचारे और समरसता की परंपरा की रक्षा का संकल्प


  राजस्थान की सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा हमेशा से आपसी भाईचारे, समरसता और विविधता के सम्मान की प्रतीक रही है। इसी विरासत को मजबूत बनाए रखने के उद्देश्य से बुधवार को राजधानी जयपुर में सर्व किन्नर समाज एकजुट होकर सड़कों पर उतरा और अपनी आवाज़ बुलंद की।

किन्नर समाज के प्रतिनिधियों ने शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होकर सामाजिक सौहार्द, सम्मान और समान अधिकारों की बात कही। उनका कहना था कि राजस्थान की पहचान गंगा-जमुनी तहज़ीब और आपसी स्वीकार्यता से बनी है, जिसे किसी भी हाल में कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने समाज में फैली गलत धारणाओं और भेदभाव पर चिंता जताई और सरकार व समाज से किन्नर समुदाय को सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा और समान अवसर देने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए है।

इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि राजस्थान की धरती पर भाईचारा और समरसता सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि जीने की परंपरा है—जिसे हर वर्ग मिलकर आगे बढ़ाएगा।Hashtags

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आ रहा वंदे भारत स्लीपर का ‘बाप’, रेलवे बनाएगी खास सुपर ट्रेन, लुक होगा तेजस-राजधानी जैसा


  देश के रेल यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की जबरदस्त लोकप्रियता को देखते हुए भारतीय रेलवे अब इसे और भी विशाल और दमदार बनाने जा रही है। गुवाहाटी से हावड़ा के बीच चल रही देश की पहली सेमी-हाईस्पीड स्लीपर वंदे भारत को यात्रियों से शानदार रिस्पॉन्स मिला है। बुकिंग खुलते ही कुछ ही घंटों में ट्रेन फुल हो जाना इस बात का सबूत है।

इसी बढ़ती मांग को देखते हुए रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है। अब तक 16 कोच वाली वंदे भारत स्लीपर को जल्द ही 24 कोच की ट्रेन में बदला जाएगा। इसका सीधा फायदा यात्रियों को मिलेगा, क्योंकि ज्यादा सीटें जुड़ने से कंफर्म टिकट मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।

रेल मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, वंदे भारत स्लीपर के संचालन के महज 10 दिनों के भीतर इसकी क्षमता बढ़ाने का फैसला कर लिया गया, जो इसकी सफलता को दर्शाता है। रेलवे का मकसद ज्यादा से ज्यादा यात्रियों को आधुनिक सुविधाओं के साथ तेज़, आरामदायक और सुरक्षित यात्रा का अनुभव देना है।

नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का लुक तेजस और राजधानी एक्सप्रेस जैसा प्रीमियम होगा, जबकि सुविधाओं के मामले में इसे ‘रेलवे का पुष्पक विमान’ कहा जा रहा है। इसमें आरामदायक स्लीपर बर्थ, आधुनिक इंटीरियर, बेहतर सस्पेंशन और हाई-स्पीड सफर का शानदार मेल मिलेगा।

रेलवे संकेत दे चुका है कि आने वाले समय में ऐसी और भी हाई-कैपेसिटी, प्रीमियम स्लीपर ट्रेनों की शुरुआत की जा सकती है। यानी वंदे भारत स्लीपर अब सिर्फ ट्रेन नहीं, बल्कि लंबी दूरी की यात्रा का नया स्टैंडर्ड बनने जा रही है।

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भारत ने कैसे बचाई थी एक विदेशी राष्ट्रपति की जान? ऑपरेशन कैक्टस की साहसिक कहानी


 साल 1988 में भारत ने अपनी सैन्य ताकत और तेज़ फैसले से मालदीव के तत्कालीन राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम की जान बचाई थी। यह ऐतिहासिक सैन्य अभियान ऑपरेशन कैक्टस (Operation Cactus) के नाम से जाना जाता है, जिसे आज भी भारत की सबसे सफल विदेशी सैन्य कार्रवाइयों में गिना जाता है।

दरअसल, नवंबर 1988 में मालदीव की राजधानी माले में तख्तापलट की साजिश रची गई थी। श्रीलंका के उग्रवादी संगठन PLOTE से जुड़े भाड़े के सैनिकों ने अचानक हमला कर एयरपोर्ट, सरकारी इमारतों और रेडियो स्टेशन पर कब्जा कर लिया। राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम को मारने या बंदी बनाने की योजना थी, लेकिन वे किसी तरह छिपकर अपनी जान बचाने में सफल रहे।

हालात बेकाबू होते देख राष्ट्रपति गयूम ने सीधे भारत से मदद मांगी। उस समय भारत के प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे। उन्होंने बिना किसी देरी के तुरंत सैन्य कार्रवाई का आदेश दिया। भारतीय वायुसेना के IL-76 विमान से पैरा कमांडो को रातों-रात माले भेजा गया।

भारतीय सैनिकों ने लैंड करते ही एयरपोर्ट को अपने कब्जे में लिया और दुश्मनों के बीच से रास्ता बनाते हुए राष्ट्रपति तक पहुंचे। कुछ ही घंटों में विद्रोहियों को काबू में कर लिया गया और राष्ट्रपति को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। पूरा ऑपरेशन 24 घंटे से भी कम समय में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया।

ऑपरेशन कैक्टस ने न सिर्फ मालदीव की लोकतांत्रिक सरकार को बचाया, बल्कि भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में एक जिम्मेदार और ताकतवर शक्ति के रूप में स्थापित किया।

साध्वी प्रेम बाईसा की मौत कैसे हुई, कौन थीं यह कथावाचक और क्या है पूरा मामला?


  राजस्थान के जोधपुर से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। प्रसिद्ध कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। यह घटना ऐसे समय पर हुई है, जब कुछ महीने पहले उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होकर बड़े विवाद की वजह बना था। साध्वी प्रेम बाईसा को जोधपुर स्थित उनके आरती नगर आश्रम से गंभीर हालत में प्रेक्षा अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित करते हुए मृत बताया।

मौत के बाद मामला तब और रहस्यमयी हो गया, जब उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से एक पोस्ट सामने आई। इस पोस्ट में लिखा था—
“जीते जी नहीं, जाने के बाद मिलेगा न्याय।”
इस संदेश ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि दावा किया जा रहा है कि यह पोस्ट उनकी मौत के बाद अपलोड की गई। इसी बिंदु पर पुलिस की जांच अब केंद्रित है।

साध्वी प्रेम बाईसा धार्मिक कथाओं और प्रवचनों के लिए जानी जाती थीं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनके प्रवचनों से जुड़े हुए थे। कुछ समय पहले वायरल हुए वीडियो को लेकर वे मानसिक दबाव में थीं—ऐसी चर्चाएं भी सामने आ रही हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। परिवार और समर्थकों की ओर से हाई लेवल जांच की मांग की जा रही है। साध्वी की मौत ने धार्मिक और सामाजिक जगत में हलचल मचा दी है और सभी की नजरें अब जांच के नतीजों पर टिकी हैं।#SadhviPremBaisa #PremBaisaDeath #JodhpurNews #SadhviDeathMystery #ReligiousNews #ViralVideoCase #RajasthanNews #BreakingNews

अजित पवार के बहाने मोदी-विरोध की राजनीति, क्या लाशों पर सियासत ही विपक्ष का नया हथियार बन गई है?


  बारामती एयरपोर्ट पर हुए दर्दनाक विमान हादसे में एनसीपी नेता अजित पवार की असमय मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में यह एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई संभव नहीं। ऐसे समय में उम्मीद थी कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर हर दल शोक संतप्त परिवार के साथ खड़ा होगा। लेकिन अफसोस, इस त्रासदी को भी राजनीतिक हथियार बना लिया गया।

विपक्षी खेमे के कुछ बड़े नेताओं ने बिना किसी ठोस सबूत के इस हादसे को “साजिश” करार देना शुरू कर दिया। ममता बनर्जी और मल्लिकार्जुन खरगे ने सीधे-सीधे केंद्र सरकार पर संदेह जताते हुए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग कर दी। सवाल यह नहीं है कि जांच हो या नहीं—जांच हर हादसे में होती है। सवाल यह है कि शोक की घड़ी में शक और आरोपों की राजनीति क्यों?

दिलचस्प बात यह है कि अजित पवार के अपने चाचा और वरिष्ठ नेता शरद पवार ने इस घटना को एक दुखद दुर्घटना बताते हुए साफ कहा है कि इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। जब परिवार का सबसे अनुभवी नेता संयम और संवेदना की बात कर रहा है, तब विपक्ष का एक वर्ग इस त्रासदी को मोदी-विरोध की स्क्रिप्ट में क्यों ढाल रहा है?

यह पहली बार नहीं है जब किसी हादसे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया हो। लेकिन सवाल यह है कि क्या अब विपक्ष के पास लाशों पर राजनीति के अलावा कोई नैतिक रास्ता नहीं बचा? जनता सब देख रही है और शायद अब फैसला भी वही करेगी—कि संवेदना बड़ी है या सियासत

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