Sunday, 1 February 2026

छठी पीढ़ी के फाइटर जेट की तस्वीरें सामने लाया चीन, अमेरिकी F-35 से कितना आगे है नया लड़ाकू विमान?


  बीजिंग. चीन ने दुनिया के पहले छठी पीढ़ी के फाइटर जेट को लेकर बड़ा दावा करते हुए इसकी संभावित तस्वीरें सामने आने की बात कही है. इस फाइटर जेट को पश्चिमी और यूरोपीय रक्षा विशेषज्ञ J-36 या J-XX के नाम से पहचान रहे हैं. माना जा रहा है कि यह चीन का अब तक का सबसे उन्नत और खतरनाक लड़ाकू विमान हो सकता है, जो अमेरिका के F-35 जैसे स्टेल्थ फाइटर जेट को कड़ी चुनौती देने की क्षमता रखता है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह छठी पीढ़ी का फाइटर जेट स्टेल्थ टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हाइपरसोनिक हथियारों और अत्याधुनिक सेंसर सिस्टम से लैस हो सकता है. जानकारों का मानना है कि इसमें बिना पायलट और पायलट के साथ उड़ान भरने की क्षमता (Optional Manned Capability) भी हो सकती है, जो इसे पारंपरिक फाइटर जेट्स से कहीं आगे ले जाती है.

इस जेट की अनुमानित रेंज 8,000 किलोमीटर से अधिक बताई जा रही है, जिससे यह लंबी दूरी तक बिना रिफ्यूलिंग के मिशन को अंजाम दे सकता है. अगर यह आंकड़े सही साबित होते हैं, तो यह अमेरिकी F-35 से कहीं ज्यादा लंबी मारक क्षमता वाला विमान होगा. इसके अलावा, इसमें नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर और ड्रोन कंट्रोल जैसी क्षमताएं भी शामिल होने की उम्मीद है.

हालांकि, चीन ने अभी तक इस फाइटर जेट की आधिकारिक तकनीकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है. रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह तस्वीरें और दावे चीन की सैन्य ताकत का प्रदर्शन हो सकते हैं. फिर भी, अगर यह प्रोजेक्ट पूरी तरह सफल होता है, तो वैश्विक सैन्य संतुलन पर इसका गहरा असर पड़ सकता है और अमेरिका समेत कई देशों की चिंता बढ़ना तय माना जा रहा है.

एपस्टीन फाइल्स में पीएम मोदी को लेकर किए गए दावों पर विदेश मंत्रालय की कड़ी प्रतिक्रिया, कहा- पूरी तरह बेबुनियाद


 नई दिल्ली. एपस्टीन फाइल्स को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से जोड़े जा रहे दावों पर भारत सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है. विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह निराधार और बकवास बताया है. मंत्रालय का कहना है कि ऐसे दावों को गंभीरता से लेने की कोई जरूरत नहीं है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जैसवाल ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि एपस्टीन फाइल्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर किए गए सभी दावे पूरी तरह झूठे और मनगढ़ंत हैं. उन्होंने कहा कि इस तरह की अफवाहों का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है और इन्हें नजरअंदाज करना ही सबसे बेहतर विकल्प है.

प्रवक्ता ने यह भी संकेत दिया कि इस तरह के दावे अक्सर बिना किसी प्रमाण के फैलाए जाते हैं, जिनका मकसद केवल भ्रम और सनसनी पैदा करना होता है. सरकार ऐसे निराधार आरोपों को तवज्जो नहीं देती और न ही इन्हें किसी तरह की विश्वसनीयता प्राप्त है.

विदेश मंत्रालय के इस बयान के बाद साफ हो गया है कि भारत सरकार एपस्टीन फाइल्स से जुड़े इन दावों को पूरी तरह खारिज करती है. विशेषज्ञों का भी मानना है कि बिना पुख्ता सबूत के किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को जोड़ना गैर-जिम्मेदाराना है.

सरकार की ओर से आए इस स्पष्ट बयान के बाद उम्मीद की जा रही है कि इस मुद्दे पर फैल रही अफवाहों पर विराम लगेगा और तथ्यहीन चर्चाओं को हवा नहीं मिलेगी.

पंजाब कांग्रेस को बड़ा झटका, नवजोत कौर सिद्धू ने छोड़ी पार्टी, प्रदेश नेतृत्व पर लगाए गंभीर आरोप


   पंजाब कांग्रेस को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी की वरिष्ठ नेता नवजोत कौर सिद्धू ने कांग्रेस छोड़ने का ऐलान कर दिया. पार्टी से इस्तीफा देने के बाद नवजोत कौर सिद्धू ने प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व पर खुलकर निशाना साधा और कई गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष का कार्यकाल कांग्रेस के इतिहास में सबसे ज्यादा विवादित और भ्रष्ट रहा है.

नवजोत कौर सिद्धू ने आरोप लगाया कि पार्टी में अब विचारधारा और ईमानदारी के लिए कोई जगह नहीं बची है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस संगठन में जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है, जबकि चंद लोगों के इशारे पर फैसले लिए जा रहे हैं. इसी वजह से उन्होंने पार्टी छोड़ने का कठिन फैसला लिया.

उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष राजा वडिंग पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में पार्टी का जनाधार लगातार कमजोर हुआ है. नवजोत कौर सिद्धू का कहना है कि कांग्रेस अब उस रास्ते से भटक चुकी है, जिसके लिए वह जानी जाती थी. उन्होंने यह भी दावा किया कि पार्टी के अंदर भ्रष्टाचार और गुटबाजी चरम पर है.

हालांकि, नवजोत कौर सिद्धू ने यह साफ नहीं किया है कि वह आगे किस राजनीतिक दल से जुड़ेंगी या सक्रिय राजनीति में बनी रहेंगी या नहीं. उनके इस फैसले के बाद पंजाब की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और कांग्रेस के भीतर अंदरूनी कलह एक बार फिर सामने आ गई है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नवजोत कौर सिद्धू का कांग्रेस छोड़ना पार्टी के लिए आगामी चुनावों से पहले नुकसानदायक साबित हो सकता है. वहीं कांग्रेस नेतृत्व की ओर से अभी तक इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

रेकी से अपहरण तक की पूरी साजिश बेनकाब, 13 दिन बाद सुलझा कैरव गांधी किडनैपिंग केस


  जमशेदपुर. झारखंड के जमशेदपुर में हुए कैरव गांधी अपहरण कांड का पुलिस ने 13 दिन बाद बड़ा खुलासा किया है. 13 जनवरी को बिष्टुपुर इलाके से उद्योगपति देवांग गांधी के बेटे कैरव गांधी के अपहरण की सनसनीखेज घटना को अंजाम दिया गया था. अब पुलिस ने बिहार के अलग-अलग जिलों से इस मामले में शामिल छह आरोपियों को गिरफ्तार कर पूरी साजिश का पर्दाफाश किया है.

पुलिस के अनुसार, अपहरण की योजना कई महीने पहले ही बना ली गई थी. अक्टूबर से ही आरोपियों द्वारा कैरव गांधी की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी और उनकी नियमित रेकी की जा रही थी. योजना को अंतिम रूप देने के बाद 13 जनवरी को अपहरण की वारदात को अंजाम दिया गया. मामले की जांच के दौरान पुलिस ने बिहार के गया, नालंदा और पटना से छह अपराधियों को गिरफ्तार किया.

गिरफ्तार आरोपियों के पास से दो पिस्टल, छह जिंदा कारतूस और अपहरण में इस्तेमाल की गई स्कॉर्पियो कार भी बरामद की गई है. पुलिस का कहना है कि यह एक संगठित बिहार-झारखंड गिरोह था, जिसमें स्थानीय नेटवर्क की भी भूमिका सामने आ रही है. अन्य फरार आरोपियों और स्थानीय सहयोगियों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है.

एसएसपी पीयूष पांडे ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में नालंदा, गया और पटना के रहने वाले अपराधी शामिल हैं, जो पहले से आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहे हैं. पुलिस का दावा है कि जल्द ही इस गिरोह के बाकी सदस्यों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा. इस कार्रवाई के बाद शहरवासियों ने राहत की सांस ली है.

कैंसर, डायबिटीज और ऑटोइम्यून बीमारियों के इलाज पर राहत, बजट में दवाएं सस्ती करने का बड़ा ऐलान


 


  नई दिल्ली. आम लोगों को बड़ी राहत देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में हेल्थ सेक्टर के लिए अहम घोषणाएं की हैं. सरकार ने कैंसर, डायबिटीज और ऑटोइम्यून बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली जरूरी दवाओं को सस्ता करने का फैसला किया है. इस कदम से करोड़ों मरीजों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है.

बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने बताया कि इन गंभीर बीमारियों की जीवनरक्षक दवाओं पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी और अन्य करों में बड़ी कटौती की जाएगी. इससे दवाओं की कीमतों में कमी आएगी और इलाज आम लोगों की पहुंच में होगा. खासतौर पर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए यह फैसला राहत भरा माना जा रहा है.

देश में डायबिटीज के मरीजों की संख्या 10 करोड़ से अधिक है, जबकि हर साल करीब 14 लाख नए कैंसर मरीज सामने आते हैं. वहीं ऑटोइम्यून बीमारियों से पीड़ित लोगों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में दवाओं की ऊंची कीमतें लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई थीं. सरकार के इस फैसले से इलाज का आर्थिक बोझ काफी हद तक कम होने की उम्मीद है.

वित्त मंत्री ने यह भी साफ किया कि सरकार का लक्ष्य भारत को एक मजबूत फार्मास्युटिकल हब के रूप में विकसित करना है, ताकि देश में किफायती और गुणवत्तापूर्ण दवाओं का उत्पादन बढ़ाया जा सके. विशेषज्ञों का मानना है कि टैक्स में कटौती से न केवल मरीजों को राहत मिलेगी, बल्कि हेल्थकेयर सिस्टम में दवाओं की उपलब्धता भी बेहतर होगी.

सेमीकंडक्टर का ग्लोबल हब बनने की ओर भारत, बजट में मिशन 2.0 का ऐलान, 40 हजार करोड़ का निवेश


 नई दिल्ली. भारत को सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को पेश बजट 2026-27 में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 शुरू करने का ऐलान किया. इस मिशन के तहत सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को मजबूती देने के लिए कुल आवंटन राशि को बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है.

सरकार का यह कदम भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन में मजबूत स्थान दिलाने की रणनीति का हिस्सा है. ISM 2.0, पहले चरण यानी ISM 1.0 की उपलब्धियों पर आधारित होगा. ISM 1.0 के तहत देश में सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन, पैकेजिंग और डिजाइन को बढ़ावा मिला, जिससे इस सेक्टर में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा हुए.

अब मिशन 2.0 के जरिए सरकार का फोकस केवल असेंबली और टेस्टिंग तक सीमित नहीं रहेगा. नई योजना के तहत उपकरण, मटेरियल, चिप डिजाइन और फुल-स्टैक भारतीय इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी के विकास पर जोर दिया जाएगा. इससे भारत में एक मजबूत और आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करने में मदद मिलेगी.

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बड़े निवेश से भारत में विदेशी कंपनियों का भरोसा बढ़ेगा और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को नई गति मिलेगी. साथ ही, यह पहल मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसे अभियानों को भी मजबूती प्रदान करेगी. सरकार के इस कदम से भारत के सेमीकंडक्टर हब बनने की राह और आसान होती दिख रही है.

आसान रोल को कह देते हैं ‘ना’, लियोनार्डो डिकैप्रियो से शाहिद कपूर ने सीखी एक्टिंग की ये खास सीख.’


  नई दिल्ली. बॉलीवुड अभिनेता शाहिद कपूर आज उन कलाकारों में शुमार हैं, जो हर फिल्म के साथ खुद को नए सिरे से साबित करने की कोशिश करते हैं. उड़ता पंजाब, कमीने और कबीर सिंह जैसी फिल्मों में उनके दमदार अभिनय ने यह साबित किया है कि वह जोखिम लेने से नहीं डरते. हाल ही में शाहिद कपूर ने खुलासा किया कि उनके किरदारों के चयन की सोच में बड़ा बदलाव हॉलीवुड सुपरस्टार लियोनार्डो डिकैप्रियो की एक सीख से आया है.

एक पॉडकास्ट बातचीत के दौरान शाहिद ने बताया कि उन्होंने लियोनार्डो डिकैप्रियो का एक पुराना इंटरव्यू पढ़ा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर किसी किरदार को पढ़ते ही यह समझ आ जाए कि उसे कैसे निभाना है, तो वह उस फिल्म को मना कर देते हैं. ऐसा इसलिए, क्योंकि ऐसे रोल उनके कम्फर्ट जोन में होते हैं. शाहिद के मुताबिक, यही सोच उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित कर गई.

शाहिद ने कहा कि अब वह वही किरदार चुनते हैं, जो उन्हें असहज करते हैं और जिनमें खुद को तलाशने की गुंजाइश हो. उन्होंने बताया कि किसी भी कलाकार के लिए असली चुनौती एक ही जॉनर में रहते हुए भी हर बार कुछ नया करना होती है. यही वजह है कि उन्होंने निर्देशक विशाल भारद्वाज की आने वाली फिल्म ‘ओ रोमियो’ के लिए हामी भरी.

शाहिद कपूर ने यह भी कहा कि विशाल भारद्वाज के साथ उनका रिश्ता रचनात्मक विश्वास पर आधारित है, जहां उन्हें हर बार अलग सोचने और अपने अभिनय की सीमाओं को आगे बढ़ाने का मौका मिलता है. यही प्रयोगधर्मिता उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाती है.

Saturday, 31 January 2026

30 लाख दस्तावेजों में बिल गेट्स से जुड़े चौंकाने वाले दावे, ईमेल्स ने बढ़ाई हलचल


  अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस (DOJ) की ओर से जारी की गई जेफ्री एपस्टीन केस से जुड़ी 30 लाख से अधिक नई फाइलों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। इन दस्तावेजों में दुनिया के बड़े उद्योगपतियों और प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आए हैं। इन्हीं में माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स को लेकर भी गंभीर दावे किए गए हैं।

जारी फाइलों में जिन ईमेल्स का उल्लेख है, उनके मुताबिक एपस्टीन और बिल गेट्स के बीच संवाद हुआ था। इन ईमेल्स में गेट्स से जुड़ी निजी जानकारियों का जिक्र बताया जा रहा है, जिसमें कथित तौर पर उनके निजी संबंधों और स्वास्थ्य से जुड़े दावे शामिल हैं। दस्तावेजों के अनुसार, एपस्टीन ने एक आंतरिक ईमेल में दावा किया था कि गेट्स ने उनसे कुछ संवेदनशील ईमेल हटाने का अनुरोध किया था।

फाइलों में यह भी कहा गया है कि जुलाई 2013 के आसपास, जब गेट्स ने एपस्टीन से दूरी बनानी शुरू की, उसी दौरान एपस्टीन ने अपने एक ईमेल में नाराजगी जाहिर की और कुछ कथित राजों का जिक्र किया। इन दावों में विदेशी महिलाओं और निजी संबंधों से जुड़े संदर्भ भी शामिल बताए गए हैं।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इन दस्तावेजों में किए गए दावे अभी आरोपों के स्तर पर हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। न ही इस मामले में बिल गेट्स की ओर से किसी नए आधिकारिक बयान की पुष्टि सामने आई है। DOJ द्वारा जारी फाइलों को लेकर जांच और कानूनी समीक्षा जारी है, जिसके बाद ही इन दावों की वास्तविकता स्पष्ट हो पाएगी।

साध्वी प्रेम बाईसा की मौत के बाद डेक्सोना इंजेक्शन पर उठे सवाल, जानिए क्या है इसकी सच्चाई


 साध्वी प्रेम बाईसा की अचानक हुई मौत के बाद DEXONA इंजेक्शन चर्चा और सवालों के घेरे में आ गया है। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि इंजेक्शन लगते ही उनकी मौत हो गई, वहीं एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। हालांकि मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले तथ्यों और जांच रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी है।

DEXONA इंजेक्शन, जिसका जेनेरिक नाम Dexamethasone है, एक शक्तिशाली स्टेरॉइड दवा है। इसका इस्तेमाल शरीर में तेज सूजन, गंभीर एलर्जी, दमा के अटैक, ऑटोइम्यून बीमारियों, ब्रेन सूजन, शॉक और कुछ गंभीर संक्रमणों में किया जाता है। सही मरीज और सही डोज़ में यह दवा जान बचाने में अहम भूमिका निभाती है।

हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि गलत इस्तेमाल या बिना डॉक्टर की सलाह DEXONA लेना खतरनाक हो सकता है। खासतौर पर अगर मरीज को पहले से शुगर, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट की बीमारी या कोई गंभीर संक्रमण हो, तो इसके दुष्प्रभाव जानलेवा साबित हो सकते हैं। इसके साइड इफेक्ट्स में ब्लड शुगर का अचानक बढ़ना, बीपी असंतुलन, इम्यून सिस्टम कमजोर होना और हार्ट से जुड़ी दिक्कतें शामिल हैं।

फिलहाल साध्वी प्रेम बाईसा की मौत का वास्तविक कारण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और मेडिकल जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी एक इंजेक्शन को मौत का कारण बताना जल्दबाजी होगी। यह मामला एक बार फिर यह चेतावनी देता है कि स्टेरॉइड इंजेक्शन का उपयोग केवल डॉक्टर की निगरानी में ही किया जाना चाहिए

आयुर्वेदिक औषधियों में सबसे ज्यादा छेड़छाड़ च्यवनप्राश के साथ, मूल स्वरूप से दूर होता जा रहा है बाजारू उत्पाद


 नई दिल्ली: आयुर्वेद में च्यवनप्राश को एक संपूर्ण रसायन औषधि माना गया है, जिसका उल्लेख प्राचीन ग्रंथ चरक संहिता में मिलता है। खासकर सर्दियों के मौसम में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए इसका सेवन सदियों से किया जाता रहा है। लेकिन समय के साथ बाजार में मिलने वाले च्यवनप्राश के स्वरूप में व्यापक बदलाव और छेड़छाड़ देखने को मिल रही है।

आयुर्वेदाचार्यों का कहना है कि आज बाजार में उपलब्ध अधिकांश च्यवनप्राश अपने मूल आयुर्वेदिक स्वरूप से काफी दूर हो चुके हैं। पारंपरिक च्यवनप्राश में आंवला, दशमूल, अश्वगंधा, पिप्पली, शतावरी, गिलोय समेत दर्जनों जड़ी-बूटियों का संतुलित मिश्रण होता है। वहीं आजकल के उत्पादों में स्वाद और मार्केटिंग के लिए चीनी, फ्लेवर और प्रिज़र्वेटिव्स की मात्रा बढ़ा दी गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, आयुर्वेदिक औषधियों में सबसे ज्यादा प्रयोग और बदलाव च्यवनप्राश के साथ ही हुआ है। इसके कारण इसके औषधीय गुणों पर भी असर पड़ता है। कई बार लोग यह समझ ही नहीं पाते कि वे जिस च्यवनप्राश का सेवन कर रहे हैं, वह आयुर्वेदिक है या सिर्फ एक हेल्थ सप्लीमेंट।

आयुर्वेदाचार्य सलाह देते हैं कि यदि संभव हो तो चरक संहिता में वर्णित विधि के अनुसार घर पर च्यवनप्राश बनाना सबसे बेहतर विकल्प है। घर पर बनाया गया च्यवनप्राश न केवल शुद्ध होता है, बल्कि शरीर को शक्ति, ऊर्जा और रोगों से लड़ने की क्षमता भी प्रदान करता है।

 

TRP गेम में ‘नागिन’ ने मारी बाज़ी, ‘तारक मेहता’ टॉप 10 से बाहर


 


 नई दिल्ली: टीवी के टीआरपी चार्ट में इस हफ्ते बड़ा बदलाव देखने को मिला है. एकता कपूर के सुपरनेचुरल शो ‘नागिन’ ने नंबर 1 की पोज़िशन पर कब्जा कर लिया है और दर्शकों का जबरदस्त प्यार पा रहा है.

प्रियंका चहर चौधरी और ईशा सिंह स्टारर यह शो, ‘सास भी कभी बहू थी’ और ‘अनुपमा’ को पीछे छोड़ते हुए सबसे ऊपर आ गया है. इस बार की रेटिंग से कई पुराने शो चौकन्ने रह गए, जिसमें लंबे समय से चल रहा ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ भी शामिल है. यह लोकप्रिय कॉमेडी शो अब 12वें नंबर पर खिसक गया और टॉप 10 से बाहर हो गया.

टीआरपी चार्ट में इस हफ्ते स्थिति इस प्रकार रही:

टीआरपी की इस नई रेस ने साबित कर दिया कि सुपरनेचुरल और रोमांच से भरपूर कंटेंट अभी भी दर्शकों का सबसे पसंदीदा विकल्प है.

अनन्या पांडे-लक्ष्य की ‘चांद मेरा दिल’ की रिलीज़ तय, सामने आया बड़ा अपडेट


 


 नई दिल्ली: धर्मा प्रोडक्शंस की रोमांटिक ड्रामा फिल्म ‘चांद मेरा दिल’ के फैन्स के लिए बड़ी खबर सामने आई है. ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने जानकारी दी है कि फिल्म 8 मई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी.

फिल्म में अनन्या पांडे और लक्ष्य मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे. इसका निर्देशन विवेक सोनी ने किया है और निर्माता करण जौहर हैं. तरण आदर्श ने  बताया कि यह फिल्म एक इंटेंस और म्यूजिकल लव स्टोरी है.

‘चांद मेरा दिल’ लक्ष्य के करियर की अगली बड़ी रिलीज मानी जा रही है. लक्ष्य ने साल 2023 में एक्शन फिल्म ‘किल’ से फीचर डेब्यू किया था, जिसे दर्शकों और क्रिटिक्स दोनों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी. इसके अलावा, वह हाल ही में आर्यन खान की वेब सीरीज ‘द बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ में भी नजर आए, जिससे उनकी पहचान और मजबूत हुई.

फिल्म का ऐलान साल 2024 में हुआ था, और पहले खबरें थीं कि इसे 2025 में रिलीज़ किया जाएगा. लेकिन अब तय हो गया है कि इस साल मई में दर्शक इसे बड़े पर्दे पर देख सकेंगे.

सलमान खान से पंगा पड़ा भारी, अभिनव कश्यप पर मानहानि केस, कोर्ट ने लगाई बयानबाजी पर रोक


 नई दिल्ली: ‘दबंग’ के डायरेक्टर अभिनव कश्यप के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं. उन्होंने सलमान खान और उनके परिवार को लेकर सार्वजनिक तौर पर कई आरोप लगाए थे, अब भाईजान ने उन पर मानहानि का केस दर्ज करवा दिया है.

कोर्ट ने अभिनव कश्यप को आदेश दिया है कि वे सलमान खान और उनके परिवार के खिलाफ कोई भी बयान सार्वजनिक रूप से न दें. अभिनव ने पहले दावा किया था कि सलमान खान ने उन्हें ‘दबंग’ फ्रेंचाइजी की दूसरी फिल्म से बाहर करवा दिया, जिससे उनका करियर प्रभावित हुआ. उन्होंने कई बार खुलासा किया था कि इस कारण उन्हें इंडस्ट्री में काम नहीं मिल रहा.

सलमान खान के वकीलों ने कोर्ट में कहा कि अभिनव के बयान उनके प्रतिष्ठा और छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं, इसलिए उन्हें रोकना जरूरी है. अदालत ने भी इस मामले में स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं, ताकि सार्वजनिक बयानबाजी से और नुकसान न हो.

अब अभिनव कश्यप के लिए यह मामला सिर्फ कानूनी लड़ाई बनकर रह गया है, और वे किसी भी तरह का विवादास्पद बयान देने से बचेंगे.