Saturday, 14 February 2026

महाशिवरात्रि 2026 से पहले जानें रहस्य: क्यों शिव पूजा में वर्जित माना जाता है केतकी का फूल?


 ऋषिकेश में महाशिवरात्रि की तैयारियों के बीच शिव भक्तों के बीच पूजा-विधि और धार्मिक मान्यताओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस पर्व को भगवान शिव की आराधना का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है, जब श्रद्धालु व्रत, जलाभिषेक और विशेष पूजन के जरिए आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। मान्यता है कि जहां कुछ फूल भगवान शिव को अत्यंत प्रिय हैं, वहीं केतकी का फूल अर्पित करना वर्जित माना जाता है।

महंत रामेश्वर गिरी ने बताया कि इसके पीछे एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा जुड़ी हुई है। कथा के अनुसार एक बार भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हो गया। तभी भगवान शिव एक अनंत अग्नि स्तंभ यानी दिव्य ज्योति के रूप में प्रकट हुए और दोनों देवताओं से उसके आदि और अंत का पता लगाने को कहा।

मान्यता है कि ब्रह्मा जी ने केतकी फूल को झूठी गवाही देने के लिए प्रेरित किया, जिससे भगवान शिव नाराज़ हो गए और केतकी को अपनी पूजा में वर्जित घोषित कर दिया। तभी से शिव पूजा में इस फूल का प्रयोग नहीं किया जाता।

धार्मिक जानकारों का कहना है कि महाशिवरात्रि पर पूजा करते समय सही विधि और मान्यताओं का पालन करना आवश्यक है, ताकि श्रद्धालु पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त कर सकें।

नोएडा में सियासी संग्राम तेज: भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने मिशन-2027 के लिए भरी हुंकार


  उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की आहट के साथ सियासी हलचल तेज हो गई है और चुनावी रणभूमि के तौर पर गौतमबुद्ध नगर उभर कर सामने आया है। कभी ‘अशुभ’ माने जाने वाले इस इलाके में अब बड़ी रैलियों और शक्ति प्रदर्शन की तैयारी जोरों पर है, जिससे आने वाले चुनाव की दिशा तय होने की उम्मीद जताई जा रही है।

सत्तारूढ़ दल विकास के एजेंडे के साथ मैदान में उतर चुका है। 21 फरवरी को औद्योगिक परियोजनाओं और सेमीकंडक्टर यूनिट के शिलान्यास कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव शामिल होंगे, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्चुअल संबोधन की भी तैयारी है। इसके साथ ही जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा को लेकर भी बड़े कार्यक्रम प्रस्तावित हैं, जिन्हें पश्चिमी यूपी की राजनीति में गेम-चेंजर माना जा रहा है।

वहीं विपक्ष भी पीछे नहीं है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव 29 मार्च को ‘PDA भाईचारा रैली’ के जरिए शक्ति प्रदर्शन करेंगे और क्षेत्र में राजनीतिक संदेश देने की तैयारी में हैं। दूसरी ओर बसपा भी मार्च में बड़ी रैली आयोजित कर अपने संगठनात्मक दमखम का प्रदर्शन करना चाहती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आर्थिक रूप से अहम इस क्षेत्र से शुरू हुआ चुनावी अभियान प्रदेश की सत्ता की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आने वाले महीनों में यहां होने वाली रैलियां और विकास परियोजनाएं मिशन-2027 की रणनीति का केंद्र बनती नजर आ रही हैं।

प्रत्यर्पण पर टिकी निगाहें: कानूनी प्रक्रिया और कूटनीति तय करेंगी दोनों देशों के रिश्तों की दिशा


 प्रत्यर्पण को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मामले में लिया जाने वाला अंतिम निर्णय पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया, द्विपक्षीय समझौतों और कूटनीतिक वार्ताओं पर आधारित होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रत्यर्पण केवल न्यायिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों और रणनीतिक हितों से भी गहराई से जुड़ा होता है।

विश्लेषकों का कहना है कि किसी भी देश द्वारा प्रत्यर्पण को मंजूरी देने से पहले अदालतों की राय, मौजूदा संधियों के प्रावधान और राजनीतिक हालातों का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन किया जाता है। इस प्रक्रिया में समय लगना स्वाभाविक है, क्योंकि दोनों देशों की सरकारें अपने-अपने कानूनी और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए फैसला करती हैं।

कूटनीतिक स्तर पर भी यह मामला बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। जानकारों के अनुसार, प्रत्यर्पण पर लिया गया निर्णय भविष्य में दोनों देशों के आपसी संबंधों, व्यापारिक सहयोग और राजनीतिक विश्वास को प्रभावित कर सकता है। यदि फैसला सकारात्मक और संतुलित तरीके से लिया जाता है, तो इससे सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं। वहीं, किसी भी तरह की असहमति या विवाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव भी पैदा कर सकता है।

ऐसे में अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कानूनी और कूटनीतिक प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है और इसका असर आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर किस रूप में दिखाई देता है।

Friday, 6 February 2026

“Vastu Tips: घर में रखें ये शुभ मूर्तियां, बढ़ेगा सुख-सौभाग्य… लेकिन जान लें सही नियम”


 नई दिल्ली: घर की सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा के लिए लोग अक्सर वास्तु शास्त्र के नियमों का पालन करते हैं। वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि घर में रखी हर वस्तु का परिवार की तरक्की और मानसिक माहौल पर प्रभाव पड़ता है। ऐसे में कई लोग घर को सजाने के लिए मूर्तियां रखते हैं, लेकिन इन्हें सही दिशा और नियमों के अनुसार रखना बेहद जरूरी माना जाता है।

वास्तु के अनुसार, भगवान गणेश की मूर्ति घर के मुख्य द्वार या पूजा स्थान पर रखना शुभ माना जाता है, जिससे बाधाएं दूर होती हैं और समृद्धि बढ़ती है। वहीं, भगवान लक्ष्मी की मूर्ति आर्थिक सुख-समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है, जिसे उत्तर-पूर्व दिशा में रखना बेहतर बताया गया है।

इसके अलावा, बुद्ध की शांत मुद्रा वाली मूर्ति घर में सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति लाने के लिए उपयोगी मानी जाती है। वहीं, राधा-कृष्ण की मूर्ति वैवाहिक जीवन में प्रेम और सामंजस्य का प्रतीक मानी जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, टूटी-फूटी या खंडित मूर्तियां घर में नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि इससे नकारात्मक ऊर्जा बढ़ने की आशंका रहती है। साथ ही, मूर्तियों को साफ-सुथरा रखना और सही स्थान पर स्थापित करना जरूरी है।

ध्यान रहे कि वास्तु उपाय आस्था और मान्यताओं पर आधारित होते हैं, इसलिए इन्हें अपनाते समय अपनी सुविधा और विश्वास को प्राथमिकता दें। सही नियमों के साथ रखी गई मूर्तियां घर में सकारात्मक माहौल और खुशहाली बढ़ाने में मदद कर सकती हैं।

“‘75 नहीं, अभी 25 बाकी हैं…’ पीएम मोदी ने जन्मदिन का किस्सा सुनाकर दिया पॉजिटिव सोच का संदेश”


 


 नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अपने जन्मदिन से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा करते हुए सकारात्मक सोच और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने बताया कि एक नेता ने उन्हें 17 सितंबर को फोन कर कहा कि अब वह 75 साल के हो गए हैं। इस पर पीएम मोदी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि “अभी 25 साल बाकी हैं।”

पीएम मोदी ने कहा कि वह हमेशा बीते हुए समय की बजाय आने वाले समय और अवसरों पर ध्यान देते हैं। उनके अनुसार, जिंदगी में उम्र या मुश्किलों से ज्यादा मायने आपके इरादों और सोच का होता है। उन्होंने युवाओं और नागरिकों को संदेश दिया कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण जरूरी है।

प्रधानमंत्री ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने हमेशा चुनौतियों को अवसर में बदलने की कोशिश की है और भविष्य के लक्ष्यों पर फोकस रखा है। उनका मानना है कि अगर इंसान अपने सपनों और मेहनत पर विश्वास रखे, तो उम्र सिर्फ एक संख्या बनकर रह जाती है।

इस किस्से के जरिए पीएम मोदी ने लोगों को प्रेरित करते हुए कहा कि बीते हुए सालों की बजाय आने वाले समय और संभावनाओं पर ध्यान देना चाहिए। उनका यह संदेश सोशल मीडिया और जनसभाओं में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इसे मोटिवेशनल नजरिए से देख रहे हैं।

“मां को अस्पताल ले जा रहा था बेटा, रास्ते में दर्दनाक हादसा… टेम्पो से कुचलकर बुजुर्ग महिला की मौत”


 महाराष्ट्र के पुणे शहर में एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा सामने आया है, जहां अस्पताल ले जाते समय एक बेटे ने अपनी मां को हमेशा के लिए खो दिया। यह दर्दनाक घटना कर्वे रोड स्थित गांधी भवन चौक के पास मंगलवार सुबह करीब सवा आठ बजे हुई।

जानकारी के अनुसार, 61 वर्षीय सीताबाई शिंदे अपने 38 वर्षीय बेटे तुळशीदास शिंदे के साथ बाइक पर सवार होकर मेडिकल जांच के लिए अस्पताल जा रही थीं। जैसे ही वे जलसा होटल के सामने पहुंचे, सामने से आ रहे एक अज्ञात बाइक सवार ने अचानक गलत तरीके से कट मार दिया। इससे तुळशीदास की बाइक का संतुलन बिगड़ गया और दोनों सड़क पर गिर पड़े।

गिरते समय सीताबाई शिंदे सड़क की दाईं ओर जा गिरीं, तभी पास से गुजर रहे एक टेम्पो ट्रैवलर का पहिया उनके सीने के ऊपर से गुजर गया। हादसे के बाद बेटे ने स्थानीय लोगों की मदद से मां को तुरंत ससून अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

इस घटना ने बेटे को गहरे सदमे में डाल दिया, क्योंकि वह अपनी मां को इलाज के लिए ले जा रहा था और रास्ते में ही उन्हें खो दिया। अंतिम संस्कार के बाद बेटे ने अलंकार पुलिस स्टेशन में अज्ञात बाइक सवार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और आरोपी की तलाश जारी है।

“विपक्षी शोर-शराबे के चलते संसद में शुक्रवार को प्रश्नकाल स्थगित, कार्यवाही पर असर”


 नई दिल्ली: संसद में शुक्रवार को विपक्षी दलों की नारेबाजी और शोर-शराबे के चलते प्रश्नकाल पूरी तरह से प्रभावित हुआ। कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही देर बाद दोपहर 12 बजे तक प्रश्नकाल स्थगित कर दिया गया। इस दौरान कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के सदस्य आसन के समीप जाकर जोर-जोर से नारेबाजी करते रहे।

सूत्रों के अनुसार, विपक्ष ने सरकार के कई मुद्दों और नीतियों पर सवाल उठाए, लेकिन सदस्य अक्सर चर्चा की बजाय नारेबाजी में शामिल हो गए। इसका सीधा असर संसद की कार्यवाही पर पड़ा और तय कार्यक्रम पूरा नहीं हो सका।

संसद में स्थगन की घटनाएं आम हैं, लेकिन इस बार विपक्ष और सरकार के बीच तनाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे माहौल में संसद का प्रश्नकाल, जो जनता की समस्याओं के समाधान और जवाबदेही के लिए महत्वपूर्ण है, प्रभावित होता है।

सदन में इस मुद्दे पर चर्चा जारी रहने की संभावना है। नेताओं ने विपक्ष से अपील की है कि कार्यवाही को बाधित न करें और सवाल-जवाब के जरिए ही अपने विचार रखें। वहीं, विपक्ष का कहना है कि सरकार की नीतियों और निर्णयों पर सवाल उठाना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है।

राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि ऐसे घटनाओं से न केवल संसद की कार्यकुशलता प्रभावित होती है, बल्कि जनता में भी प्रशासन और राजनीतिक दलों के प्रति असंतोष बढ़ता है।

“टी20 वर्ल्ड कप 2026: श्रीलंका ने मोहसिन नकवी को किया बेइज्जत, पाकिस्तान का भारत से खेलना संदेह में”


 


 नई दिल्ली: टी20 वर्ल्ड कप 2026 शुरू होने में अब सिर्फ कुछ घंटे बाकी हैं, लेकिन पाकिस्तान की ओर से एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। पाकिस्तान ने 15 फरवरी को होने वाले अहम मुकाबले में भारत के खिलाफ खेलने से इनकार कर दिया है। यह कदम तब आया जब आईसीसी ने बांग्लादेश को टूर्नामेंट से बाहर कर दिया।

वहीं, पाकिस्तान के स्टार खिलाड़ी मोहसिन नकवी को श्रीलंका ने सरेआम बेइज्जत किया। एक लेटर के माध्यम से मेजबान टीम ने नकवी को उनके रवैये और अनुशासन के सवाल उठाते हुए नसीहत दी। इस घटना ने पाकिस्तान की टीम की तैयारी और खेल भावना पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद न केवल टूर्नामेंट की छवि को प्रभावित कर सकता है, बल्कि भारत-पाकिस्तान मुकाबले के रोमांच और सुरक्षा उपायों पर भी असर डाल सकता है। आईसीसी और आयोजकों के लिए अब चुनौती है कि दोनों टीमों के बीच मुकाबले को बिना किसी विवाद के सुरक्षित तरीके से कराया जाए।

क्रिकेट प्रेमियों की निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या पाकिस्तान वाकई भारत के खिलाफ मैदान में उतरेगा या नहीं। वहीं, श्रीलंका की ओर से मोहसिन नकवी की सार्वजनिक आलोचना ने पाकिस्तान टीम की साख को और कमजोर किया है।

टी20 वर्ल्ड कप 2026 का यह विवाद खेल की दुनिया में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है, और हर क्रिकेट फैन अब इंतजार कर रहा है कि आखिरकार भारत-पाकिस्तान मुकाबला कब और कैसे खेला जाएगा।

“चेहरे पर साबुन या फेशवॉश? जानें एक्सपर्ट की राय, कौन देगा प्राकृतिक ग्लो”


 आगरा: आज के समय में  भोजन, जंक फूड, अधिक तेल वाला खाना और नींद की कमी है। इसलिए केवल फेशवॉश ही नहीं, बल्कि जीवनशैली में सुधार और संतुलित आहार भी जरूरी है।

विशेषज्ञ ने सलाह दी कि साबुन का उपयोग चेहरे पर न करें, क्योंकि यह स्किन की नैचुरल नमी को खत्म कर सकता है और रुखापन बढ़ा सकता है। वहीं, सही फेशवॉश का उपयोग चेहरे की त्वचा को साफ और हेल्दी बनाए रखता है, जिससे प्राकृतिक ग्लो आता है।प्रदूषण और बदलती लाइफस्टाइल के कारण चेहरे की देखभाल बेहद जरूरी हो गई है। अक्सर लोग सोचते हैं कि चेहरे पर साबुन लगाना या फेशवॉश इस्तेमाल करना चाहिए, जिससे त्वचा निखरी और ग्लो करे। इस बारे में स्किन एक्सपर्ट ने स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं।

एक्सपर्ट का कहना है कि किसी भी अच्छी क्वालिटी के फेशवॉश का इस्तेमाल करना सबसे सुरक्षित और प्रभावी तरीका है। चेहरे को दिन में कम से कम दो बार—सुबह हल्के गुनगुने पानी से और शाम को बाहर से आने के बाद—फेशवॉश से साफ करना चाहिए। इससे त्वचा पर जमा धूल, तेल और प्रदूषण हटता है और स्किन हेल्दी रहती है।

चेहरे की खराबी और रुखापन का मुख्य कारण प्रदूषण, अनियमित

युवा और व्यस्त जीवनशैली वाले लोगों के लिए फेशवॉश रोजमर्रा का महत्वपूर्ण साथी बन गया है।

“हर्षवर्धन राणे ने पॉडकास्ट से दूरी क्यों बनाई? कहा- मेरा फोकस सिर्फ काम पर”


 नई दिल्ली: बॉलीवुड एक्टर हर्षवर्धन राणे ने हाल ही में एक बड़ा खुलासा किया कि वह पॉडकास्ट या लंबे इंटरव्यू का हिस्सा बनने में रुचि नहीं रखते, जहां सिर्फ संघर्ष और परेशानियों पर घंटों बात की जाती हो। उनके मुताबिक, उनका पूरा ध्यान हमेशा अपने काम और लक्ष्यों पर रहता है, इसलिए ऐसे प्लेटफॉर्म्स उनके लिए समय की बर्बादी हैं।

हर्षवर्धन राणे ने बताया कि 16 साल की उम्र में उन्होंने अपने सपनों के साथ घर छोड़कर बॉलीवुड में कदम रखा। शुरुआत में चुनौतियां कई थीं—कोई गॉडफादर नहीं, इंडस्ट्री में किसी का समर्थन नहीं। लेकिन उनके मजबूत इरादे और अडिग निश्चय ने हर मुश्किल को आसान बना दिया।

‘सनम तेरी कसम’ और ‘एक दीवाने की दीवानियत’ जैसी फिल्मों से अपनी पहचान बनाने वाले हर्षवर्धन ने साबित किया कि टैलेंट और मेहनत ही सफलता की असली कुंजी है। उनका मानना है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी चुनौती आपको रोक नहीं सकती।

एक्टर का यह स्टैंड दर्शकों और फैंस को यह प्रेरणा देता है कि संघर्ष को लेकर रोने की बजाय काम और लक्ष्य पर ध्यान देना ही सही राह है। यही वजह है कि हर्षवर्धन राणे पॉडकास्ट या लंबी बातचीत के बजाय अपने प्रोजेक्ट्स और एक्टिंग करियर पर फोकस बनाए रखते हैं।

“दिल्ली ‘लापतागंज’? बच्चों के गायब होने की अफवाह, पुलिस ने किया खंडन”


 


 नई दिल्ली: राजधानी में इन दिनों बच्चों के गायब होने की अफवाहों ने खौफ का माहौल बना दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, व्हाट्सएप ग्रुप्स और मोहल्लों में ‘सावधान’ और ‘अलर्ट’ संदेशों की भरमार है। लोगों के बीच चर्चा है कि दिल्ली अब ‘लापतागंज’ बन गई है।

हालांकि दिल्ली पुलिस लगातार कह रही है कि ऐसी कोई घटना असामान्य नहीं है और आंकड़े सामान्य हैं। पुलिस ने साफ किया कि जनवरी के पहले 15 दिनों में दिल्ली से 800 से अधिक लोग गायब होने की खबरें भी सच नहीं हैं, और इनमें अधिकांश दावे अफवाह पर आधारित हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की अफवाहें लोगों में डर फैलाने और समाज में अशांति पैदा करने का काम करती हैं। सोशल मीडिया पर फैल रही रिपोर्ट्स ने हालात को और बिगाड़ दिया, जिससे दिल्ली पुलिस को मैदान में उतरकर जनता को भरोसा दिलाना पड़ा।

राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों की राय है कि यह केवल अफवाह नहीं, बल्कि कहीं बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकती है। घर-घर में शोर और डर फैलाने का मकसद साफ नजर आता है।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर विश्वास न करें और किसी भी संदिग्ध सूचना को सोशल मीडिया पर शेयर करने से पहले प्रमाणित कर लें।

दिल्लीवासियों के लिए जरूरी है कि वे शांत रहें और अफवाहों के जाल में न फंसे, ताकि शहर में भय और अशांति का माहौल ना बने।

“BMC मेयर रेस: बीजेपी के 3 नाम चर्चित, उद्धव गुट कर सकता है शिंदे को मौका?


 बीएमसी (BMC) के आगामी मेयर चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। बीजेपी के अंदर मेयर पद के लिए तीन प्रमुख नामों पर चर्चा हो रही है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, इन नामों का अंतिम फैसला जल्द ही किया जाएगा।

वहीं, डिप्टी मेयर का पद शिवसेना को दिए जाने की संभावना है। इसके लिए दो नाम फिलहाल रेस में हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी और शिवसेना के बीच इस सीट को लेकर संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

इस बीच, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट की सियासी चालें भी अहम भूमिका निभा सकती हैं। अगर उद्धव गुट शिंदे को समर्थन देता है, तो वह राजनीति में नया मोड़ ला सकता है। ऐसे में बीएमसी की सत्ता में समीकरण बदलने की पूरी संभावना है।

राजनीतिक विशेषज्ञ बता रहे हैं कि मेयर और डिप्टी मेयर के पद पर इन नियुक्तियों से मुंबई की नगर निगम में सत्तात्मक संतुलन और विकास परियोजनाओं पर असर पड़ेगा। पार्टी की रणनीति, नामों का चयन और गठबंधन की भूमिका आगामी चुनाव में निर्णायक साबित होगी।

बीएमसी की सियासी रेस में अब तक का हर कदम, शहर की राजनीति और प्रशासनिक फैसलों पर असर डाल सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी के तीन नामों में से कौन फाइनल होता है और उद्धव गुट की सियासी चालें क्या मोड़ लाती हैं।

“ना हाथी, ना घोड़ा, ना रथ… चित्रकूट में दूल्हे की अनोखी बैलगाड़ी बारात ने मचाई धूम”





, उत्तर प्रदेश: शादी का मौसम हो और बारात का जश्न, लेकिन चित्रकूट जिले के लोढ़वारा गांव में बीती रात एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने सभी को चौंका दिया। ना हाथी, ना घोड़ा, ना ही महंगी कारें—बल्कि सजी-धजी बैलगाड़ियों में दूल्हा अपनी बारात लेकर पहुंचा।

गांव की गलियों में एक के बाद एक बैलगाड़ियों की कतार, रंग-बिरंगे कपड़ों और फूलों की मालाओं से सजाई गई बैलों के सींग, और बैंड-बाजे की धुन ने पूरे गांव को आकर्षित किया। लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और इस अनोखे दृश्य को कैमरे में कैद करने लगे।

स्थानीय लोग बताते हैं कि दूल्हा घोड़े या लग्जरी कार की बजाय पारंपरिक बैलगाड़ी में सवार होकर बारात लेकर निकला, जिससे पुरानी परंपराओं की याद ताजा हो गई। इस अनोखी बारात ने आधुनिकता की तेज रफ्तार को कुछ पलों के लिए रोक दिया और गांव के लोगों में उत्साह और खुशी का माहौल भर दिया।

लोढ़वारा गांव की यह घटना सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गई है। इस अनोखे अंदाज़ ने शादी के उत्सव को और भी यादगार बना दिया और गांववासियों के दिलों में लंबे समय तक इस दृश्य की छवि बनी रहेगी।