Sunday, 15 February 2026

महाशिवरात्रि स्पेशल: बॉलीवुड के इन सितारों ने गुदवाए महादेव के टैटू


 महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर देशभर में शिवभक्ति की धूम है। आम लोगों से लेकर फिल्मी सितारों तक, हर कोई अपने-अपने अंदाज़ में महादेव के प्रति आस्था जता रहा है। बॉलीवुड में भी कई ऐसे सेलेब्स हैं जिन्होंने भगवान शिव से जुड़े टैटू बनवाकर अपनी भक्ति को स्थायी रूप दे दिया है।

अजय देवगन ने अपनी छाती पर भगवान शिव का बड़ा और आकर्षक टैटू बनवाया है। यह टैटू कई फिल्मों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर आ चुका है और उनकी गहरी आस्था को दर्शाता है।

संजय दत्त भी शिवभक्तों में गिने जाते हैं। उन्होंने अपने शरीर पर ‘ॐ नमः शिवाय’ सहित कई धार्मिक प्रतीक गुदवाए हैं।

कंगना रनौत ने गर्दन के पीछे ‘ॐ’ का टैटू बनवाया है, जो उनकी आध्यात्मिक सोच को दर्शाता है।

इसके अलावा कुणाल खेमू और सुनील शेट्टी भी महादेव के प्रतीक टैटू के जरिए अपनी श्रद्धा जता चुके हैं।

इन सितारों के लिए टैटू सिर्फ फैशन नहीं, बल्कि आस्था का प्रतीक है। महाशिवरात्रि पर उनकी यह भक्ति चर्चा में बनी हुई है।

🕉️ हर हर महादेव!

भोपाल में सनसनी: निशातपुरा के सेप्टिक टैंक से 33 वर्षीय महिला का सड़ा-गला शव बरामद


  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के निशातपुरा इलाके में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। एक खाली प्लॉट के सेप्टिक टैंक से 33 वर्षीय महिला का सड़ा-गला शव बरामद होने से इलाके में हड़कंप मच गया।

जानकारी के अनुसार, आसपास के लोगों ने तेज बदबू आने की शिकायत की, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची। जांच के दौरान सेप्टिक टैंक को खुलवाया गया, जहां से महिला का शव मिला। शव की हालत काफी खराब बताई जा रही है, जिससे आशंका जताई जा रही है कि हत्या कुछ दिन पहले की गई होगी।

पुलिस ने मौके पर फॉरेंसिक टीम को बुलाकर साक्ष्य जुटाए हैं। शुरुआती जांच में हत्या की आशंका से इनकार नहीं किया जा रहा। महिला की पहचान और मौत के कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमॉर्टम कराया जा रहा है।

इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।

इस घटना ने शहर में कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं और स्थानीय लोग दहशत में हैं।

धोनी के कप्तानी छोड़ने पर बड़ा खुलासा! पूर्व सिलेक्टर ने खोला 2017 के फैसले का राज


 जनवरी 2017 में जब एमएस धोनी ने सीमित ओवरों की भारतीय टीम की कप्तानी अचानक छोड़ने का फैसला किया, तो क्रिकेट जगत हैरान रह गया था। उस वक्त यह कदम बेहद अप्रत्याशित माना गया था, क्योंकि धोनी अब भी टीम के सबसे अनुभवी और सफल कप्तानों में गिने जाते थे।

अब पूर्व राष्ट्रीय चयनकर्ता जतिन परांजपे ने इस फैसले को लेकर अहम खुलासा किया है। उनके मुताबिक, धोनी ने यह निर्णय पूरी तरह टीम के भविष्य को ध्यान में रखकर लिया था। चयन समिति और टीम मैनेजमेंट के साथ बातचीत के दौरान धोनी ने संकेत दे दिया था कि वह नए नेतृत्व को मौका देना चाहते हैं, ताकि आगामी बड़े टूर्नामेंट्स के लिए टीम समय रहते तैयार हो सके।

परांजपे के अनुसार, यह कोई दबाव में लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि धोनी की दूरदर्शिता का उदाहरण था। वह चाहते थे कि अगला कप्तान पर्याप्त समय पाए और टीम के साथ तालमेल बिठा सके। इसके बाद सीमित ओवरों की कप्तानी विराट कोहली को सौंपी गई।

धोनी का यह कदम उनके नेतृत्व शैली को दर्शाता है—जहां व्यक्तिगत पद से ज्यादा टीम का भविष्य प्राथमिकता में रहा। आज भी उस फैसले को भारतीय क्रिकेट के बड़े ट्रांजिशन मोमेंट के तौर पर देखा जाता है।

क्या बदल रहा है बिहार में विपक्ष का चेहरा? पप्पू यादव की गिरफ्तारी से नई सियासी हलचल


   बिहार की राजनीति में इन दिनों एक अहम सवाल गूंज रहा है—क्या विपक्ष का ‘असली चेहरा’ बदल रहा है? अब तक यह भूमिका प्रमुख तौर पर तेजस्वी प्रसाद यादव से जोड़ी जाती रही है। लेकिन हालिया घटनाओं ने पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को अचानक चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है।

पटना के चर्चित शंभू गर्ल्स हॉस्टल प्रकरण में मुखर रुख अपनाने के बाद पप्पू यादव को 31 साल पुराने एक मामले में अदालत के आदेश पर गिरफ्तार किया गया। उनकी गिरफ्तारी ने राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनमानस तक बहस छेड़ दी। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अपेक्षाकृत पुराने और कम गंभीर माने जा रहे मामले में हुई कार्रवाई ने सहानुभूति की लहर पैदा की।

दिलचस्प यह रहा कि गिरफ्तारी और फिर कुछ ही दिनों में जमानत पर रिहाई के दौरान पप्पू यादव को विपक्षी खेमे के कई नेताओं और सामाजिक समूहों का खुला समर्थन मिला। इससे उनकी छवि एक आक्रामक और मुखर विपक्षी नेता के रूप में उभरती दिखी।

हालांकि, यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि तेजस्वी यादव की जगह कोई नया चेहरा पूरी तरह स्थापित हो गया है। लेकिन इतना जरूर है कि बिहार की विपक्षी राजनीति में शक्ति-संतुलन और नेतृत्व की बहस अब तेज हो चुकी है। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि यह सहानुभूति अस्थायी है या विपक्ष की दिशा में स्थायी बदलाव का संकेत।

एपस्टीन फाइल्स पर सियासी संग्राम: हरदीप पुरी पर हमलावर कांग्रेस को BJP का पलटवार, कपिल सिब्बल पर उठाए सवाल


 एपस्टीन फाइल्स को लेकर सियासत गरमा गई है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर कांग्रेस के हमलों के बाद अब भाजपा ने पलटवार किया है। भाजपा ने एक दस्तावेज साझा करते हुए दावा किया है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल वर्ष 2010 में एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में शामिल हुए थे, जिसका संबंध कथित तौर पर उन्हीं सर्किल्स से जोड़ा जा रहा है जिनका नाम एपस्टीन फाइल्स में सामने आया है।

भाजपा का कहना है कि कांग्रेस पहले तथ्यों को स्पष्ट करे, उसके बाद दूसरों पर आरोप लगाए। पार्टी प्रवक्ताओं ने सवाल उठाया कि क्या उस कार्यक्रम की प्रकृति और उसमें शामिल लोगों की पृष्ठभूमि की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी?

वहीं कांग्रेस का कहना है कि भाजपा मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है और असली सवालों का जवाब देने से बच रही है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि एपस्टीन फाइल्स में जिन नामों का जिक्र है, उनका भारत से क्या संबंध है और क्या किसी जांच की आवश्यकता है।

फिलहाल यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित है। किसी भी दस्तावेज या दावे की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। लेकिन साफ है कि एपस्टीन फाइल्स का मुद्दा अब भारतीय राजनीति में भी सियासी हथियार बन चुका है।

Sensex में बड़ी गिरावट: टॉप 6 कंपनियों का 3 लाख करोड़ मार्केट कैप साफ, IT सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित


 शेयर बाजार के लिए बीता सप्ताह भारी उतार-चढ़ाव वाला रहा। BSE Sensex में 953.64 अंकों यानी 1.14% की गिरावट दर्ज की गई, जिसका सीधा असर देश की दिग्गज कंपनियों के मार्केट कैप पर पड़ा। सेंसेक्स की टॉप 10 कंपनियों में से 6 के बाजार पूंजीकरण में कुल मिलाकर 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की कमी आ गई।

सबसे ज्यादा झटका आईटी सेक्टर को लगा। Tata Consultancy Services और Infosys के मार्केट कैप में सबसे बड़ी गिरावट देखी गई। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और टेक शेयरों में बिकवाली ने इन कंपनियों पर दबाव बढ़ाया।

इसके अलावा Reliance Industries जैसी बड़ी कंपनी भी गिरावट की चपेट में रही, जिससे निवेशकों की पूंजी में बड़ी सेंध लगी।

हालांकि, बाजार की इस कमजोरी के बीच कुछ कंपनियों ने मजबूती दिखाई। State Bank of India और Bajaj Finance ने बाजार के विपरीत शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी मार्केट वैल्यू में बढ़ोतरी दर्ज की। बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में खरीदारी से इन शेयरों को सहारा मिला।

विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक संकेतकों में सुधार और घरेलू आर्थिक आंकड़ों की मजबूती से बाजार में स्थिरता लौट सकती है। फिलहाल निवेशकों को सतर्क रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।

🇮🇳🇺🇸 ट्रेड डील के बाद साफ संदेश: रूस से तेल पर भारत की रणनीतिक स्वायत्तता बरकरार


 अमेरिका के साथ ट्रेड डील को लेकर चल रही अटकलों के बीच अब तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। रूस से तेल खरीद को लेकर यह दावा किया जा रहा था कि भारत ने समझौते के बदले अपनी खरीद नीति में बदलाव का वादा किया है। लेकिन विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बयान और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की टिप्पणी से स्थिति स्पष्ट हो गई है।

म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए मार्को रुबियो ने कहा कि भारत ने रूस से “अतिरिक्त” तेल खरीद न बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है। यानी भारत फिलहाल जितना रूसी तेल खरीद रहा है, वह जारी रहेगा। यह बयान इस धारणा को खारिज करता है कि अमेरिका ने भारत पर रूस से तेल खरीद पूरी तरह रोकने का दबाव डाला है।

भारत का रुख साफ है—ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता सर्वोपरि है। नई दिल्ली का मानना है कि किसी भी बाहरी शक्ति को उसकी ऊर्जा नीति तय करने का अधिकार नहीं है। रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद भारत ने रियायती दरों पर रूसी कच्चा तेल खरीदकर घरेलू बाजार को स्थिर रखा है, जिससे महंगाई पर नियंत्रण में मदद मिली।

विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान भारत-अमेरिका संबंधों में परिपक्वता को दर्शाता है। दोनों देश अपने-अपने हितों को समझते हुए सहयोग बढ़ा रहे हैं, लेकिन भारत ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वह बहुध्रुवीय कूटनीति के अपने सिद्धांत से पीछे नहीं हटेगा।

कुल मिलाकर, ट्रेड डील के बाद यह संदेश गया है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा।

🇧🇩 बांग्लादेश में संवैधानिक पेच! स्पीकर लापता, शपथ पर सस्पेंस—तारिक रहमान की ताजपोशी अटकी?


 अब सबकी निगाहें राष्ट्रपति के फैसले और तारिक रहमान की अगली रणनीति पर टिकी हैं।बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। बीएनपी की जीत के बाद तारिक रहमान की प्रधानमंत्री पद पर ताजपोशी लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन शपथ ग्रहण से पहले ही संवैधानिक संकट खड़ा हो गया है। संसद की स्पीकर शिरीन शर्मिन चौधरी के लापता होने और डिप्टी स्पीकर के जेल में होने से नए सांसदों को शपथ दिलाने की प्रक्रिया अधर में लटक गई है।

सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन अगले कुछ दिनों में समाधान निकाल सकते हैं। माना जा रहा है कि प्रो-टेम स्पीकर की नियुक्ति या विशेष संवैधानिक व्यवस्था के जरिए रास्ता साफ किया जा सकता है। बंगभवन में लगातार बैठकों का दौर जारी है और 16–17 फरवरी के आसपास शपथ ग्रहण की संभावना जताई जा रही है।

करीब 20 साल बाद सत्ता में वापसी कर रही बीएनपी के लिए यह क्षण ऐतिहासिक है, लेकिन विपक्ष और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर प्रक्रिया में देरी हुई तो देश में अस्थिरता बढ़ सकती है।

Saturday, 14 February 2026

वास्तु टिप्स: किचन में चूल्हा और बर्तन किस दिशा में रखें? जानें सही नियम और आसान उपाय


 वास्तु शास्त्र के अनुसार किचन घर का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, क्योंकि यह परिवार के स्वास्थ्य, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ा होता है। ऐसे में किचन की सही दिशा और उसमें रखी चीजों की उचित व्यवस्था को विशेष महत्व दिया जाता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, किचन में चूल्हा या गैस स्टोव हमेशा दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) दिशा में रखना सबसे शुभ माना जाता है। यदि यह संभव न हो, तो उत्तर-पश्चिम दिशा भी एक वैकल्पिक विकल्प हो सकती है। खाना बनाते समय व्यक्ति का मुख पूर्व दिशा की ओर होना बेहतर माना जाता है, क्योंकि इससे सकारात्मक ऊर्जा और स्वास्थ्य लाभ मिलने की मान्यता है।

जहां तक बर्तनों की बात है, उन्हें किचन के पश्चिम या दक्षिण दिशा में व्यवस्थित रखना अच्छा माना जाता है। भारी बर्तन नीचे की अलमारी में और रोजमर्रा के उपयोग वाले बर्तन आसानी से पहुंचने वाली जगह पर रखने की सलाह दी जाती है। वहीं, पानी से जुड़ी चीजें जैसे सिंक या फिल्टर उत्तर-पूर्व दिशा में रखने से संतुलन बना रहता है।

विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि किचन को हमेशा साफ-सुथरा और हवादार रखना चाहिए। टूटे-फूटे बर्तन या खराब सामान किचन में नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इससे नकारात्मक ऊर्जा बढ़ने की मान्यता है। सही दिशा और व्यवस्था से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक माहौल बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

दिल्ली में बदलते मौसम का असर: बच्चों की खांसी-जुकाम में तुरंत दवा देने से बचें, डॉ. तरुण सिंह की अहम चेतावनी


  दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत में तेजी से बदलते मौसम का असर बच्चों की सेहत पर साफ दिखाई दे रहा है। सरकारी और निजी अस्पतालों में बच्चों की ओपीडी में 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खासकर नवजात और छोटे बच्चे खांसी-जुकाम और वायरल संक्रमण से ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, जिससे अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।

चाइल्ड और न्यूबॉर्न स्पेशलिस्ट डॉ. तरुण सिंह के मुताबिक, खांसी-जुकाम की शुरुआती अवस्था में तुरंत दवा देना हमेशा जरूरी नहीं होता। उनका कहना है कि कई मामलों में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता खुद ही संक्रमण से लड़ने में सक्षम होती है, इसलिए हल्के लक्षणों में 3 से 4 दिन तक निगरानी रखना बेहतर माना जाता है। हालांकि, यदि बच्चे को तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी या अत्यधिक कमजोरी जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार, बदलते मौसम में वायरल संक्रमण तेजी से फैलते हैं और छोटे बच्चे जल्दी इसकी चपेट में आ जाते हैं। ऐसे में माता-पिता को बिना डॉक्टर की सलाह के दवा देने से बचना चाहिए और बच्चों को पर्याप्त आराम, हल्का पौष्टिक आहार तथा स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए।

डॉक्टरों ने अभिभावकों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, बल्कि लक्षणों पर नजर रखें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से परामर्श लें, ताकि बच्चों की सेहत सुरक्षित रखी जा सके।

तारिक रहमान की बड़ी जीत: नरेंद्र मोदी के चुनावी फॉर्मूले से बांग्लादेश में बनी नई सरकार


  बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच हुए आम चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने प्रचंड जीत दर्ज कर नई सरकार बनाने का रास्ता साफ कर लिया है। पार्टी के नेता तारिक रहमान अब देश की सत्ता संभालने की स्थिति में हैं और उनकी चुनावी रणनीति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है।

चुनावी अभियान के दौरान BNP ने जनता से सीधे संवाद और जमीनी संपर्क पर खास जोर दिया। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस रणनीति में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 के चर्चित ‘चाय पे चर्चा’ अभियान की झलक दिखाई दी। इसी तर्ज पर तारिक रहमान ने ‘चायेर अड्डा’ कार्यक्रम शुरू किया, जिसमें आम लोगों, युवाओं और स्थानीय समुदायों से अनौपचारिक मुलाकातों के जरिए संवाद स्थापित किया गया।

बताया जा रहा है कि इस रणनीति का आइडिया उनकी बेटी जायमा रहमान ने दिया था, जिसने प्रचार अभियान को नया आयाम दिया। इन बैठकों ने जनता से जुड़ाव मजबूत किया और चुनाव परिणामों में इसका असर साफ दिखाई दिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस जीत के बाद अब यह देखना अहम होगा कि नई सरकार देश की आंतरिक राजनीति, आर्थिक नीतियों और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को किस दिशा में आगे बढ़ाती है। ढाका की नई राजनीतिक दिशा पूरे दक्षिण एशिया की रणनीतिक स्थिति पर भी असर डाल सकती है।

महाशिवरात्रि 2026: कब है पावन पर्व और क्यों माना जाता है भगवान शिव की आराधना का सबसे खास दिन?


  हिंदू परंपरा में महाशिवरात्रि को भगवान शिव की आराधना और विशेष पूजा का सबसे पवित्र पर्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह त्योहार हर साल फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है, जब श्रद्धालु व्रत रखते हैं, शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करते हैं तथा पूरी श्रद्धा के साथ भगवान शिव की उपासना करते हैं।

साल 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी, रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और रात्रि जागरण का आयोजन किया जाता है। मान्यता है कि इस पावन दिन भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

धार्मिक जानकारों के अनुसार, महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं बल्कि आत्मचिंतन, संयम और भक्ति का प्रतीक है। श्रद्धालु इस दिन शिव मंत्रों का जाप करते हैं और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करने के लिए ध्यान और साधना भी करते हैं।

गाजियाबाद की भारत सिटी सोसाइटी हादसा: 3 नाबालिग बहनों की मौत के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति की जांच तेज


  गाजियाबाद की भारत सिटी सोसाइटी में 9वीं मंजिल से कूदकर जान देने वाली तीन नाबालिग बहनों के मामले में जांच लगातार आगे बढ़ रही है। पुलिस ने अब परिवार की आर्थिक स्थिति की भी पड़ताल शुरू कर दी है, ताकि घटना से जुड़े सभी पहलुओं को समझा जा सके।

मामले की जांच कर रही गाजियाबाद पुलिस के अनुसार, माता-पिता के छह बैंक खातों की जांच की गई है। शुरुआती पड़ताल में परिवार की आमदनी, लेन-देन और आर्थिक हालात से जुड़े दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि कहीं आर्थिक दबाव या अन्य किसी वजह ने इस दुखद घटना में भूमिका तो नहीं निभाई।

अधिकारियों का कहना है कि जांच बहुआयामी तरीके से की जा रही है, जिसमें परिवार के करीबी लोगों, पड़ोसियों और संबंधित पक्षों से भी पूछताछ शामिल है। फिलहाल पुलिस किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों और सबूतों का गहन विश्लेषण कर रही है।

इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है और समाज में बच्चों की मानसिक स्थिति और पारिवारिक परिस्थितियों को लेकर भी गंभीर चर्चा शुरू हो गई है। पुलिस ने लोगों से अफवाहों से बचने और जांच पूरी होने तक आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करने की अपील की है।