Thursday, 26 February 2026

2014 में पहली शादी, 2 साल में तलाक… फिर नए प्यार से 1 महीने में हुई प्रेग्नेंट और रचाई दूसरी शादी


 


 पहला प्यार और शादी टूटने के बाद उन्हें लगा था कि अब जिंदगी में दोबारा प्यार की जगह नहीं बचेगी। साल 2014 में उन्होंने पहली शादी की, लेकिन महज दो साल बाद रिश्ता टूट गया और तलाक हो गया। इस दौर ने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया।

बताया जाता है कि इसी बीच एक ज्योतिषी से मुलाकात हुई, जिसने भविष्यवाणी की—“तुम 32 साल की उम्र में शादी करोगी।” उस समय यह बात मजाक जैसी लगी। उन्हें लगा कि अब दोबारा शादी करना संभव नहीं।

लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। समय बीता और उनकी जिंदगी में नए शख्स की एंट्री हुई। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और प्यार परवान चढ़ा। हैरानी की बात यह रही कि डेटिंग शुरू होने के महज एक महीने बाद ही वह प्रेग्नेंट हो गईं।

हालात और भावनाओं को समझते हुए दोनों ने शादी करने का फैसला लिया। इस तरह 32 साल की उम्र में उन्होंने दूसरी शादी रचाई—बिल्कुल वैसा ही जैसा ज्योतिषी ने कभी कहा था।

यह कहानी बताती है कि जिंदगी में उतार-चढ़ाव के बावजूद उम्मीद की किरण बनी रहती है। कभी-कभी जो बात असंभव लगती है, वही सच बन जाती है।

पहले खुद को बताया पाकिस्तानी, फिर कोर्ट में दिखाया भारतीय पासपोर्ट; तेलंगाना हाईकोर्ट भी हुआ हैरान


 हैदराबाद। तेलंगाना हाईकोर्ट में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया, जहां एक शख्स ने पहले खुद को पाकिस्तानी नागरिक बताया, लेकिन सुनवाई के दौरान भारतीय पासपोर्ट पेश कर दिया। विरोधाभासी दस्तावेजों के कारण कोर्ट ने कड़े सवाल उठाए और मामले ने कानूनी हलकों में हलचल मचा दी।

याकूतपुरा निवासी 33 वर्षीय सैयद अली हुसैन इमरान ने पुलिस पूछताछ पर रोक लगाने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। उनका दावा था कि वह भारत में जन्मे और पले-बढ़े हैं। हालांकि, सरकारी रिकॉर्ड में उनकी नागरिकता को लेकर अलग जानकारी सामने आई।

सुनवाई के दौरान इमरान के वकील ने वर्ष 2022 में जारी भारतीय पासपोर्ट कोर्ट में पेश किया। इस पर सरकारी पक्ष ने बताया कि गृह मंत्रालय के रिकॉर्ड में ऐसे किसी पासपोर्ट का विवरण उपलब्ध नहीं है। इस विसंगति पर अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि हर सुनवाई में नए तथ्य सामने आना मामले को और उलझा रहा है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट की प्रामाणिकता की जांच करना अदालत का कार्यक्षेत्र नहीं है। अंततः विरोधाभासी दस्तावेजों के बीच याचिका वापस ले ली गई। अदालत ने जांच एजेंसियों को मामले में आगे आवश्यक कार्रवाई करने की छूट दे दी है।

यह मामला पहचान, दस्तावेजों की विश्वसनीयता और कानूनी प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।c

20 साल बाद परिवार से मिली मां, लेकिन अपनाने से पहले बेटों ने रख दी शर्त; दर्दभरी कहानी ने झकझोरा


 पश्चिम बंगाल से सामने आई एक घटना ने मां-बेटे के रिश्ते को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कहा जाता है, “भगवान हर जगह नहीं हो सकते, इसलिए उन्होंने मां को बनाया है”, लेकिन इस कहानी में हालात कुछ और ही बयां करते हैं।

करीब 20 साल पहले पारिवारिक विवाद और आर्थिक तंगी के कारण महिला अपने परिवार से अलग हो गई थी। परिस्थितियों ने उसे अपनों से दूर कर दिया। लंबे समय तक संघर्ष करने के बाद जब वह दोबारा अपने बेटों के संपर्क में आई, तो उसे उम्मीद थी कि बीते सालों की दूरियां मिट जाएंगी।

बताया जा रहा है कि बेटों ने मां को अपनाने से पहले कुछ शर्तें रख दीं। इनमें संपत्ति से जुड़े मुद्दे और रहने की व्यवस्था को लेकर स्पष्टता शामिल थी। मां के लिए यह पल भावनात्मक रूप से बेहद भारी था। एक ओर वर्षों बाद अपनों से मिलने की खुशी, तो दूसरी ओर अपनाए जाने की शर्तों का दर्द—इन दोनों के बीच वह टूटती नजर आई।

स्थानीय सामाजिक संगठनों का कहना है कि ऐसे मामलों में परिवारों को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। मां-बेटे का रिश्ता शर्तों पर नहीं, बल्कि विश्वास और स्नेह पर टिका होता है।

यह घटना समाज के सामने यह सवाल छोड़ जाती है कि बदलते समय में रिश्तों की परिभाषा क्या रह गई है? क्या आर्थिक और सामाजिक दबाव भावनात्मक संबंधों से बड़े हो गए हैं?

इंद्रप्रस्थ से नई दिल्ली तक: इतिहास में कितनी बार बदला राजधानी का नाम?


  राजधानी दिल्ली का नाम बदलकर इंद्रप्रस्थ करने की मांग एक बार फिर चर्चा में है। हालांकि इतिहास बताता है कि इस शहर की पहचान समय-समय पर बदलती रही है। प्राचीन ग्रंथ महाभारत में वर्णित इंद्रप्रस्थ को पांडवों की राजधानी माना जाता है, जिसे वर्तमान दिल्ली क्षेत्र से जोड़ा जाता है।

मध्यकाल में तोमर वंश के शासकों ने ‘ढिल्लिका’ नामक नगर बसाया, जिससे ‘दिल्ली’ शब्द की उत्पत्ति मानी जाती है। 12वीं सदी में पृथ्वीराज चौहान ने किला राय पिथौरा का विस्तार किया, जो उस दौर का प्रमुख केंद्र बना।

इसके बाद दिल्ली सल्तनत के शासकों ने सीरी, तुगलकाबाद और फिरोजाबाद जैसे नए शहर बसाए। 17वीं सदी में मुगल सम्राट शाहजहां ने शाहजहानाबाद की स्थापना की, जो आज पुरानी दिल्ली के रूप में जानी जाती है।

ब्रिटिश शासनकाल में 1911 में राजधानी को कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित किया गया और ‘नई दिल्ली’ नाम दिया गया, जिसका औपचारिक उद्घाटन 1931 में हुआ।

इतिहासकारों के अनुसार, दिल्ली केवल एक शहर नहीं बल्कि सभ्यताओं का संगम है, जिसने अलग-अलग कालखंडों में अलग नाम और पहचान पाई।

एआई समिट केस: 20 घंटे का हाईवोल्टेज ड्रामा, हिमाचल पुलिस से टकराव के बाद ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली रवाना हुई टीम


  शिमला। नई दिल्ली के भारत मंडपम में 19 फरवरी को आयोजित एआई समिट के दौरान हुए शर्टलेस प्रदर्शन के मामले ने दो राज्यों की पुलिस को आमने-सामने ला खड़ा किया। राजधानी शिमला में करीब 20 घंटे तक हाईवोल्टेज ड्रामा चला, जिसका अंत गुरुवार सुबह हुआ।

जानकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस की 20 सदस्यीय टीम ने शिमला जिले के रोहड़ू के चिड़गांव स्थित एक होटल से सौरभ सिंह, अरबाज़ खान और सिद्धार्थ अवधूत को गिरफ्तार किया। ये तीनों एआई समिट में शर्टलेस प्रदर्शन के आरोपी बताए गए हैं।

जब दिल्ली पुलिस टीम आरोपियों को लेकर वापस जा रही थी, तभी सोलन जिले के धर्मपुर में हिमाचल प्रदेश पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस के जवानों को हिरासत में ले लिया। हिमाचल पुलिस का आरोप था कि गिरफ्तारी स्थानीय पुलिस को सूचित किए बिना की गई।

इसके बाद आरोपियों और दिल्ली पुलिस कर्मियों को शिमला लाया गया और अदालत में पेश किया गया। कानूनी प्रक्रिया के तहत ट्रांजिट रिमांड की मांग की गई। दोनों राज्यों की पुलिस के बीच शोघी बैरियर पर तीखी बहस भी देखने को मिली।

आखिरकार, सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली ले जाया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय और कानूनी प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या आप भी गिनकर बनाते हैं रोटियां? वास्तु के अनुसार क्यों माना जाता है इसे अशुभ संकेत


  Vastu Tips For Kitchen: घर की रसोई को सिर्फ भोजन बनाने की जगह नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार रसोई से जुड़ी छोटी-छोटी आदतें भी घर की सुख-समृद्धि पर असर डालती हैं। इन्हीं में से एक आदत है रोटियां गिनकर बनाना।

भोपाल के ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार, जितने सदस्य उतनी ही रोटियां बनाना अभाव की मानसिकता का प्रतीक माना जाता है। वास्तु मान्यताओं में अन्न को देवी का रूप माना गया है। अन्नपूर्णा को अन्न की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है, इसलिए रसोई में कमी या गणना की भावना रखना शुभ नहीं समझा जाता।

  • अभाव की सोच का संकेत: गिनकर रोटियां बनाना इस बात का प्रतीक माना जाता है कि घर में अन्न सीमित है।

  • बरकत पर प्रभाव: मान्यता है कि इससे घर की समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित हो सकती है।

  • अतिथि सत्कार की भावना: भारतीय परंपरा में अतिथि को देवता माना गया है, इसलिए 1-2 रोटियां अतिरिक्त बनाना उदारता का प्रतीक है।

  • रोटियां 1-2 अधिक बनाएं।

  • ताजा आटे का उपयोग करें।

  • शांत मन से भोजन पकाएं।

  • बचा हुआ भोजन जरूरतमंदों को दान करें।

मान्यताओं के अनुसार, अन्न का सम्मान और सकारात्मक सोच घर में सुख-शांति बनाए रखने में सहायक मानी जाती है।

कांटेदार और साधारण दिखने वाला ऐलोवेरा, लेकिन फायदे जानकर रह जाएंगे दंग


 अक्सर घरों में गमले में लगा कांटेदार सा दिखने वाला ऐलोवेरा नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन यही पौधा सेहत और सुंदरता का खजाना है। Aloe vera की पत्तियों के अंदर पाया जाने वाला पारदर्शी जेल विटामिन A, C, E, B12, फोलिक एसिड, एंजाइम, मिनरल और अमीनो एसिड से भरपूर होता है। सही मात्रा में इसका उपयोग कई समस्याओं में लाभ पहुंचा सकता है।

  • नेचुरल मॉइश्चराइज़र: त्वचा को बिना चिपचिपाहट के हाइड्रेट रखता है।

  • सनबर्न में राहत: इसकी ठंडी तासीर धूप से झुलसी त्वचा को आराम देती है।

  • मुहांसों में असरदार: एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीबैक्टीरियल गुण पिंपल्स कम करने में मदद करते हैं।

  • एंटी-एजिंग प्रभाव: एंटीऑक्सीडेंट झुर्रियों को कम कर त्वचा में निखार लाते हैं।

  • डैंड्रफ से छुटकारा: एंटीफंगल गुण खुजली और रूसी को कम करते हैं।

  • बालों की मजबूती: स्कैल्प में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाकर जड़ों को मजबूत करता है।

  • नेचुरल कंडीशनर: बालों को मुलायम और चमकदार बनाता है।

ऐलोवेरा जूस सीमित मात्रा में लेने से पाचन बेहतर होता है, कब्ज में राहत मिलती है और इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। कुछ शोधों में यह वजन और ब्लड शुगर नियंत्रण में भी सहायक माना गया है।

ध्यान रखें: अधिक मात्रा में सेवन नुकसानदेह हो सकता है। गर्भवती महिलाएं या किसी बीमारी से ग्रसित लोग डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

बिना स्नान पूजा क्यों नहीं मानी जाती पूर्ण? शास्त्र और विज्ञान दोनों बताते हैं स्नान का महत्व


 मिर्जापुर। पूजा-पाठ और मंत्रोच्चार से पहले स्नान करना क्यों जरूरी माना गया है? यह सवाल अक्सर लोगों के मन में उठता है। विंध्यधाम के विद्वान ज्योतिषाचार्य अखिलेश अग्रहरि के अनुसार, शास्त्रों में स्नान को नित्यकर्म का अनिवार्य हिस्सा बताया गया है।

गरुड़ पुराणमनुस्मृति और एकलव्य स्मृति जैसे ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि बिना स्नान के देव पूजन, जप या हवन करने से पूर्ण फल की प्राप्ति नहीं होती। शास्त्रों के अनुसार स्नान शरीर और मन की शुद्धि का माध्यम है। जब मन शुद्ध होता है, तब भक्ति, एकाग्रता और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना मजबूत होती है।

ज्योतिषाचार्य का कहना है कि स्नान से केवल बाहरी स्वच्छता ही नहीं, बल्कि आंतरिक पवित्रता का भी अनुभव होता है। जल तत्व को पवित्रता और ऊर्जा का स्रोत माना गया है। स्नान के बाद शरीर में नई चेतना और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे पूजा का प्रभाव बढ़ता है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी स्नान को लाभकारी माना गया है। सुबह स्नान करने से रक्तसंचार बेहतर होता है, मानसिक ताजगी मिलती है और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ती है। यही कारण है कि स्नान को पूजा का पहला और महत्वपूर्ण कदम माना गया है।

शरीर के लिए क्यों जरूरी है प्रोटीन? जानिए शाकाहारियों के लिए बेस्ट सोर्स, कमजोरी होगी दूर


 स्वस्थ शरीर के लिए संतुलित आहार बेहद जरूरी है। विटामिन और मिनरल्स के साथ-साथ प्रोटीन भी एक ऐसा पोषक तत्व है, जिसकी कमी से शरीर कमजोर होने लगता है। प्रोटीन मांसपेशियों (मसल्स) के निर्माण, त्वचा की सेहत, बालों और नाखूनों की मजबूती के लिए अहम भूमिका निभाता है। बच्चों की ग्रोथ, टिश्यू रिपेयर, एंजाइम और हार्मोन बनाने में भी इसकी महत्वपूर्ण भागीदारी होती है।

अगर शरीर को पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिलता, तो मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, थकान महसूस होती है और इम्यून सिस्टम भी प्रभावित हो सकता है। ऐसे में रोजाना की डाइट में सही मात्रा में प्रोटीन शामिल करना जरूरी है।

शाकाहारी लोगों को प्रोटीन के लिए नॉनवेज पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। कई पौध-आधारित खाद्य पदार्थों में भरपूर प्रोटीन पाया जाता है, जैसे:

बाप रे बाप! 9 साल की मेहनत से तैयार ‘अजय राज’ गेहूं, 6.5 फीट ऊंची फसल, आंधी-बारिश में भी अडिग


 नई दिल्ली/सीकर। गेहूं उत्पादक किसानों के लिए राहत भरी खबर है। राजस्थान के सीकर निवासी किसान विकास कुमार सैनी ने 9 वर्षों की मेहनत के बाद ‘अजय राज’ नामक गेहूं की नई वैरायटी विकसित की है। यह किस्म करीब 6.5 फीट ऊंची बताई जा रही है और दावा किया जा रहा है कि आंधी, बारिश और तेज हवाओं में भी फसल आसानी से नहीं गिरती।

विकास कुमार सैनी हाल ही में अपनी इस विशेष किस्म को भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान लेकर पहुंचे, जहां इसे देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। बताया जा रहा है कि यह गेहूं पोषण से भरपूर, स्वाद में बेहतर और मौसम के प्रतिकूल प्रभावों को सहन करने में सक्षम है।

किसान का दावा है कि यदि यह किस्म बड़े स्तर पर अपनाई जाती है तो पारंपरिक किस्मों की तुलना में किसानों को दोगुना नहीं बल्कि तीन गुना तक लाभ मिल सकता है। यही वजह है कि इसे ‘सुपर फूड’ गेहूं भी कहा जा रहा है।

विकास सैनी ने इस वैरायटी पर अपने अधिकार सुरक्षित रखने के लिए प्रोटेक्शन ऑफ प्लांट वैराइटीज एंड फार्मर्स राइट्स अथॉरिटी में आवेदन भी किया है, ताकि भविष्य में इस पर उनका स्वामित्व सुनिश्चित रहे। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह किस्म सभी परीक्षणों पर खरी उतरती है, तो यह गेहूं उत्पादन के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है।

इजरायल में पीएम मोदी का भव्य स्वागत, सारा नेतन्याहू के भगवा परिधान ने खींचा ध्यान


 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को आधिकारिक दौरे पर इजरायल पहुंचे, जहां उनका जोरदार स्वागत किया गया। एयरपोर्ट पर खुद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपनी पत्नी सारा नेतन्याहू के साथ मौजूद रहे। दोनों नेताओं के बीच गर्मजोशी साफ दिखाई दी। उन्होंने गले मिलकर एक-दूसरे का स्वागत किया, जो भारत-इजरायल के मजबूत रिश्तों का प्रतीक माना जा रहा है।

इस दौरान एक दिलचस्प दृश्य ने सबका ध्यान खींचा। सारा नेतन्याहू भगवा रंग की ड्रेस में नजर आईं। भारतीय संस्कृति में भगवा रंग त्याग, आध्यात्मिकता और साहस का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में उनके इस परिधान को लेकर कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों और सोशल मीडिया पर भी चर्चा शुरू हो गई। कई लोगों ने इसे भारत के प्रति सम्मान और सांस्कृतिक जुड़ाव का संकेत बताया।

भारत और इजरायल के संबंध पिछले कुछ वर्षों में तेजी से मजबूत हुए हैं। रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं। पीएम मोदी का यह दौरा द्विपक्षीय सहयोग को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा से रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी और मजबूत होगी।

Tuesday, 24 February 2026

आर. डी. इंटरनेशनल स्कूल के समारोह प्रतिभाओ का सम्मान


 नई दिल्ली , आर. डी. इंटरनेशनल स्कूल पॉकेट 9 & 13 सेक्टर 21, रोहिणी दिल्ली में आज अपना वार्षिक बड़ी धूम-धाम से मनाया । समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इस अवसर पर श्रीमती ओमशीलासत्यवीर सिंह भास्करअतिथि के रूप में उपस्थित थे । स्कूल स्टाफशिक्षकशिक्षिकाएंप्रिंसिपलस्थानीय गणमान्य लोगछात्र-छात्राएं सहित भारी संख्या में अभिभावक गण मौजूद थे । स्कूल के छात्र-छात्राओं ने आकर्षकमनमोहकसांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए | स्कूल के चेयरमैनश्री राहुल ढाका ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की | इस अवसर पर स्कूल के लिए बड़े गर्व की बात है की स्कूल के छात्रों ने गोल्डसिल्वरपदक भी जीते |

उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए स्कूल की प्रिंसिपल योगिता ढाकाने कहा कि इस आर. डी. इंटरनेशनल स्कूल को स्वर्गीय श्री जयकिशन जीव श्रीमती सुशीला जयकिशनराहुल ढाकावरुण ढाकावरुणा ढाकाव स्टाफ ने अपनी मेहनत से खड़ा किया है इसी दौरान पूर्व चेयरमैन स्वर्गीय श्री जय किशन जी की याद किया व  हमें हमेसा उनके मार्गदर्शन पे चलना चाहिए मैं उनका अभिनंदन करती हूं । आजका दिन छात्रों के लिए तो महत्वपूर्ण होता ही है अभिभावकों के लिए उससे भी अधिक महत्वपूर्ण होता है |

उन्होंने कहा कि आज-कल जो क्राइम बढ़ रहे है उनसे अपने बच्चों को दूर रखते हुए उन्हे अच्छा नागरिक बनाएं । उन्होंने कहा कि जीत के लिए जुनून चाहिए । कार्यक्रम को श्रीमति ओमशीलासत्यवीर सिंह भास्कर आदि ने भी संबोधित किया और छात्र-छात्राओं को मनोबल बढ़ाया । अपने देश व स्कूल का नाम रोशन करें बच्चों के माता-पिता को भी अपने बच्चों का खेल के लिए प्रोत्साहन करें  | कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे स्कूल के चेयरमैन राहुल ढाका ने आमंत्रित अतिथियों का आभार प्रकट किया व भारी संख्या में मौजूद अभिभावकों का स्वागत करते हुए कहा कि आपके  सहयोग से मैं बहुत उत्साहित हूं जिसमें पिछले शैक्षणिक वर्ष की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं को रेखांकित किया गया । मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों के प्रदर्शन की सराहना की और छात्रों को उत्कृष्टता के लिए प्रेरित किया। शारीरिक शिक्षा के अतिरिक्त विदेशी भाषाओं की पढ़ाई भी इसी स्कूल में पढ़ाई जाती है । अंत मेंमेधावी छात्रों को शिक्षाखेल और कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पुरस्कार वितरित किए गए। समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। कार्यक्रम में पूर्व विधायका सुशीला जय किशनराहुल ढाकायोगिता ढाकावरुण ढाकावरुणा ढाकास्कूल स्टाफआदि की प्रमुख भूमिका रही |

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमले जारी: हिंदू महिला से दुष्कर्म, वकील की हत्या से कानून-व्यवस्था पर सवाल


 Bangladesh में सत्ता परिवर्तन के बाद भी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालिया घटनाओं ने कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चांदनीपुर इलाके में एक दिव्यांग हिंदू महिला के साथ कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म की वारदात सामने आई है। पीड़िता के परिवार ने आरोप लगाया है कि घटना में शामिल तीनों आरोपी पहचाने जा चुके हैं, लेकिन अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई है। इस मामले ने स्थानीय स्तर पर आक्रोश को जन्म दिया है।

इसी बीच गायकबांधा क्षेत्र में एक हिंदू वकील की घर में घुसकर हत्या कर दी गई। बताया जा रहा है कि हमलावरों ने धारदार हथियार से वार कर उनकी जान ली। इन घटनाओं के बाद अल्पसंख्यक समुदाय में भय का माहौल है।

देश के प्रधानमंत्री Tarique Rahman के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बावजूद विपक्षी दल और मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि जमीनी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा। हालांकि सरकार की ओर से कहा गया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और जांच जारी है।

इन घटनाओं ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।