प्रयागराज। माघ मेला 2026 के दौरान उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब प्रशासन ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का रथ रोक दिया और उन्हें भीड़ को देखते हुए पैदल जाने के लिए कहा। इस घटना के बाद संत समाज और प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति बन गई है।
जानकारी के मुताबिक, शंकराचार्य अपने रथ के साथ मेला क्षेत्र में प्रवेश कर रहे थे, तभी भारी भीड़ और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए प्रशासन ने रथ को आगे बढ़ने से रोक दिया। अधिकारियों ने उनसे अनुरोध किया कि वे पैदल यात्रा करें ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इस पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने नाराजगी जताते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “बड़े-बड़े अधिकारी संत को मार रहे हैं, पुलिस वाले संत को मार रहे हैं, संत को मारा जा रहा है।” उनके इस बयान से मामला और गरमा गया है। संत समाज ने इसे धार्मिक भावनाओं और साधु-संतों के सम्मान के खिलाफ बताया है।
प्रशासन की ओर से कहा गया है कि निर्णय केवल भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के मद्देनजर लिया गया था, किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना उद्देश्य नहीं था। अधिकारियों का कहना है कि माघ मेले में लाखों श्रद्धालु आते हैं, ऐसे में किसी भी बड़े वाहन या रथ से भगदड़ का खतरा बन सकता है।
फिलहाल इस मुद्दे पर संत समाज और प्रशासन के बीच बातचीत की संभावना जताई जा रही है। घटना ने माघ मेले की व्यवस्था और वीआईपी मूवमेंट पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
.jpg)
No comments:
Post a Comment