हरिद्वार, योगराज शर्मा। देवभूमि हरिद्वार 6 सितंबर 2026 को एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक समागम की साक्षी बनी। भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और अध्यात्म को आधुनिक माध्यमों के जरिए देश-दुनिया तक पहुंचाने वाले संतों, महंतों, आचार्यों, कथावाचकों, आध्यात्मिक इन्फ्लुएंसर्स, कलाकारों, युवा प्रतिभाओं और सामाजिक क्षेत्र की विशिष्ट हस्तियों का अभूतपूर्व संगम यशेल होटल, सेक्टर-12, हरिद्वार में आयोजित “ग्लोबल स्पिरिचुअल कॉन्क्लेव एवं आचार्य देवो भव अवॉर्ड्स 2026” में देखने को मिला। जीसीएल एजुकेशनल सोसाइटी, नेकी की राह, सनातन पथ एवं मां सीता रसोई के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक समारोह नहीं, बल्कि सनातन विचारधारा, भारतीय संस्कृति, युवा शक्ति और आध्यात्मिक चेतना को एक वैश्विक मंच से जोड़ने की महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।
कॉन्क्लेव की प्रमुख विशेषता
देश-विदेश में भारतीय संस्कृति और सनातन विचारधारा को प्रभावशाली तरीके से
प्रस्तुत करने वाले युवा चेहरों की सहभागिता रही। इस अवसर पर विश्वप्रसिद्ध सनातनी
इन्फ्लुएंसर ईशिका तनेजा जी एवं विश्वप्रसिद्ध भजन गायिका और वृंदावन की बेटी आरती
खेत्रपाल जी सहित अनेक प्रभावशाली युवा प्रतिभाओं ने अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम का उद्देश्य सनातन को
केवल परंपरा के रूप में प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि इसे ज्ञान, संस्कार, सेवा, मानवता और सकारात्मक जीवन-दृष्टि के रूप में युवा पीढ़ी तक पहुंचाना रहा। कार्यक्रम
में आध्यात्मिक विचार-विमर्श के साथ भारतीय संगीत एवं संस्कृति की शानदार
प्रस्तुतियां भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं।
प्रसिद्ध पंजाबी गायक सागर कथा जी, ‘वॉइस ऑफ पंजाब’ एवं हिमाचल फेम
दिशिता सिंह जी तथा प्रसिद्ध भजन गायिका नितिका शर्मा जी ने अपनी विशेष
प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।
इसके साथ ही हरियाणवी कलाकार अंशु
राणा जी एवं सुशील मस्ताना जी तथा पंजाबी कलाकार मन्ना सिंह जी ने भी अपनी कला के
माध्यम से कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग भरा।
आयोजन में नई पीढ़ी की प्रतिभाओं
और विचारों को विशेष महत्व दिया गया। प्रसिद्ध बाल कवयित्री आहूति शुक्ला जी एवं
अभिनव अरोड़ा जी ने भी अपने विचार साझा किए।
भारतीय संस्कृति में पारंपरिक
परिधान धोती को बढ़ावा देने वाले विनय शर्मा जी एवं विपिन पंडित जी ने भी
कार्यक्रम में सहभागिता की और भारतीय परंपराओं एवं सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण
का संदेश दिया।
आयोजकों के अनुसार, यदि सनातन की जड़ों को मजबूत करना
है तो बच्चों और युवाओं को भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कार, संस्कृति और अध्यात्म से जोड़ना
आवश्यक है। इसी उद्देश्य के साथ कॉन्क्लेव में बाल एवं युवा प्रतिभाओं को विशेष
मंच प्रदान किया गया।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण
“आचार्य देवो भव अवॉर्ड्स 2026” रहा। इस अवसर पर सनातन धर्म, अध्यात्म, भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं, सामाजिक सेवा एवं आध्यात्मिक
जागरूकता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले संतों, महंतों, आचार्यों, कथावाचकों एवं विशिष्ट विभूतियों
को सम्मानित किया गया। यह सम्मान भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा की उस महान भावना को
समर्पित रहा, जिसमें “आचार्य देवो भवः” के माध्यम से गुरु को ज्ञान, संस्कार और जीवन-दर्शन का
मार्गदर्शक माना गया है।
आयोजन के प्रमुख संयोजक डॉ. गौरव
शर्मा ने कहा कि आज भारत की युवा शक्ति को अपनी संस्कृति और जड़ों से जोड़ना समय
की सबसे बड़ी आवश्यकताओं में से एक है।
उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य केवल सनातन की बात
करना नहीं, बल्कि सनातन के मूल्यों—संस्कार, सेवा, सद्भाव, मानवता और सकारात्मक जीवन-दृष्टि—को युवा पीढ़ी के जीवन का हिस्सा बनाना है।
आज जब युवा विभिन्न प्रकार की नकारात्मक गतिविधियों और नशे जैसी चुनौतियों से
प्रभावित हो रहे हैं, तब अध्यात्म उन्हें सही दिशा और उद्देश्य दे सकता है।” डॉ. शर्मा ने कहा कि
“भारत की हजारों वर्षों पुरानी ज्ञान परंपरा में पूरी मानवता के कल्याण का संदेश
है। हमारा प्रयास है कि इसी विरासत को आधुनिक माध्यमों और युवा शक्ति के जरिए
विश्व के सामने रखा जाए तथा भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने के संकल्प को मजबूत किया
जाए।”
आयोजन की प्रमुख सहयोगी मनप्रीत
कौर जी ने कहा, “आज की युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति और संस्कारों से जोड़ना केवल हमारी
जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हमारा सामूहिक संकल्प होना चाहिए। ग्लोबल स्पिरिचुअल कॉन्क्लेव इसी दिशा
में एक सकारात्मक प्रयास रहा, जहां आध्यात्मिकता और युवा ऊर्जा का सुंदर संगम देखने को मिला।” उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि सनातन का संदेश
देश की सीमाओं तक सीमित न रहे, बल्कि विश्वभर के युवाओं तक पहुंचे और उन्हें भारतीय संस्कृति, अध्यात्म तथा मानवता के मूल्यों से
जोड़े।”
आयोजकों के अनुसार, हरिद्वार की पावन धरती पर आयोजित
यह कार्यक्रम संत शक्ति, युवा शक्ति, कला, संस्कृति और
आध्यात्मिक विचारों का अभूतपूर्व संगम साबित हुआ। ग्लोबल स्पिरिचुअल कॉन्क्लेव के
माध्यम से सनातन को आधुनिक पीढ़ी से जोड़ने का संदेश दिया गया, वहीं आचार्य देवो भव अवॉर्ड्स के
माध्यम से उन संतों और विभूतियों के योगदान को सम्मानित किया गया, जो समाज में आध्यात्मिक चेतना, संस्कार और सकारात्मक विचारों का
प्रसार कर रहे हैं। इस भव्य आयोजन का संयोजन डॉ. गौरव शर्मा, मनप्रीत कौर जी, राज कुमार शर्मा जी, अंशुल पराशर जी एवं श्वेता जी
द्वारा किया गया। देवभूमि हरिद्वार में आयोजित यह आयोजन सनातन, संस्कृति, अध्यात्म और युवा चेतना के क्षेत्र
में एक यादगार अध्याय के रूप में सामने आया और भविष्य में सनातन के वैश्विक
प्रचार-प्रसार के लिए एक मजबूत एवं सकारात्मक मंच के रूप में इसकी नई दिशा तय हुई।
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