Thursday, 15 January 2026

“Vastu Tips: घर के मंदिर में घंटी या घंटा टांगना क्यों माना जाता है वर्जित? जानिए चौंकाने वाला कारण”


 अक्सर हम देखते हैं कि बड़े सार्वजनिक मंदिरों में प्रवेश द्वार पर या गर्भगृह के पास घंटी या घंटा जरूर लटका रहता है। भक्त दर्शन से पहले घंटी बजाते हैं, ताकि वातावरण शुद्ध हो और देवी-देवताओं का ध्यान आकर्षित हो।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि घर के मंदिर में घंटी या घंटा क्यों नहीं टांगा जाता? वास्तु शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसके पीछे गहरे आध्यात्मिक और ऊर्जात्मक कारण बताए गए हैं।

मान्यता है कि सार्वजनिक मंदिरों में घंटी इसलिए लगाई जाती है ताकि वहां आने वाली भीड़, शोर-शराबा और नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम हो सके। घंटी की ध्वनि वातावरण को शुद्ध करती है और मन को एकाग्र करती है।

वहीं घर का मंदिर एक निजी, शांत और सात्विक स्थान माना जाता है। माना जाता है कि यहां पहले से ही सकारात्मक ऊर्जा रहती है, इसलिए तेज आवाज वाली घंटी की जरूरत नहीं होती। वास्तु के अनुसार घर के मंदिर में घंटी टांगने से ध्यान भटक सकता है और पूजा का शांत माहौल भंग हो सकता है।

इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि घर का मंदिर व्यक्तिगत साधना का स्थान होता है, जहां मन की शांति और भक्ति प्रधान होती है, न कि दिखावा या औपचारिकता। इसलिए यहां घंटा या बड़ी घंटी लगाना उचित नहीं माना जाता।

हालांकि अगर कोई छोटा घुंघरू या हल्की ध्वनि वाली घंटी रखना चाहे तो कुछ परंपराओं में इसकी अनुमति भी दी जाती है—बशर्ते वह पूजा में बाधा न बने।

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